अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले के बाद सोना और चांदी के निवेशकों की नजर अब अगले कुछ हफ्तों पर टिक गई है. फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन इसके बावजूद बाजार में अनिश्चितता खत्म नहीं हुई है. यही वजह है कि अब निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना और चांदी एक बार फिर नई तेजी की ओर बढ़ेंगे या अभी कुछ समय तक उतार-चढ़ाव जारी रहेगा.
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फिलहाल बाजार कई ऐसे संकेतों पर नजर रख रहा है, जो आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की दिशा तय कर सकते हैं. इनमें अमेरिकी ब्याज दरों का भविष्य, रोजगार के आंकड़े, बॉन्ड यील्ड, डॉलर की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात सबसे अहम हैं.
फेड ने दरें नहीं बदलीं, लेकिन अनिश्चितता अभी भी कायम
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया. बाजार पहले से ही इस फैसले की उम्मीद कर रहा था, इसलिए इसका सोने और चांदी की कीमतों पर तत्काल बड़ा असर देखने को नहीं मिला. हालांकि, इस बैठक से एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर मिला. फेड के तीन अधिकारियों ने ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया. इससे यह साफ होता है कि महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. ऐसे में सितंबर की बैठक में एक बार फिर सख्त रुख अपनाए जाने की संभावना बनी हुई है.
सोने के सामने दबाव भी है और मजबूत सपोर्ट भी
सोने की कीमतों को इस समय दो विपरीत ताकतें प्रभावित कर रही हैं.
एक तरफ ऊंची ब्याज दरों की संभावना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती जैसे कारक बिना ब्याज वाले निवेश विकल्पों, जैसे सोना, पर दबाव बना सकते हैं. दूसरी तरफ दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीदारी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग सोने की कीमतों को सहारा दे रही है. यानी फिलहाल बाजार में तेजी और कमजोरी, दोनों तरह के संकेत एक साथ दिखाई दे रहे हैं.
घरेलू बाजार में कैसी रही चाल?
घरेलू वायदा बाजार MCX पर 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना करीब 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है. पिछले एक सप्ताह में इसमें करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं 4 सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 2.17 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है. इसमें पिछले एक सप्ताह के दौरान करीब 2.7 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली है.
आगे किस दिशा में जा सकता है सोना?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर आक्रामक खरीदारी करने के बजाय निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए. यदि कीमतों में गिरावट आती है, तो चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है. वैश्विक बाजार में सोना फिलहाल 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है. यदि यह स्तर मजबूती से कायम रहता है, तो आगे 4,200 डॉलर और उसके बाद 4,300 डॉलर प्रति औंस तक तेजी की संभावना बन सकती है.
घरेलू बाजार में इसका असर यह हो सकता है कि MCX पर सोना फिर से 1.44 लाख से 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर की ओर बढ़े.
हालांकि यदि सोना 4,000 डॉलर के अहम स्तर को बनाए रखने में असफल रहता है, तो 3,950 डॉलर तक दबाव बढ़ सकता है.
टेक्निकल चार्ट क्या संकेत दे रहे हैं?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार सोना इस समय एक बड़े कंसोलिडेशन फेज में है. पिछले लगभग छह सप्ताह से कीमतें एक सीमित दायरे में घूम रही हैं, जिससे साफ है कि खरीदार और बिकवाल अभी निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर पाए हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक 4,312 डॉलर प्रति औंस का स्तर सबसे अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है. यदि सोना इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो इसे एक मजबूत ब्रेकआउट माना जा सकता है. ऐसी स्थिति में आगे 4,493 डॉलर से 4,533 डॉलर प्रति औंस तक तेजी की संभावना बन सकती है.
वहीं दूसरी तरफ यदि सोना 3,700 डॉलर के नीचे फिसलता है, तो लंबी अवधि की तेजी कमजोर पड़ सकती है और गिरावट का दौर लंबा खिंच सकता है.
अमेरिकी रोजगार आंकड़े तय कर सकते हैं अगली दिशा
आने वाले दिनों में अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं. अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत आते हैं, तो इससे यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है. ऐसी स्थिति में फेड लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रख सकता है, जिससे सोने पर दबाव बढ़ सकता है. इसके विपरीत यदि रोजगार बाजार में कमजोरी दिखाई देती है, तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत हो सकती है. ऐसी स्थिति सोने के लिए सकारात्मक मानी जाएगी.
चांदी का आउटलुक क्यों दिख रहा है मजबूत?
सोने की तरह चांदी के लिए भी लंबी अवधि का दृष्टिकोण सकारात्मक माना जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि चांदी सिर्फ निवेश का साधन नहीं है, बल्कि इसका बड़े पैमाने पर औद्योगिक इस्तेमाल भी होता है. इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में बढ़ती मांग भविष्य में चांदी की खपत को सहारा दे सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू बाजार में चांदी 2 लाख से 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में रह सकती है. यदि तेजी लौटती है, तो यह फिर से करीब 2.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है.
किन जोखिमों पर रखनी होगी नजर?
हालांकि बाजार के सामने कुछ बड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं.
अमेरिकी ब्याज दर नीति, डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में बदलाव और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति आने वाले दिनों में सोना और चांदी की दिशा तय कर सकते हैं.अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में फेड पहले से ज्यादा सख्त रुख अपना सकता है, जिसका असर कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल सकता है.
निवेशकों के लिए क्या हो सकती है रणनीति?
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी की लंबी अवधि की कहानी अभी भी मजबूत नजर आती है. हालांकि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
ऐसे में तेजी का पीछा करने के बजाय गिरावट आने पर धीरे-धीरे निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जा रही है. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि सोना 4,312 डॉलर के अहम रेजिस्टेंस को पार करता है या फिर 4,000 डॉलर के नीचे दबाव में आता है. यही अगले बड़े ट्रेंड का संकेत दे सकता है.
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