सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. जिन कीमती धातुओं ने कुछ समय पहले रिकॉर्ड स्तरों को छुआ था, उनमें अब बड़ा करेक्शन देखने को मिल रहा है. बाजार में कई निवेशक इस गिरावट को कमजोरी के संकेत के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन इसी बीच दुनिया के जाने-माने लेखक और निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी का नजरिया बिल्कुल अलग है.
ADVERTISEMENT
Rich Dad Poor Dad के लेखक कियोसाकी का मानना है कि कीमतों में गिरावट हमेशा डरने की वजह नहीं होती. कई बार यही गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बड़ा मौका बन सकती है. यही वजह है कि जब बाजार में सोना और चांदी दबाव में हैं, तब कियोसाकी ने इसे खरीदारी के अवसर के तौर पर देखा है. लेकिन सवाल ये है कि आखिर कियोसाकी ऐसा क्या देख रहे हैं, जो बाकी निवेशक नहीं देख पा रहे? क्या सोने-चांदी की मौजूदा गिरावट वाकई एक बड़े मौके में बदल सकती है या फिर आने वाले समय में कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है?
सोना-चांदी क्यों दबाव में हैं?
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के कमोडिटी मार्केट तक, सोने और चांदी दोनों में कमजोरी देखने को मिल रही है. कुछ समय पहले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली चांदी अब अपने ऊपरी स्तरों से काफी नीचे आ चुकी है. वहीं सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली है. भारत में MCX पर सोने का भाव करीब 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया है. वहीं चांदी करीब 2.16 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है. इस गिरावट का असर उन निवेशकों पर ज्यादा पड़ा है, जिन्होंने ऊंचे स्तरों पर खरीदारी की थी. ऐसे निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट चिंता का कारण बन गई है. लेकिन इसी बीच एक ऐसा निवेशक भी है, जो गिरावट से घबराने के बजाय इसे खरीदारी के मौके के तौर पर देख रहा है.
कौन हैं रॉबर्ट कियोसाकी और क्यों कर रहे हैं सोने-चांदी की बात?
रॉबर्ट कियोसाकी को दुनिया भर में उनकी किताब Rich Dad Poor Dad के लिए जाना जाता है. वह लंबे समय से निवेशकों को सलाह देते रहे हैं कि सिर्फ कागजी संपत्तियों पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं है. उनका मानना है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में सोना और चांदी जैसे वास्तविक एसेट्स को भी जगह देनी चाहिए. हाल ही में कियोसाकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट की, जिसके बाद वह फिर चर्चा में आ गए. उन्होंने संकेत दिया कि सोना और चांदी लंबे समय में काफी ऊपर जा सकते हैं, लेकिन इस सफर के दौरान बड़ी गिरावट आना भी बाजार का हिस्सा है. कियोसाकी ने अपने दोस्त और दिग्गज निवेशक जिम रॉजर्स की राय का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, कीमती धातुओं में बड़ी तेजी से पहले बड़े करेक्शन देखने को मिल सकते हैं.
कियोसाकी के मुताबिक गिरावट क्यों है मौका?
कियोसाकी का मानना है कि ज्यादातर निवेशक बाजार में एक ही गलती करते हैं. जब कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं, तब लोग खरीदारी करने लगते हैं. लेकिन जब बाजार गिरता है, तो डर के कारण अपनी हिस्सेदारी बेच देते हैं. इसके उलट बड़े निवेशक अक्सर गिरावट को अलग नजरिए से देखते हैं. वे कमजोर कीमतों को लंबी अवधि में एंट्री के मौके के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. कियोसाकी के मुताबिक उन्होंने भी इस गिरावट के दौरान सोना और चांदी खरीदी है. उनका तर्क है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है. बढ़ता वैश्विक कर्ज, महंगाई की चिंता और आर्थिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता आने वाले समय में बनी रह सकती है. ऐसे माहौल में उनके अनुसार सोना और चांदी जैसे एसेट्स निवेशकों को सुरक्षा दे सकते हैं.
सोने और चांदी में कितनी बड़ी गिरावट आई?
कियोसाकी के मुताबिक, सोने की कीमत एक समय करीब 5,405 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी. इसके बाद इसमें गिरावट आई और कीमत करीब 4,006 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई. वहीं चांदी भी अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ गई. चांदी करीब 118 डॉलर प्रति औंस के स्तर से फिसलकर लगभग 56 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई. यानी जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर खरीदारी की थी, उन्हें इस गिरावट में बड़ा नुकसान देखने को मिला. हालांकि कियोसाकी इसे बाजार का सामान्य हिस्सा मानते हैं.
लेकिन बाजार की तस्वीर पूरी तरह कियोसाकी के पक्ष में नहीं है
जहां एक तरफ कियोसाकी गिरावट को अवसर बता रहे हैं, वहीं बाजार के कुछ संकेत सोने पर दबाव की ओर इशारा कर रहे हैं. सोने की कमजोरी की बड़ी वजहों में मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर चिंता शामिल है. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशकों को बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड इनकम विकल्प ज्यादा आकर्षक लगते हैं. वहीं सोना एक ऐसा एसेट है, जो कोई ब्याज नहीं देता. इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोने पर दबाव आना सामान्य माना जाता है. अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखता है, तो आने वाले समय में सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
फिर भी सोने को मिल सकता है सपोर्ट
हालांकि कहानी का दूसरा पहलू भी है. अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है, महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है या निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में वापस आते हैं, तो सोने को फिर से मजबूती मिल सकती है. यही वजह है कि कुछ निवेशक मौजूदा गिरावट को डर नहीं बल्कि अवसर के तौर पर देख रहे हैं. सोने को लंबे समय से एक सुरक्षित निवेश यानी Safe Haven Asset के तौर पर देखा जाता है. जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो कई निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं.
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कियोसाकी की सलाह मानकर अभी सोना और चांदी खरीद लेना चाहिए? इसका जवाब हर निवेशक के लिए अलग हो सकता है. क्योंकि सोने और चांदी की कीमतों पर कई फैक्टर एक साथ असर डालते हैं. इनमें अमेरिकी डॉलर की दिशा, ब्याज दरों का रुख, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक तनाव सबसे अहम हैं. अगर डॉलर मजबूत रहता है और ब्याज दरों को लेकर चिंता बनी रहती है, तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है. वहीं अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है और निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ लौटते हैं, तो यही गिरावट खरीदारी का मौका भी बन सकती है.
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
फिलहाल सोना और चांदी को लेकर बाजार दो हिस्सों में बंटा हुआ है. एक तरफ ऐसे निवेशक हैं, जो मौजूदा गिरावट को आगे और कमजोरी की शुरुआत मान रहे हैं. दूसरी तरफ रॉबर्ट कियोसाकी जैसे निवेशक हैं, जो इसे लंबे समय के लिए खरीदारी के अवसर के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि किसी भी निवेश का फैसला सिर्फ किसी एक एक्सपर्ट की राय के आधार पर नहीं लेना चाहिए. निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश की अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए. क्योंकि बाजार में असली फायदा वही निवेशक उठाता है, जो डर के समय भी सोच-समझकर सही निर्णय लेता है.
ADVERTISEMENT

