Gold-Silver Outlook: अगले हफ्ते बड़ी गिरावट की तरफ बढ़ रहा सोना, America से आए संकेत ?

चिराग ठाकुर

• 02:20 PM • 19 Jul 2026

सोना 4000 डॉलर के नीचे फिसलने के बाद थोड़ा संभला है, लेकिन डॉलर, तेल और फेड का दबाव कायम है. जानिए अगले हफ्ते गिरावट बढ़ेगी या खरीदारी का अच्छा मौका बनेगा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 11 फीसदी से ज्यादा टूट गया

भारत में सोना करीब 10 फीसदी गिरकर छह महीने के निचले स्तर पर आया

अमेरिका ईरान तनाव से तेल उछला और महंगाई की चिंता बढ़ी

सोने और चांदी की कीमतों में इस समय जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. एक तरफ जहां जून में गोल्ड ने बड़ी गिरावट दर्ज की, वहीं जुलाई में कीमतों में कुछ सुधार जरूर आया है. लेकिन बाजार में अभी भी कई ऐसे संकेत हैं, जो निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं.

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने में गिरावट का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है? क्या आने वाले दिनों में गोल्ड एक बार फिर दबाव में आ सकता है? या फिर मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका बन सकती है?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर के नीचे फिसला गोल्ड

अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX Gold Futures में इस हफ्ते काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. सोना एक समय 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल गया और करीब 3,973 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया.हालांकि बाद में कीमतों में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली और सप्ताह के अंत में गोल्ड करीब 4,013 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया. भारत में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. MCX पर अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और सितंबर सिल्वर फ्यूचर्स करीब 2.16 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं.लेकिन सवाल यह है कि आखिर गोल्ड और सिल्वर पर इतना दबाव क्यों बना हुआ है?

जून में सोने ने देखी बड़ी गिरावट

गोल्ड निवेशकों के लिए जून का महीना काफी मुश्किल भरा रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 11 फीसदी से ज्यादा गिरकर करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक आ गई थीं. यह अक्टूबर के बाद का सबसे निचला स्तर था. वहीं घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और भाव 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गए. यह करीब छह महीने का निचला स्तर था. हालांकि जुलाई में कीमतों में कुछ सुधार जरूर आया है, लेकिन बाजार की अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है. यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या गोल्ड में आगे और कमजोरी देखने को मिल सकती है.

अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता

गोल्ड में हालिया गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा है. दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. ब्रेंट क्रूड एक ही हफ्ते में करीब 16 फीसदी तक चढ़ गया. आमतौर पर जब तेल महंगा होता है, तो इसका असर महंगाई पर पड़ता है. महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच बाजार को डर है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है. यही डर इस समय गोल्ड पर दबाव बना रहा है.

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का दबाव

EverBank के World Markets President Chris Gaffney के मुताबिक, सोने में हालिया गिरावट की बड़ी वजह मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता है. दरअसल, गोल्ड की कीमतों पर डॉलर का सीधा असर पड़ता है. जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है. इससे मांग प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा सोना एक ऐसा एसेट है, जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता. ऐसे में जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशकों को बॉन्ड जैसे विकल्प ज्यादा आकर्षक लग सकते हैं. यही कारण है कि ऊंची ब्याज दरों का माहौल गोल्ड के लिए चुनौती बन जाता है.

Fed के फैसले पर बाजार की नजर

अब पूरी नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर है. CME FedWatch Tool के मुताबिक, सितंबर में अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 58 फीसदी तक पहुंच चुकी है.वहीं Federal Reserve के Vice Chair Philip Jefferson ने भी संकेत दिए हैं कि अगर महंगाई में जल्द सुधार नहीं आता है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प खुला रखा जा सकता है.इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा सिर्फ गोल्ड की कीमतों से तय नहीं होगी, बल्कि अमेरिका के आर्थिक आंकड़े और फेड के संकेत भी अहम भूमिका निभाएंगे.

चांदी पर भी बना दबाव

गोल्ड के साथ-साथ चांदी भी इस दबाव से बच नहीं पाई है.इस हफ्ते सिल्वर में भी कमजोरी देखने को मिली. अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और ब्याज दरों को लेकर चिंता जारी रहती है, तो चांदी में भी आगे उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.चांदी पर असर इसलिए भी ज्यादा देखने को मिलता है क्योंकि इसमें निवेश मांग के साथ-साथ इंडस्ट्रियल डिमांड की भी बड़ी भूमिका होती है.

क्या अगले हफ्ते सोने में बड़ी गिरावट आ सकती है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अगले हफ्ते गोल्ड में एक और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है?फिलहाल बाजार के कुछ संकेत बताते हैं कि अगर मौजूदा हालात बने रहते हैं, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है.अगर अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत रहता है, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और फेड की तरफ से ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेत मिलते हैं, तो निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है.ऐसे माहौल में गोल्ड में एक और तेज बिकवाली देखने को मिल सकती है और कीमतें हाल के निचले स्तरों को दोबारा टेस्ट कर सकती हैं.यानी जून के बाद आई गिरावट सिर्फ एक सामान्य करेक्शन नहीं रहेगी. अगर ब्याज दरों और डॉलर का दबाव जारी रहा, तो गोल्ड में एक और बड़ा करेक्शन देखने को मिल सकता है.

लेकिन गोल्ड के लिए एक बड़ा सपोर्ट भी मौजूद है

हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है.अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर लौट सकते हैं. ऐसे हालात में गोल्ड को Safe Haven Buying का फायदा मिल सकता है.Goldman Sachs का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्राइवेट निवेशक भी अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं.यानी गोल्ड के सामने इस समय दो बड़ी ताकतें काम कर रही हैं.एक तरफ मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरों की चिंता और महंगा तेल सोने पर दबाव बना रहे हैं.वहीं दूसरी तरफ युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव गोल्ड को सुरक्षित निवेश के तौर पर समर्थन दे सकते हैं.

निवेशकों को किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?

फिलहाल आने वाले दिनों में गोल्ड और सिल्वर की दिशा चार बड़ी चीजों से तय हो सकती है.

  • पहला, अमेरिकी डॉलर की चाल.
  • दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों का रुख.
  • तीसरा, Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर रणनीति.
  • चौथा, पश्चिम एशिया में बढ़ता या घटता तनाव.

अगर इन मोर्चों पर दबाव बढ़ता है, तो सोने में एक और गिरावट देखने को मिल सकती है. वहीं अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो यही गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर भी बन सकती है.

फिलहाल गोल्ड मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है और आने वाले हफ्ते में कीमतों की दिशा इन वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी.