जब दुनिया के शेयर बाजारों में अनिश्चितता हो, डॉलर की ताकत पर सवाल उठ रहे हों, जंग और जियो-पॉलिटिक्स की आंच फिर तेज हो रही हो तब पैसा आखिर जाता कहां है? जवाब हमेशा एक ही होता है, वो है सोना और चांदी. लेकिन आज कहानी में ट्विस्ट है क्योंकि जिन गोल्ड और सिल्वर ने पिछले साल रिकॉर्ड तोड़े, आज वही MCX पर दबाव में दिख रहे हैं. सुबह-सुबह भाव फिसले, ट्रेडर्स चौंके और निवेशकों के मन में सवाल उठने लगा कि क्या सोने-चांदी की रैली अब थम रही है या ये सिर्फ एक ठहराव है?
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इसी बीच, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन चुपचाप वो कर रहा है जो आने वाले समय में सोने की कीमतों की दिशा तय कर सकता है. चीन का सेंट्रल बैंक लगातार 14 महीने से खामोशी से टन के हिसाब से सोना खरीद रहा है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी बात.
पहले जानिए सोने-चांदी का भाव
MCX पर सोने का भाव 682 रुपए गिरकर 1 लाख 38 हजार रुपये पर पहुंच गया, वहीं सिल्वर के दाम 4 हजार रुपए टूटकर 2 लाख 55 हजार रुपये के करीब ट्रेड कर रहे थे. MCX के ताजा भाव गिरावट की असली वजह है और डेटा बता रहा है कि सोने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. आज की इस गिरावट की बात करें तो ये कारण रहें:
प्रॉफिट-बुकिंग और वॉल्यूम सेंटिमेंट- जैसे ही सोना और चांदी ने पिछले हफ्ते काफी तेजी दिखाई थी, कई ट्रेडर्स ने कुछ मुनाफा लेना शुरू किया.
इंट्राडे वोलाटिलिटी और ग्लोबल मार्केट्स- इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने-चांदी के वायदा भाव ने शुरुआत में तेजी के बाद कुछ गिरावट दिखाई, जिससे MCX पर दबाव बना.
फेड की पॉलिसी- जब बाजार में फेडरल रिजर्व (Fed) की नीतियों और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक गोल्ड-सिल्वर जैसे सेफ-हेवन एसेट्स की ओर भागते हैं या कुछ समय के लिए निकलते हैं. आज की ट्रेडिंग में ऐसा ही हिट-एंड-ट्रायल मूड देखने को मिला है.
चीन क्यों खरीद रहा सोना?
चीन के सेंट्रल बैंक People’s Bank of China ने गोल्ड खरीदने की अपनी स्ट्रीक को 14वें महीने तक बढ़ा दिया है जो ऐतिहासिक रूप से बहुत बड़ा ट्रेंड है. PBOC ने हाल ही में 30,000 ट्रॉय आउंस गोल्ड अपने रिजर्व में जोड़े हैं. नवंबर 2024 से अब तक चीन 42 टन सोना जमा किया है. ये सिर्फ एक केंद्रीय बैंक की नियमित खरीद नहीं है बल्कि ये स्ट्रेटेजिक गोल्ड डाइवर्सिफिकेशन की कहानी है. गोल्ड को डॉलर एक्सपोजर के खिलाफ हेज के रूप में देखा जा रहा है. कई देशों की तरह चीन भी अपने रिजर्व पोर्टफोलियो को रिस्क फ्री और सुरक्षित रखने के लिए सोना खरीद रहा है.
गोल्ड की डिमांड काफी मजबूत
Goldman Sachs के अनुमान बताते हैं कि चीन असल में और भी अधिक सोना खरीद रहा है, जितना आधिकारिक रूप से रिपोर्ट होता है इससे पता चलता है कि पर्दे के पीछे गोल्ड डिमांड काफी मजबूत है. अगर इस रिकॉर्ड-सेटिंग रैली और आज की गिरावट को जोड़कर देखें तो निष्कर्ष निकलता है कि:
- लांग-टर्म ट्रेंड अभी भी बुलिश है
- शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव सामान्य है
- सेंट्रल बैंक्स मांग से सपोर्ट है
China जैसे बड़े देशों की लगातार गोल्ड खरीदारी सबसे बड़ा स्ट्रक्चरल सपोर्ट है जो कीमतों को कायम रखता है, खासकर अगर वैश्विक अनिश्चितता बनी रहे. शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स वोलाटिलिटी का फायदा उठा सकते हैं, लॉन्ग-टर्म निवेशक गोल्ड और सिल्वर को हेजिंग और डाइवर्सिफिकेशन के लिए रख सकते हैं.
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