Gold silver price update: सोना 3000 तो चांदी 11000 रुपए तक हुआ धड़ाम, Goldman Sachs ने भावों को लेकर दिया चौंकाने वाला अपडेट!

Gold Silver Price Update: सोना और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस कारोबारी सप्ताह में सोना करीब 3000 रुपये और चांदी 11,000 रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई. जानिए आज का गोल्ड रेट, सिल्वर प्राइस, अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल, Goldman Sachs की नई रिपोर्ट और आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों की दिशा क्या रह सकती है.

Gold Silver Price Update
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सौरभ दीक्षित

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सोने-चांदी के भाव में इस कारोबारी सप्ताह में बड़ी हलचल देखने को मिला. शुरूआत में तो भावों में उठापटक होती रही पर कारोबारी सप्ताह के आखिर में चमकीली धातुएं धड़ाम हो गईं. IBJA (इंडियन बुलियंन एंड जवैलर्स एसोसिएशन) द्वारा गुरुवार दोपहर 12 बजे जारी भाव के मुताबिक 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 149332 रुपए पर था. शाम 5 बजते-बजते ये भाव लुढककर 148093 रुपए पर पहुंच गया. वहीं इस कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन यानी शुक्रवार शाम तक सोने का भाव और धड़ाम हुआ और ये 3000 रुपए तक सस्ता होकर 144970 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. वहीं चांदी गुरुवार को 243700 रुपए प्रति किलो पर थी. शुक्रवार शाम तक ये 11700 रुपए तक लुढ़ककर 231973 रुपए पर पहुंच गई.

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कुछ महीने पहले तक जिस सोने को लेकर कहा जा रहा था कि यह नई-नई ऊंचाइयां छुएगा, वही सोना आज लगातार गिर रहा है. जिसने रिकॉर्ड बनाया था, वह अब रिकॉर्ड गिरावट की चर्चा में है. दुनिया के बड़े-बड़े निवेशकों को लंबे समय तक सोने में तेजी की उम्मीद थी, लेकिन अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने गोल्ड निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. क्या सोने की चमक फीकी पड़ रही है? क्या चांदी भी उसी राह पर चल पड़ी है? क्या यह गिरावट सिर्फ एक छोटा करेक्शन है या फिर किसी बड़े तूफान की शुरुआत? इन सभी सवालों के जवाब आपको देंगे पहले सोने और चांदी की कीमतों की बात कर लेते हैं...

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है सोने का हाल?

कुछ महीने पहले तक सोने की रैली को देखकर लग रहा था कि यह लगातार नए रिकॉर्ड बनाता रहेगा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी के अंत में सोना लगभग 5600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था. लेकिन आज सोना करीब 4135 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है. यानी रिकॉर्ड ऊंचाई से सोना लगभग 26 फीसदी तक टूट चुका है. चांदी की बात करें तो इसमें भी भारी करेक्शन आया है. ऑल टाइम हाई से चांदी करीब 15 से 20 फीसदी तक फिसल चुकी है. यानी दोनों कीमती धातुओं में तेजी का दौर फिलहाल थमता हुआ नजर आ रहा है.

Goldman Sachs की रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल!

Goldman Sachs ने साल के अंत तक सोने का लक्ष्य 5400 डॉलर से घटाकर 4900 डॉलर प्रति औंस कर दिया है और साथ ही एक चेतावनी दी है. उनके मुताबिक अगर फेड ब्याज दरें बढ़ा देता है, तो सोना साल के अंत तक 4400 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है. यानी मौजूदा स्तरों से भी नीचे जाने का जोखिम बना हुआ है. ध्यान देने वाली बात ये है कि बैंक ने लक्ष्य घटाया जरूर है, लेकिन फिर भी उसे लगता है कि साल के दूसरे हिस्से में सोना मौजूदा स्तरों से ऊपर जा सकता है. Goldman Sachs के विश्लेषकों का कहना है कि वो लंबी अवधि के लिए पॉजिटिव है लेकिन छोटी अवधि में सावधाना बरतने की जरुरत है. उनका मानना है कि आने वाले कुछ महीनों में सोने में और दबाव दिख सकता है, लेकिन बाद में इसमें सुधार की संभावना बनी हुई है...

गोल्ड में क्यों हो रही गिरावट?

ऐसी स्थिति में बड़ा सवाल ये है कि आखिर गोल्ड में गिरावट क्यों दिख रही है? तो सोने की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व है. पहले बाजार को उम्मीद थी कि फेड 2026 में कई बार ब्याज दरें घटाएगा. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. फेड ने साफ संकेत दिए हैं कि महंगाई अभी भी चिंता का विषय है और जरूरत पड़ी तो दरें बढ़ाई भी जा सकती हैं. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने की मांग घटती है क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता.

दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर है. जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना आमतौर पर कमजोर पड़ता है क्योंकि सोने की कीमत डॉलर में तय होती है. मजबूत डॉलर दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा बना देता है और मांग घट जाती है.

Goldman Sachs ने कहा है कि उसने गोल्ड ETF में आने वाले निवेश का अनुमान कम कर दिया है. पहले उम्मीद थी कि फेड जल्द दरें घटाएगा, जिससे ETF में पैसा आएगा. लेकिन अब दर कटौती आगे खिसकने से निवेशकों की दिलचस्पी थोड़ी कम हो गई है.

सोने की बुल रन हो गई खत्म?

अब हर निवेशन पूछ रहा है कि, क्या सोने की बुल रन खत्म हो गई? तो इसका जवाब है- शायद नहीं, क्योंकि कुछ बड़े सपोर्ट अभी भी मौजूद हैं. दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं. Goldman Sachs का अनुमान है कि इस साल केंद्रीय बैंक हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद सकते हैं. अगले साल भी खरीदारी मजबूत रहने की उम्मीद है. यही खरीदारी सोने के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है. अगर आने वाले वर्षों में महंगाई फिर बढ़ती है तो सोने की मांग मजबूत हो सकती है. ये ही वजह है कि Goldman Sachs अभी भी पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुआ है.

कैसे तय होगी सोने-चांदी की दिशा?

आने वाले महीनों में सोने और चांदी की दिशा तीन चीजें तय करेंगी: 

  • पहला- फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
  • दूसरा- डॉलर की चाल
  • तीसरा- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी

अगर फेड दरों में कटौती को और टालता है या दरें बढ़ाता है, तो सोना दबाव में रह सकता है. लेकिन अगर महंगाई काबू में आती है और दर कटौती की उम्मीद मजबूत होती है, तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है. Goldman Sachs ने भले ही अपना लक्ष्य 500 डॉलर घटा दिया हो, लेकिन बैंक अभी भी साल के अंत तक सोने को मौजूदा स्तरों से ऊपर देख रहा है. यानी कहानी खत्म नहीं हुई है, सिर्फ थोड़ी मुश्किल जरूर हुई है वैसे भी बाजार में अक्सर सबसे बड़े मौके तब बनते हैं, जब सबसे ज्यादा डर दिखाई देता है.

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