3 महीने में 50 टन गोल्ड मार्केट में लौटा... भारत में लोग आखिर क्यों बेच रहे हैं घर में रखा हुआ सोना? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

Gold Silver Rate Today : सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच भारत में लोग तेजी से अपना पुराना सोना बेच रहे हैं. अप्रैल से जून के बीच करीब 50 टन गोल्ड बाजार में लौट आया. लोग गहने बदलने के बजाय कैश को प्राथमिकता दे रहे हैं. आखिर इसके पीछे क्या वजह है और क्या आपको भी अपना सोना बेच देना चाहिए?

भारत में लोग बेच रहे हैं घर में रखा हुआ पुराना सोना
भारत में लोग बेच रहे हैं घर में रखा हुआ पुराना सोना

सौरभ दीक्षित

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Gold Silver Price Today: भारत में सोना सिर्फ एक गहना नहीं होता. ये हमारी बचत भी है, इमरजेंसी फंड भी और कई परिवारों के लिए भावनाओं से जुड़ी चीज भी. लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है. देश में लोग घरों में रखा सोना तेजी से बेच रहे हैं. जो आंकड़े सामने आए हैं वो आपके होश उड़ा देंगे. लोगों में पुराना सोना बेचकर कैश पाने की होड़ मची हुई है. बड़ा सवाल ये है कि लोग क्यों अचानक घरों में रख हुआ सोना बेच रहे हैं. पूरा मामला क्या है, सब कुछ आज हम इस रिपोर्ट में आपको बताने जा रहे हैं.

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सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

सोने और चांदी की कीमत में हाल में काफी गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने की कीमत जून में अब तक 15,000 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर चुकी है जबकि चांदी की कीमत में प्रति किलो 45,000 रुपये की गिरावट आई है. आज यानी 29 जून की बात करें तो दोपहर करीब ढाई बजे 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना 656 रुपये की गिरावट के साथ 1,43,506 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं 4 सितंबर 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 609 रुपये की गिरावट के साथ 2,22,863 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी. इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक, इस साल अप्रैल से जून के बीच लोगों ने करीब 50 टन पुराना सोना बेच दिया. ये पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 43 फीसदी ज्यादा है.

आखिर क्यों अचानक अपना सोना बेच रहे हैं लोग?

अब सवाल उठता है कि आखिर लोग अचानक अपना सोना क्यों बेच रहे हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह है सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव. कुछ समय पहले तक सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर जून महीने में ही सोने का भाव करीब 15 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर चुका है. वहीं चांदी की कीमत में भी लगभग 45 हजार रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है. मार्केट के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में सोना और सस्ता हो सकता है. यही डर लोगों के फैसले बदल रहा है. कई लोगों को लग रहा है कि अगर अभी नहीं बेचा, तो बाद में सोने की कीमत और नीचे चली जाएगी. इसलिए वे ऊंचे दाम का फायदा उठाते हुए अभी कैश लेना चाहते हैं.

गहने बदलने के बजाय कैश को प्राथमिकता

पहले की बात करें तो अगर किसी के पास पुराना गहना होता था, तो वह ज्वेलर के पास जाकर उसे बदलकर नया गहना बनवा लेता था. लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है. लोग कह रहे हैं कि नया गहना बाद में खरीद लेंगे, पहले पुराना सोना बेचकर पैसा अपने हाथ में ले लेते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि भारतीय ग्राहक सोने की ऊंची कीमतों का फायदा उठाकर कैश लेना पसंद कर रहे हैं. यानी अब लोग सोने को सिर्फ गहना नहीं, बल्कि एक फाइनेंशियल एसेट यानी निवेश की तरह देखने लगे हैं. जब कीमत अच्छी मिले, तो बेच दो. जब कीमत कम हो जाए, तब चाहो तो दोबारा खरीद लो. यही सोच तेजी से बढ़ रही है. इसका फायदा सिर्फ ग्राहकों को ही नहीं, बल्कि गोल्ड रीसाइक्लिंग बच्चन इंडस्ट्री को भी हो रहा है.

गोल्ड रीसाइक्लिंग प्रक्रिया और उसमें आई तेजी

अब सवाल ये है कि रीसाइक्लिंग होती कैसे है? मान लीजिए आपने अपनी पुरानी चेन बेच दी. कंपनी उस सोने को खरीदती है, उसे पिघलाकर शुद्ध यानी 24 कैरेट गोल्ड तैयार करती है. फिर वही सोना जूलरी बनाने वाली कंपनियों या सिक्के बनाने वालों को बेच दिया जाता है. यानी नया सोना जमीन से निकालने की जरूरत कुछ हद तक कम हो जाती है. यही वजह है कि सरकार और इंडस्ट्री दोनों गोल्ड रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना चाहते हैं. मुथूट एक्सिम जैसी कंपनियों का कहना है कि उनके देशभर के गोल्ड कलेक्शन सेंटरों पर पुराने सोने की बिक्री में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अब ग्राहक पारदर्शी तरीके से अपना सोना बेचने में ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं. इससे ग्राहक को सही कीमत मिलती है और देश में सोने का दोबारा इस्तेमाल भी बढ़ता है.

सोने का आयात और रीसाइक्लिंग का भविष्य

अब एक और दिलचस्प बात. भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना खरीदने वाले देशों में शामिल है. हम अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेशों से मंगाते हैं. पिछले वित्त वर्ष में भारत ने करीब 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया. लेकिन अगर ज्यादा से ज्यादा पुराना सोना रीसाइकिल होने लगे, तो विदेशों से सोना खरीदने की जरूरत कुछ कम हो सकती है. पिछले साल भारत में करीब 125 से 150 टन सोना रीसाइकिल हुआ था. अब इंडस्ट्री का अनुमान है कि अगर यही ट्रेंड चलता रहा, तो 2026 तक ये आंकड़ा बढ़कर 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है.

भारतीय घरों में मौजूद सोने का विशाल भंडार

अब सबसे बड़ा सवाल. भारत के घरों में आखिर कितना सोना रखा है? अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास करीब 30 हजार टन सोना मौजूद है. यानि दुनिया में घरों के अंदर रखा सबसे बड़ा गोल्ड स्टॉक भारत के पास माना जाता है. लेकिन इसका बड़ा हिस्सा वर्षों से अलमारी, लॉकर या तिजोरी में पड़ा रहता है. इंडस्ट्री का मानना है कि अगर इस सोने का एक हिस्सा भी बाजार में वापस आने लगे, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा और सोने के आयात पर निर्भरता भी कम होगी.

क्या आपको भी बेच देना चाहिए अपना सोना?

लेकिन यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है. क्या सिर्फ इसलिए कि लोग सोना बेच रहे हैं, आपको भी अपना सोना बेच देना चाहिए? इसका जवाब है जरूरी नहीं. अगर आपका सोना सिर्फ निवेश है और आपको लगता है कि मौजूदा कीमत आपके लिए सही है, तो फैसला आपकी जरूरत और वित्तीय योजना पर निर्भर करेगा. लेकिन अगर सोना पारिवारिक विरासत है या लंबे समय की बचत है, तो सिर्फ बाजार की अफवाहों के आधार पर फैसला लेना समझदारी नहीं होगी. तो कुल मिलाकर कहानी ये है कि लोग मजबूरी में नहीं, बल्कि ऊंची कीमतों और आगे गिरावट की आशंका को देखते हुए अपना पुराना सोना बेच रहे हैं. इससे ग्राहकों को कैश मिल रहा है, गोल्ड रीसाइक्लिंग बढ़ रही है और देश की आयात पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है.

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