मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी संकट का असर अब पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों पर साफ दिखने लगा है. आमतौर पर देखा जाता है कि जब भी दुनिया में युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने (Gold) की तरफ भागते हैं और कीमतें आसमान छूने लगती हैं, लेकिन इस बार बाजार की तस्वीर थोड़ी अलग और चौंकाने वाली है. सोने और चांदी की कीमतें अपने ऑल टाइम हाई लेवल से काफी नीचे आ चुकी हैं और अब मार्केट एक्सपर्ट्स ने इस पर एक बड़ी चेतावनी जारी कर दी है.
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घरेलू बाजार में सोने-चांदी का हाल
IBJA (India Bullion and Jewellers Association) द्वारा जारी रेट की बात करें तो शुक्रवार दोपहर 12 बजे जारी रेट के मुताबिक सोना 24 कैरेट प्रति 10 ग्राम 1300 रुपए तक लुढ़ककर 154,190 रुपए पर पहुंच गया है. वहीं चांदी 6000 रुपए तक सस्ती हो गई है.
भारतीय वायदा बाजार (MCX) में गुरुवार दोपहर के कारोबार के दौरान अगस्त डिलीवरी वाला सोना करीब 501 रुपए की तेजी के साथ 1,59,020 रुपए के स्तर पर ट्रेड करता दिखा. वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 355 की गिरावट के साथ 2,62,603 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी. हालांकि मामूली रिकवरी के बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों कीमती धातुओं पर इस वक्त जबरदस्त दबाव है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई बड़ी गिरावट
ग्लोबल मार्केट की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 1.24% गिरकर स्पॉट गोल्ड लगभग 4432 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई. वहीं चांदी में इससे भी बड़ी गिरावट देखी गई. स्पॉट सिल्वर करीब 3.17% की कमजोरी के साथ 72.75 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है.
युद्ध के बावजूद आखिर क्यों टूट रहे हैं सोने के दाम?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक तनाव के बाद भी सोने-चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट और दबाव के पीछे 3 सबसे बड़ी वजह काम कर रही हैं.
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती: वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है, जिससे अन्य करेंसी वाले निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है.
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: अमेरिका-ईरान तनाव के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) 96 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है.
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में उछाल: अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज बढ़ गया है. चूंकि सोने पर कोई नियमित ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए निवेशक इस समय सोने की बजाय बॉन्ड में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद मान रहे हैं.
इसके अलावा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए मजबूत आंकड़ों (जैसे मई में उम्मीद से ज्यादा 1,22,000 नई नौकरियां जुड़ना और सर्विस सेक्टर का मजबूत होना) ने भी सोने की चमक को थोड़ा फीका किया है, क्योंकि मजबूत अर्थव्यवस्था के बीच निवेशक जोखिम लेने से नहीं डरते.
एक्सपर्ट्स की चेतावनी: अब आगे क्या होंगे नए टारगेट?
मार्केट एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को सचेत करते हुए सोने और चांदी के लिए महत्वपूर्ण स्तर (Levels) साझा किए हैं:
- सोने के लिए अहम स्तर: सोने के लिए पहला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल 4436 डॉलर से 4460 डॉलर के बीच है. अगर सोना इसके ऊपर टिकता है, तो कीमतें 4526 डॉलर तक जा सकती हैं, लेकिन, अगर गिरावट जारी रही और सोना 4426 डॉलर के नीचे फिसला, तो यह 4400 डॉलर और फिर 4367 डॉलर तक कमजोर हो सकता है.
- चांदी के लिए अहम स्तर: चांदी के लिए 74.50 डॉलर और 75.50 डॉलर का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है. इसमें कमजोरी बढ़ने पर भाव पहले 72 डॉलर और फिर 70 डॉलर तक भी नीचे आ सकते हैं.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान संकट ने वैश्विक बाजारों में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. जहां एक तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई का बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं, वहीं शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट दबाव में हैं. निवेशकों को सलाह है कि वे बाजार की इस भारी अस्थिरता को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम रखें.
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