gold silver price news: शेयर बाजार में आई तेजी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती के कारण घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की मांग घट गई है. इसके चलते राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार को सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई. दिल्ली सराफा बाजार में सोना 960 रुपए गिरकर 1.53 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया, जबकि चांदी की कीमतों में 6,660 रुपए की भारी गिरावट देखी गई. शेयर बाजार में मजबूती आने से निवेशकों के बीच सोने की 'सुरक्षित निवेश' (safe-haven) वाली अपील कम हुई है.
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क्या हैं सोने-चांदी के नए भाव?
ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, बाजार में सोने और चांदी की नई कीमतें-
सोना (99.9% शुद्धता): बुधवार के बंद भाव 1,54,400 रुपए से 960 रुपए की गिरावट के साथ अब 1,53,440 रुपए प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर आ गया है.
चांदी: पिछले सत्र के भाव 2,55,400 रुपए से 6,660 की भारी बिकवाली के दबाव के बाद अब 2,48,740 रुपए प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर बंद हुई.
क्यों आई कीमती धातुओं में यह गिरावट?
बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू शेयर बाजार के मजबूत रहने और रुपये में आई मजबूती की वजह से निवेशकों ने बुलियन (सोना-चांदी) से अपना पैसा निकालकर दूसरी जगहों पर लगाना शुरू कर दिया है.
इसके अलावा, बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया नीतिगत फैसले और नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों का भी आंकलन कर रहा है. LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट (VP) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, "नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों से संकेत मिला है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत रही, तो 2026 में ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी हो सकती है." फेड के इस आंकलन ने डॉलर को मजबूत किया और बुलियन की कीमतों पर दबाव बनाया.
वैश्विक बाजार का हाल और भू-राजनीतिक असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली सुधार देखा गया, जहां स्पॉट गोल्ड की कीमत थोड़ी बढ़कर 4,266.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 0.38 प्रतिशत बढ़कर 68.17 डॉलर प्रति औंस हो गई. यह मामूली बढ़ोतरी तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत और तनाव कम करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए.
HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच इस अंतरिम शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति ने भू-राजनीतिक जोखिमों और महंगाई की चिंताओं को कम किया है, जिससे बुलियन को कुछ सहारा मिला है.
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