सोने-चांदी के भाव में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने निवेशकों के साथ-साथ आम आदमी की भी नींद उड़ा रखी है. अब सोने में क्या होने वाला है ये हर निवेशक जानना चाहता है. 2026 की शुरुआत में सोने में अच्छी तेजी देखने को मिली थी, हालांकि इसके बाद सोने में गिरावट का दौर शुरु हुआ और ऊपरी स्तरों से सोना 30 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है. ऐसे में निवेशकों के मन में एक सवाल है क्या अब सोना की चमक फीकी पड़ रही है? या ये सिर्फ कुछ समय के लिए और सोना फिर से अपने रंग में लौट आएगा? सोना-चांदी के इस एपिसोड में आइए जानते है इन्हीं सवालों के जवाब.
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सोने-चांदी का भाव
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फेल होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में नरमी का रुख दिख रहा है. MCX एक्सचेंज पर 13 अप्रैल को शाम 6:30 बजे 5 जून को डिलीवरी वाला 748 रुपए की गिरावट के साथ 1,51,904 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं 5 मई को डिलीवरी वाली चांदी भी 6,290 रुपए की गिरावट के साथ 2,36,984 रुपए प्रति किलो पर आ गया.
सोने की चमक रहेगी बरकरार?
सोने की लंबी अवधि में चमक बरकरार रह सकती है. इसकी बड़ी वजह सेंट्रल बैंक्स और बड़े बैंक्स की ओर से खरीदारी है. UBP यानी Union Bancaire Prive ने पहले अपने क्लाइंट पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी करीब 10% से घटाकर सिर्फ 3% कर दी थी. यानी साफ है जब बाजार में गिरावट शुरू हुई तो उन्होंने रिस्क कम कर लिया.
लेकिन अब वही बैंक धीरे-धीरे फिर से सोना जोड़ रहा है और अब ये हिस्सेदारी फिर से बढ़कर करीब 6% तक पहुंच चुकी है. UBP के एशिया हेड पारस गुप्ता का कहना है कि हमने फिर से गोल्ड पोर्टफोलियो बनाना शुरू कर दिया है, क्योंकि अब पोजिशन ज्यादा संतुलित (balanced) हो चुकी है.
UBP के अलावा भी कई बैंक सोना पर जता रहे भरोसा
सोने में गिरावट के बावजूद UBP अब भी मानता है कि सोना $6,000 तक जा सकता है. और ये सिर्फ UBP नहीं है बल्कि Goldman Sachs और ANZ Banking Group भी यही मान रहे हैं कि सोने का long-term outlook मजबूत है.
क्यों पहुंचेगा सोना 6 हजार डॉलर तक?
अब सवाल ये आखिर दुनिया के बड़े बैंक ऐसा क्यों मान रहे है कि सोना 6 हजार डॉलर तक जा सकता है. इसके पीछे भी 3 बड़ी वजह हैं
पहली- सेंट्रल बैंक की खरीदारी: दुनिया के देश लगातार सोना खरीद रहे हैं, इससे डिमांड मजबूत बनी रहती है.
दूसरी- राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) का डर: कई देशों का कर्ज बढ़ रहा है और सरकारें ज्यादा पैसा छाप रही हैं. इससे करेंसी कमजोर होती है और सोना मजबूत होता है.
तीसरी- भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk): मिडिल ईस्ट में तनाव से दुनिया की इकोनॉमी पर असर आ रहा है. इससे मंदी की आशंका बढ़ी है.
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