Gold-Silver Crash: सोना हुआ धड़ाम, चांदी 11 महीने के निचले स्तर पर, क्या अभी खरीदारी का मौका है?

चिराग ठाकुर

• 07:37 PM • 31 Oct 2026

सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई है. अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई और बाजार की बिकवाली के बीच जानें निवेशकों को अभी कौन सी सावधानी जरूर रखनी चाहिए.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

एमसीएक्स पर दिसंबर वायदा सोना 1,38,386 रुपये के करीब पहुंचा

दिसंबर वायदा चांदी 1,79,308 रुपये प्रति किलो पर कारोबार करती दिखी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंची

सोना और चांदी, जिन्हें निवेशक अक्सर मुश्किल वक्त में सुरक्षित विकल्प मानते हैं, अब खुद भारी बिकवाली का सामना कर रहे हैं. कुछ समय पहले तक इनकी कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है. 30 अक्टूबर को कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन MCX पर सोना 4,000 रुपये से ज्यादा टूट गया, जबकि चांदी में 10,553 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट सोने के मुकाबले करीब दोगुनी रही.

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ऐसे में सवाल है कि आखिर इन दोनों कीमती धातुओं की चमक अचानक क्यों फीकी पड़ गई? क्या अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका इसकी सबसे बड़ी वजह है? और क्या मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका बन सकती है?

MCX से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक, सोने-चांदी में गिरावट

30 अक्टूबर को MCX पर 4 दिसंबर एक्सपायरी वाला सोने का वायदा भाव गिरकर करीब 1,38,386 रुपये पर पहुंच गया. वहीं, 4 दिसंबर एक्सपायरी वाला चांदी का वायदा भाव करीब 1,79,308 रुपये प्रति किलो पर आ गया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का हाल:

  • स्पॉट गोल्ड करीब 3.04 फीसदी गिरकर 3,899 डॉलर प्रति औंस पर.

  • स्पॉट सिल्वर करीब 6 फीसदी टूटकर 49.06 डॉलर प्रति औंस पर.

  • चांदी का भाव करीब 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा.

यानी गिरावट सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही. दुनिया भर के बाजारों में सोने और चांदी पर दबाव देखने को मिला.

अमेरिका में ब्याज दरों की आशंका ने क्यों बढ़ाई मुश्किल?

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की पहली बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है. अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के ऊंचे स्तर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. बाजार को आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है.

इसका सोने और चांदी से सीधा संबंध है. इन दोनों धातुओं से निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं मिलता. इसके उलट, जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो अमेरिकी सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. ऐसे में कुछ निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश करना पसंद करते हैं. इससे कीमती धातुओं की मांग और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है.

महंगा कच्चा तेल और शेयर बाजार की बिकवाली भी बनी वजह

दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं. तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है. इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है. नतीजतन, निवेशकों की चिंता और बढ़ जाती है.

तीसरी वजह वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली है. खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट के बाद कुछ निवेशक दूसरे निवेशों में अपनी पोजीशन बेचकर नुकसान की भरपाई कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में सोना और चांदी भी बिकवाली की चपेट में आ गए. यानी जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, वे भी इस बार बाजार के दबाव से नहीं बच पाए.

सोने से ज्यादा चांदी पर दबाव, आगे क्या संकेत?

Kotak Neo की कमोडिटी रिसर्च से जुड़ी कायनात चेनवाला के मुताबिक, अक्टूबर में सोने की कीमतों में 4 फीसदी से ज्यादा और चांदी में 16 फीसदी से ज्यादा की गिरावट की ओर रुझान था. यह दिखाता है कि मौजूदा दौर में चांदी पर सोने के मुकाबले ज्यादा दबाव है.

चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का भी असर पड़ता है. इसलिए इसकी चाल सिर्फ निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग से तय नहीं होती.

क्या निवेशकों को अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए?

कीमतों में तेज गिरावट के बाद निवेशकों के मन में खरीदारी का सवाल उठना स्वाभाविक है. लेकिन सिर्फ भाव नीचे आने को खरीदारी का संकेत मानना सही रणनीति नहीं होगी. अगर अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई और वैश्विक बाजारों से जुड़ा दबाव बना रहता है, तो कीमतों में और गिरावट या उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

निवेशकों के लिए कुछ अहम बातें:

  • लंबी अवधि का नजरिया: एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करने पर विचार किया जा सकता है.

  • ऊंचे भाव पर खरीदारी करने वाले: घबराहट में जल्दबाजी से बचें और अपने निवेश की अवधि को ध्यान में रखें.

  • जोखिम का आकलन: सोने और चांदी में निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता जरूर देखें.

फिलहाल सोने और चांदी की तेजी पर ब्रेक लगा है. आगे इनकी दिशा अमेरिकी फेड के ब्याज दरों पर रुख, महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की चाल से तय हो सकती है. निवेशकों को यह समझना होगा कि सोना और चांदी सुरक्षित निवेश के विकल्प माने जाते हैं, लेकिन इनकी कीमतें भी तेज उतार-चढ़ाव से अछूती नहीं हैं.