सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है, जिसकी वजह से मार्केट में भी उथल-पुथल मचा हुआ है. अगर आपने भी सोने में निवेश किया है, तो पिछले कुछ महीनों में आपके चेहरे की चमक शायद सोने की कीमत के साथ ही फीकी पड़ गई होगी. क्योंकि रिकॉर्ड हाई बनाने के बाद सोना अब करीब 28 फीसदी तक टूट चुका है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या गोल्ड का गोल्डन दौर खत्म हो गया? या फिर ये सिर्फ एक बड़ा झटका है, जिसके बाद फिर से तेजी देखने को मिल सकती है? और अब सोने में आगे क्या होने वाला है? सोने-चांदी के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे इन्हीं सवालों के जवाब.
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सोने-चांदी का ताजा भाव!
इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर के आसपास संघर्ष कर रही है. स्पॉट गोल्ड की कीमत गिरकर लगभग 3,980 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है. यानी एक ही दिन में तीन फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली.
अब अगर घरेलू मार्केट की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 25 जून की शाम करीब 6 बजे 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना 168 रुपये तेजी के साथ 1,41,438 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी करीब 3313 रुपये की तेजी के साथ 2,16,388 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी.
सोने में क्यों हो रही गिरावट?
सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. इसके पीछे की वजह डॉलर को बताया जा रहा है. दरअसल, अमेरिका का डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है. वहीं बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरें बढ़ा सकता है. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशकों को बैंक और बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है. ऐसे में सोने में निवेश थोड़ा कम आकर्षक हो जाता है और उसकी कीमत पर दबाव आता है.
सोने में पहली बार हुई इतनी बड़ी गिरावट?
इस सवाल का सीधा जवाब है, नहीं. सोना पहले भी ऐसे गिरा है. सोने के बाजार के जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी गिरावट पहली बार नहीं हुई है. उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि 1970 के दशक में भी सोना अपने बीच के हाई लेवल से करीब 45 फीसदी तक गिर गया था. लेकिन इसके बाद उसने जबरदस्त वापसी की और 1980 में नया रिकॉर्ड बना दिया.
इसी तरह 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान भी सोना करीब 30 फीसदी तक टूट गया था. उस समय भी लोगों को लगा था कि अब तेजी खत्म हो गई. लेकिन इसके बाद सोना फिर संभला और 2011 में नई ऊंचाई पर पहुंच गया. यानी इतिहास बताता है कि सोने में बड़ी गिरावट आना कोई नई बात नहीं है.
क्या सोना अभी भी है मजबूत?
तो सवाल ये है कि क्या अभी भी सोने में दम बाकी है? एक्सपर्ट्स की माने तो आज भी सोने को मजबूत बनाने वाले कई बड़े कारण मौजूद हैं.
- पहला: दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं.
- दूसरा: दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव यानी जंग और अंतरराष्ट्रीय विवाद अभी भी खत्म नहीं हुए हैं.
- तीसरा: कई देशों पर सरकारी कर्ज लगातार बढ़ रहा है. ऐसे माहौल में निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं.
उनका कहना है कि अभी जो गिरावट दिख रही है, वह ज्यादातर मुनाफावसूली, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों की वजह से है. इसका मतलब यह नहीं कि सोने की लंबी अवधि की कहानी खत्म हो गई है. फिर भी सावधानी जरूरी है. हालांकि सभी विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि जल्दबाजी करना सही नहीं होगा. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर डॉलर और मजबूत होता है और फेडरल रिजर्व लगातार सख्त रुख अपनाता है, तो सोने की कीमत 3,700 डॉलर प्रति औंस तक भी गिर सकती है. यानी आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है.
आगे क्या होगा?
कुल मिलाकर तस्वीर ये है कि सोने में आई करीब 28 फीसदी की गिरावट जरूर निवेशकों के लिए दर्दनाक है. लेकिन इतिहास कहता है कि ऐसी बड़ी गिरावट के बाद भी सोना कई बार शानदार वापसी कर चुका है. अब आगे क्या होगा, यह काफी हद तक अमेरिका की ब्याज दरों, डॉलर की चाल और दुनिया के आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा.
अगर आप सोने में निवेश करते हैं, तो घबराने के बजाय लंबी अवधि की सोच रखना ज्यादा समझदारी हो सकती है. लेकिन किसी भी निवेश का फैसला करने से पहले एक बार अपने वित्तीय सलाहाकार से बात जरूर कर लें. हम आपको कहीं पर भी निवेश करने या नहीं करने के बारे में कोई सलाह नहीं दे रहे हैं. ये खबर हमने सिर्फ आपकी जानकारी के लिए तैयार की है.
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