सोने और चांदी ने निवेशकों के साथ-साथ आम लोगों की धड़कनें भी बढ़ा रखी है. लगातार बदलते भाव ने मार्केट में भी उथल-पुथल मचा रखा है. इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. अगर आपने सोना या चांदी में निवेश किया है, तो इस वक्त आपकी चिंता बढ़ सकती है. क्योंकि सोना लगातार कमजोर हो रहा है और चांदी की चमक भी फीकी पड़ती जा रही है. सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल चुका है, जबकि चांदी भी 60 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है. अब बड़ा सवाल है कि आखिर सोना और चांदी इतनी तेजी से क्यों गिर रहे हैं? क्या यह गिरावट अभी और जारी रहेगी? या फिर यही सही मौका है खरीदारी का? सोना-चांदी के इस एपिसोड में आज जानिए इन्हीं सवालों के जवाब और साथ ही जानेंगे का एक्सपर्ट की क्या है राय.
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सोने-चांदी के ताजा भाव!
मुहर्रम यानी 26 जून को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोने और चांदी में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली. 26 जून शाम करीब 7 बजे 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना 396 रुपए की हल्की तेजी के साथ 1,43,523 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 1077 रुपये की तेजी के साथ 2,23,494 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी.
क्यों गिर रहा सोना-चांदी?
कमोडिटी मार्केट के जानकारों की माने तो फिलहाल सोने और चांदी पर सबसे बड़ा दबाव मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति का है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना और चांदी जैसी कीमती धातुएं महंगी लगने लगती हैं. ऐसे में निवेशक इनसे दूरी बनाने लगते हैं. दूसरी तरफ, अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद होती है, तो लोग सोने की बजाय बैंक, बॉन्ड और दूसरी ब्याज देने वाली जगहों पर पैसा लगाना पसंद करते हैं. यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से सोने और चांदी में लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है.
अगर इस साल की बात करें तो सोना अब तक करीब 8.4 फीसदी गिर चुका है. हालांकि, पिछले 12 महीनों में सोना अभी भी करीब 18.5 फीसदी ऊपर है. वहीं चांदी की हालत और ज्यादा खराब रही है. इस साल चांदी करीब 19 फीसदी टूट चुकी है. लेकिन अगर एक साल का रिकॉर्ड देखें तो चांदी अब भी करीब 56 फीसदी की बढ़त पर है. यानी लंबी अवधि में दोनों धातुओं ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है, लेकिन फिलहाल बाजार में दबाव साफ दिखाई दे रहा है.
इधर तकनीकी संकेत भी चिंता बढ़ा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सोने का 4,000 डॉलर के नीचे जाना एक बड़ा तकनीकी संकेत माना जा रहा है. जनवरी में सोने ने रिकॉर्ड हाई बनाया था, लेकिन वहां से अब तक कीमतों में करीब 26 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. ऐसे में कई बड़े निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में और दबाव बन रहा है.
एक्सपर्ट का क्या है कहना?
एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ ऐसे कारण हैं, जो आने वाले समय में सोने को फिर से सहारा दे सकते हैं. सबसे पहले, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है. जब तेल सस्ता होता है, तो महंगाई कम होने लगती है. अगर महंगाई कम रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर बार-बार ब्याज दर बढ़ाने का दबाव भी कम हो सकता है. यानी आने वाले महीनों में सोने पर ब्याज दरों का दबाव थोड़ा कम हो सकता है. इसके अलावा अमेरिका के सरकारी बॉन्ड की लंबी अवधि वाली यील्ड भी नीचे आ रही है. यह भी सोने के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाता है.
दुनिया में सोने और चांदी का सबसे बड़ा बाजार चीन भी है. लेकिन हाल की भारी उठापटक के बाद चीन के बड़े बैंकों ने खुदरा निवेशकों के लिए कीमती धातुओं में ट्रेडिंग पर सख्ती शुरू कर दी है. नई ट्रेडिंग अकाउंट खोलने पर रोक लगाई जा रही है. मार्जिन की शर्तें भी काफी सख्त कर दी गई हैं. इसका मकसद जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी को रोकना है.
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल की आगे क्या होगा? तो विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने और चांदी की कीमतें कमजोर बनी रह सकती हैं. जब तक डॉलर की मजबूती कम नहीं होती और गोल्ड ETF से बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में बड़ी रिकवरी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. हालांकि अच्छी बात यह है कि सोने के खिलाफ जो बड़े कारण थे, उनमें अब धीरे-धीरे कमी आने लगी है. यानी अगर डॉलर कमजोर पड़ता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो सोना और चांदी फिर से संभल सकते हैं.
तो कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि इस समय सोना और चांदी दोनों दबाव में हैं. मजबूत डॉलर, ब्याज दरों की चिंता और निवेशकों की बिकवाली ने इनकी कीमतों को नीचे ला दिया है. लेकिन दूसरी तरफ महंगाई में कमी, कच्चे तेल के सस्ते होने और ब्याज दरों पर घटते दबाव जैसी बातें भविष्य में इन धातुओं के लिए राहत लेकर आ सकती हैं. अगर आप सोने या चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो जल्दबाजी करने के बजाय बाजार की चाल पर नजर रखना बेहतर होगा.
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