Gold News: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी दिन तेजी दर्ज की गई है. इसके साथ ही चांदी भी मजबूती के साथ कारोबार करती दिखी. वैश्विक बाजार में सोना करीब सात हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जबकि घरेलू बाजार में भी बुलियन की कीमतों में नई तेजी देखने को मिल रही है. ऐसे में निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अचानक सोने और चांदी की कीमतों में यह उछाल क्यों आया है और क्या आने वाले समय में यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है.
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घरेलू बाजार में भी मजबूत बना हुआ है गोल्ड
खबर लिखे जाने तक MCX पर 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला 10 ग्राम सोना करीब 0.75 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 1.49 लाख रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा. पिछले एक सप्ताह में सोने की कीमतों में 4.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. एक महीने के दौरान भी कीमतों में हल्की मजबूती बनी रही है. हालांकि तीन महीने के नजरिए से देखें तो सोना अब भी करीब 5.36 प्रतिशत नीचे है. यानी हालिया तेजी ने बाजार की धारणा को फिर से सकारात्मक बना दिया है.
कमजोर डॉलर ने बढ़ाई सोने की चमक
सोने की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी मानी जा रही है. जब डॉलर कमजोर होता है तो डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटीज विदेशी खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती हैं. इसका सीधा असर मांग पर पड़ता है और सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ने लगती है. फिलहाल यही ट्रेंड अंतरराष्ट्रीय बाजार में देखने को मिल रहा है.
बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सपोर्ट
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में नरमी भी सोने के पक्ष में बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है. बॉन्ड यील्ड घटने का मतलब है कि निवेशकों को फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स से मिलने वाला रिटर्न पहले की तुलना में कम आकर्षक हो जाता है. ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और सोना उनकी पहली पसंद बन जाता है. इसी वजह से बुलियन मार्केट में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ है.
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद ने बढ़ाया भरोसा
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया था. अब कूटनीतिक प्रयासों के आगे बढ़ने और तनाव कम होने की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली है. तेल की कीमतें नियंत्रित रहने से महंगाई का दबाव कम होने की संभावना बनती है, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें तेजी से बढ़ाने का दबाव भी घट सकता है. यह माहौल सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है.
अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर टिकी हैं बाजार की नजरें
अब निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर है. यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहते हैं तो इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत मिल सकते हैं. ऐसी स्थिति में फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जो सोने के लिए सकारात्मक साबित होगा. वहीं अगर रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे सोने में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है.
चांदी को निवेश और इंडस्ट्री, दोनों का मिल रहा है साथ
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है. इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की खरीदारी नहीं है. चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है. यानी निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग भी इसकी कीमतों को सहारा दे रही है.
खबर लिखे जाने तक MCX पर 4 सितंबर 2026 एक्सपायरी वाली चांदी करीब 0.08 प्रतिशत की हल्की गिरावट के साथ लगभग 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती दिखी. हालांकि पिछले एक सप्ताह में इसमें 5.31 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. एक महीने में कीमतों में 2.84 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि तीन महीने के दौरान चांदी करीब 11.08 प्रतिशत कमजोर हुई है.
निवेशकों के लिए आगे क्या है अहम?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने और चांदी दोनों को कमजोर डॉलर, गिरती बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों का समर्थन मिल रहा है. हालांकि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम बुलियन मार्केट की अगली दिशा तय करेंगे. इसलिए केवल मौजूदा तेजी को देखकर निवेश का फैसला लेने के बजाय इन प्रमुख संकेतकों पर भी नजर रखना जरूरी होगा.
फिलहाल क्या संकेत दे रहा है बुलियन मार्केट?
सोने और चांदी में आई हालिया तेजी यह संकेत देती है कि वैश्विक निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है. कमजोर डॉलर, कम होती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बुलियन मार्केट में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ है. आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और वैश्विक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि यह तेजी आगे और मजबूत होती है या फिर बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिलती है. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि बुलियन बाजार एक बार फिर निवेशकों के रडार पर लौट आया है.
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