Gold-Silver Outlook : सोना-चांदी में एक सप्ताह की दमदार रिकवरी, क्या लौट रही है तेजी? जानिए निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की पूरी रणनीति

तनीषा त्यागी

• 02:06 PM • 26 Jul 2026

सोना और चांदी में एक हफ्ते की मजबूत वापसी ने निवेशकों की नजरें खींची हैं. जानिए तेजी की वजह, आगे के संकेत, किन स्तरों पर नजर रखें और विशेषज्ञों की सलाह.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

Dip Buying और Central Bank खरीदारी से मिला सपोर्ट

Fed Meeting और Middle East पर बाजार की नजर

मासिक चाल कमजोर रही, तीन महीनों में गिरावट और गहरी दिखी

नए निवेशकों को एकमुश्त रकम के बजाय थोड़ा-थोड़ा निवेश की सलाह

विशेषज्ञ डिप बायिंग, केंद्रीय बैंक खरीद और तनाव को सहारा मानते

Gold-Silver Outlook : पिछले कुछ समय से दबाव में चल रहे सोना और चांदी के बाजार में बीते एक सप्ताह के दौरान अच्छी रिकवरी देखने को मिली है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं में आई इस मजबूती ने निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ाया है. खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार लगातार अनिश्चितताओं से गुजर रहे हैं, गोल्ड और सिल्वर की यह वापसी निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.

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हालांकि बाजार में आई यह तेजी कई सवाल भी खड़े कर रही है. क्या यह सिर्फ गिरावट के बाद आई अस्थायी रिकवरी है या फिर सोना और चांदी में एक नई तेजी की शुरुआत हो चुकी है. इसी सवाल का जवाब बाजार विशेषज्ञ अपने-अपने विश्लेषण के जरिए दे रहे हैं.

एक हफ्ते में कितना बढ़ा सोना और चांदी

एमसीएक्स के आंकड़ों के मुताबिक 17 जुलाई से 23 जुलाई के बीच 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 3,300 रुपये बढ़ी. इस दौरान गोल्ड का भाव 1,40,792 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,44,089 रुपये तक पहुंच गया. वहीं चांदी ने भी मजबूत प्रदर्शन किया. इसी अवधि में सिल्वर की कीमत 2,15,936 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,22,834 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई. यानी एक सप्ताह में चांदी में लगभग 6,000 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई. हालांकि सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में दोनों धातुओं में हल्की मुनाफावसूली भी देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशक ऊंचे स्तरों पर कुछ मुनाफा भी बुक कर रहे हैं.

मौजूदा ट्रेंड क्या कह रहा है

हालिया रिकवरी के बावजूद बाजार की बड़ी तस्वीर अभी पूरी तरह नहीं बदली है. इस समय 5 अगस्त 2026 एक्सपायरी वाला 10 ग्राम गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1.43 लाख रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है. अगर प्रदर्शन को थोड़ा बड़े समय के नजरिए से देखें तो पिछले एक महीने में गोल्ड में करीब 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है. वहीं पिछले तीन महीनों में इसकी कीमत लगभग 8.19 प्रतिशत तक कमजोर हुई है. इसका मतलब यह है कि एक सप्ताह की रिकवरी जरूर आई है, लेकिन लंबे समय के दबाव को पूरी तरह खत्म हुआ नहीं माना जा सकता.

आखिर रिकवरी की सबसे बड़ी वजह क्या रही

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नरवेकर का मानना है कि हालिया तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण काम कर रहे हैं. उनके मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित टैरिफ कदम, दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों की लगातार गोल्ड खरीदारी और हाल की गिरावट के बाद निवेशकों की डिप बायिंग ने बाजार को सहारा दिया है. उनका कहना है कि फिलहाल इसे बाजार के ट्रेंड में बड़े बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. अभी जो तेजी दिखाई दे रही है, वह काफी हद तक गिरावट के बाद निवेशकों की खरीदारी का परिणाम है.

डिप बायिंग ने लौटाया निवेशकों का भरोसा

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों के दबाव के बावजूद निवेशकों ने गिरावट को अवसर के रूप में इस्तेमाल किया. इसी वजह से गोल्ड में खरीदारी बढ़ी. इसके अलावा गोल्ड आधारित ETF में लगातार निवेश, वैश्विक स्तर पर जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और इक्विटी बाजार की ऊंची वैल्यूएशन ने भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर गोल्ड और सिल्वर की ओर आकर्षित किया.

पहले से निवेश करने वालों के लिए क्या है सलाह

अगर आपने पहले से सोने या चांदी में निवेश किया हुआ है तो विशेषज्ञ जल्दबाजी में कोई फैसला लेने की सलाह नहीं दे रहे हैं. उनका मानना है कि बाजार में छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव को देखकर घबराकर बिकवाली करना सही रणनीति नहीं होगी. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए फिलहाल अपनी होल्डिंग बनाए रखना बेहतर विकल्प माना जा रहा है. क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच गोल्ड और सिल्वर अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर अपनी अहमियत बनाए हुए हैं.

नए निवेशकों को कैसे करनी चाहिए एंट्री

जो निवेशक पहली बार गोल्ड या सिल्वर में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए एक्सपर्ट्स की सलाह है कि पूरी रकम एक साथ लगाने से बचें. विशेषज्ञों का मानना है कि चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है. इससे खरीद की औसत कीमत बेहतर रहती है और अगर बाजार में दोबारा गिरावट आती है तो निवेशक पर उसका असर भी सीमित रहता है.

आगे किन फैक्टर्स पर टिकी रहेगी बाजार की नजर

आने वाले दिनों में गोल्ड और सिल्वर की दिशा कई वैश्विक घटनाओं से तय हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली बैठक पर बाजार की सबसे ज्यादा नजर रहेगी. अगर वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से गोल्ड और सिल्वर को और सपोर्ट मिल सकता है. वहीं ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेत मिलने की स्थिति में कीमती धातुओं पर दबाव भी देखने को मिल सकता है.

निवेशकों के लिए फिलहाल क्या है सबसे अहम बात

एक सप्ताह की मजबूत रिकवरी ने बाजार में सकारात्मक माहौल जरूर बनाया है, लेकिन केवल इसी आधार पर नई लंबी तेजी की शुरुआत मान लेना जल्दबाजी होगी. ऐसे में जिन निवेशकों के पास पहले से गोल्ड और सिल्वर हैं, उनके लिए धैर्य बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है. वहीं नए निवेशकों को बाजार में धीरे-धीरे और सोच-समझकर एंट्री करने की सलाह दी जा रही है. क्योंकि कमोडिटी बाजार में लंबी अवधि का नजरिया और अनुशासित निवेश रणनीति ही बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है.