जून के महीने में तेज गिरावट देखने के बाद क्या सोना और चांदी ने फिर से वापसी शुरू कर दी है? क्या अब कीमतों में एक नया उछाल देखने को मिल सकता है या हालिया तेजी सिर्फ कुछ दिनों की राहत है? अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, या पहले से इनमें निवेश कर चुके हैं, तो जुलाई का बुलियन आउटलुक आपके लिए बेहद अहम हो सकता है. बाजार के जानकारों का मानना है कि जून की कमजोरी के बाद फिलहाल दोनों कीमती धातुओं में भरोसा लौटता दिख रहा है. हालांकि, आगे की दिशा पूरी तरह वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी नीतियों पर निर्भर करेगी.
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जून की बड़ी गिरावट के बाद क्यों लौटी तेजी?
जून के दौरान सोना और चांदी में कई सालों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट देखने को मिली थी. लेकिन जुलाई की शुरुआत में बाजार का रुख बदलता नजर आया. पिछले कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन MCX पर सोना करीब 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1 लाख 47 हजार 365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं चांदी लगभग 1.8 प्रतिशत चढ़कर 2 लाख 37 हजार 499 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए आर्थिक संकेत रहे.
अमेरिकी आंकड़ों ने बदला बाजार का मूड
हालिया आर्थिक रिपोर्ट्स से संकेत मिले कि फिलहाल अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कमजोर पड़ गई है. जब निवेशकों को लगता है कि ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी या भविष्य में कम हो सकती हैं, तब वे दोबारा सोना और चांदी जैसे Safe Haven Assets की ओर रुख करते हैं. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदारी बढ़ी और उसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया.
क्या अब लगातार तेजी देखने को मिलेगी?
कमोडिटी एक्सपर्ट महेंद्र लुनिया के मुताबिक फिलहाल बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. उनका मानना है कि सोना इस समय एक महत्वपूर्ण Resistance Zone के आसपास कारोबार कर रहा है. ऐसे में समय-समय पर Profit Booking देखने को मिल सकती है. हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल बड़ी गिरावट की संभावना भी कम दिखाई दे रही है. ऐसे में अगले कुछ हफ्तों तक सोना और चांदी सीमित दायरे में कारोबार कर सकते हैं.
जुलाई में किन घटनाओं पर रहेगी बाजार की नजर?
इस महीने दो बड़े फैक्टर सोना और चांदी की दिशा तय कर सकते हैं. पहला, 15 जुलाई के आसपास आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और अन्य आर्थिक डेटा. दूसरा, महीने के आखिर में होने वाली अमेरिकी Federal Reserve की बैठक. अगर इन दोनों घटनाओं में कोई बड़ा सरप्राइज नहीं आता और Middle East में भू-राजनीतिक तनाव नहीं बढ़ता, तो बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रह सकता है. लेकिन इनमें से किसी भी मोर्चे पर बड़ा बदलाव आता है, तो सोना और चांदी में फिर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
क्या अभी निवेश करना सही रहेगा?
अगर आपका नजरिया लंबी अवधि का है, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा समय निवेश शुरू करने के लिए खराब नहीं है. उनके मुताबिक बाजार का बिल्कुल निचला स्तर पकड़ना लगभग असंभव होता है. इसलिए अगर कीमतें Bottom से 2 से 3 प्रतिशत ऊपर भी हों, तब भी SIP या चरणबद्ध निवेश की शुरुआत की जा सकती है. हाल के दिनों में Gold ETF, Digital Gold और Silver में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी भी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है.
अगले एक साल में कहां तक पहुंच सकते हैं सोना और चांदी?
कमोडिटी एक्सपर्ट महेंद्र लुनिया का अनुमान है कि अगले 6 महीने से 1 साल के दौरान सोना 1 लाख 72 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है. वहीं चांदी 2 लाख 75 हजार रुपये प्रति किलो का स्तर छू सकती है. हालांकि यह अनुमान कई वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. इनमें अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक माहौल प्रमुख होंगे.
निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ा संदेश?
जून की बड़ी गिरावट के बाद सोना और चांदी में भरोसा लौटता जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन फिलहाल अंधाधुंध तेजी की उम्मीद करना सही रणनीति नहीं होगी. आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, Federal Reserve के फैसले और Middle East की स्थिति यह तय करेंगे कि दोनों कीमती धातुओं की अगली चाल क्या होगी. अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में संपत्ति बनाना है, तो चरणबद्ध निवेश एक संतुलित रणनीति साबित हो सकती है. वहीं शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को अगले कुछ हफ्तों में संभावित उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए.
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