सोना जिसे हम सबसे सुरक्षित मानते हैं. आज वही सोना लोगों को डरा रहा है, क्योंकि जो सोना सालों से ऊपर जा रहा था अब अचानक गिरने लगा है और असली चौंकाने वाली बात, जिसने सोने को ऊपर चढ़ाया वही अब उसे नीचे धकेल रहा है, यानी सेंट्रल बैंक. दुनिया के बड़े-बड़े सेंट्रल बैंक जो हर साल हजारों टन सोना खरीद रहे थे, अब वही बेचने लगे हैं और यहीं से शुरू होता है इस कहानी का असली ट्विस्ट. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि अभी तक सोने के पीछे भाग रहे ये देश क्यों अचानक सोना बेचने लगे हैं. सोने-चांदी के इस एपिसोड में जानिए पूरा मामला .
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सोने-चांदी के ताजा भाव
सोने-चांदी में पिछले कई दिनों से लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है. 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के कारण MCX का बाजार बंद रहा और अब शनिवार-रविवार को भी बाजार बंद रहेगा. यानी सोना-चांदी का अगला भाव सोमवार को खुलेगा. इससे पहले 2 अप्रैल को 5 जून की डिलीवरी वाला सोना 30 रुपए की गिरावट के साथ 1,49,650 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. दिन के कारोबार के दौरान ये 1,52,490 रुपए तक उछल गया था. वहीं 5 मई की डिलीवरी वाली चांदी गुरुवार को प्रति किलो 10,901 रुपए गिरकर 2,32,600 रुपए पर बंद हुई थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी 2,42,800 रुपए तक पहुंच गई थी.
सोने को लेकर क्या रहा ट्रेंड?
जब भी सोना गिरता तो सेंट्रल बैंक उसे खरीद लेते थे, जैसे कोई दीवार जो बाजार को गिरने से बचा ले. इससे निवेशकों को भरोसा था कि सोना कभी ज्यादा नहीं गिरेगा. लेकिन अब वही दीवार टूट रही है.
सेंट्रल बैंक क्यों बेच रहे सोना?
असल में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा तो तेल की कीमतें ऊपर गईं, तेल महंगा हुआ तो डॉलर की मांग बढ़ी. डॉलर मजबूत हुआ तो बाकी देशों की करेंसी कमजोर हो गई. अब सेंट्रल बैंक के सामने समस्या है कि अगर करेंसी गिरती है तो महंगाई बढ़ती है और इसे रोकने के लिए उन्हें अपने रिजर्व का इस्तेमाल करना पड़ता है और सबसे बड़ा रिजर्व क्या है सोना.
मार्केट का हालात खराब?
ईरान युद्ध के बाद तुर्की ने अपनी करेंसी बचाने के लिए करीब 60 टन सोना बेच दिया यानी 8 अरब डॉलर का सोना बाजार में और ये बिकवाली मुनाफे के लिए नहीं मजबूरी में हुई. अब पोलैंड जिसने पिछले सालों में सबसे ज्यादा सोना खरीदा था. वही अब संकेत दे रहा है कि जरूरत पड़ी तो सोना बेच सकता है. बस इतना सुनना ही काफी था कि बाजार हिल गया और फिर आता है रूस. रूस ने 25 साल बाद पहली बार अपनी तिजोरी से असली सोना निकालकर बेचना शुरू किया...जनवरी में 3 लाख औंस, फरवरी में 2 लाख औंस यानी दो महीने में करीब 14 टन सोना बाजार में.
अब सोचिए जब इतने बड़े खिलाड़ी एक साथ बेचने लगें तो बाजार पर क्या असर होगा. यही वजह है कि जनवरी में सोना रिकॉर्ड पांच हजार पांच सौ डॉलर पर था और मार्च के अंत तक करीब 4400डॉलर पर आ गया. यानी करीब 21 प्रतिशत की गिरावट.
अब आगे क्या होगा?
अगर यह बिकवाली जारी रही तो सोना 4000 डॉलर के नीचे भी जा सकता है. अगर हालात संभले तो 4300 से 4600 के बीच टिक सकता है. और अगर तेल सस्ता हुआ, डॉलर कमजोर पड़ा तो सोना फिर 5000 डॉलर के ऊपर जा सकता है.
निवेशक क्या करें?
निवेशक अभी मार्केट की स्थिति को भांप कर ही फैसला ले क्योंकि अभी मांग खत्म नहीं हुई है, लेकिन सप्लाई अचानक बढ़ गई है और वो भी उन लोगों से जो पहले खरीदार थे. यही वजह है कि बाजार दबाव में है. लेकिन लंबी अवधि की कहानी अभी भी जिंदा है, दुनिया में अनिश्चितता है, डॉलर पर भरोसा कम हो रहा है और सोना अभी भी सुरक्षित संपत्ति माना जाता है. बस फर्क इतना है कि पहले सेंट्रल बैंक सपोर्ट दे रहे थे, अब वही कुछ समय के लिए दबाव बना रहे हैं और यही बदलाव इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट है.
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