पिछले कुछ महीनों में अगर किसी एसेट ने निवेशकों को सबसे ज्यादा चौंकाया, डराया और फिर उम्मीद भी दी, तो वो है सोना. कभी रिकॉर्ड ऊंचाई तो कभी तेज गिरावट और अब एक ऐसा दौर, जहां हर निवेशक कन्फ्यूज है कि क्या गोल्ड अब गिरने वाला है? या ये सिर्फ एक करेक्शन है और आगे फिर से रॉकेट बनेगा? सोना-चांदी के इस एपिसोड में आज जानेंगे गोल्ड की चाल, इसके पीछे की असली वजहें, और आगे क्या हो सकता है.
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सोने-चांदी के भाव
सोने-चांदी के लगातार बदलते भाव ने निवेशकों के साथ-साथ आम लोगों की दिलों की धड़कन बढ़ा रखी है. MCX एक्सचेंज पर 30 मार्च को शाम करीब 7 बजे 5 जून को डिलीवरी वाला सोना 1838 रुपए की तेजी के साथ 1,49,093 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं चांदी भी पीछे नहीं है और उसमें भी तेजी देखी गई है. 5 मई को डिलीवरी वाली चांदी 2909 रुपए की तेजी के साथ 2,30,863 प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी.
कैसी है गोल्ड की चाल?
मार्च का महीना गोल्ड के लिए अच्छा साबित नहीं हुआ. इस महीने सोने में 15 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है. हालांकि तेज गिरावट के बाद सोने में निचले स्तरों से मामूली खरीदारी भी देखने को मिली है. सोमवार को भी सोने और चांदी में निचले स्तरों से खरीदारी देखने को मिली है. देखा गया है कि गोल्ड में गिरावट के बाद अचानक खरीदार एक्टिव हो गए है. यानी जैसे ही कीमत नीचे आई, वैसे ही बड़े निवेशकों ने खरीदारी शुरू कर दी. इसे ही Buy on Dip Strategy कहते हैं. मतलब साफ है लॉन्ग टर्म निवेशक अभी भी गोल्ड पर भरोसा कर रहे हैं लेकिन शॉर्ट टर्म में अस्थिरता(volatility) बहुत ज्यादा है.
सोने की क्यों बदल रही है चाल?
इस समय गोल्ड की चाल को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है, वो है मिडिल ईस्ट में चल रही जंग. एक तरफ अमेरिका और इजराइल तो दूसरी तरफ ईरान और इसी वजह से पूरी दुनिया की टेंशन का माहौल है. जब भी दुनिया में जंग या अनिश्चितता बढ़ती है तो गोल्ड को सेफ हेवन माना जाता है. इसलिए जंग गोल्ड को सपोर्ट भी कर रही है लेकिन शांति की खबर आते ही कीमत गिर भी जाता है.
सोना गिरने की वजह
सोने की चाल बदलने के अलावा कुछ ऐसे फैक्टर भी है जो गोल्ड को नीचे खींच रहे है. मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें एक बड़ी वजह मानी जा रही है. जब अमेरिका में ब्याज दरें ज्यादा होती हैं तो निवेशक गोल्ड छोड़कर बॉन्ड और डॉलर में पैसा डालते हैं. ये ही वजह है कि अभी गोल्ड की तेजी कैप हो रही है. गोल्ड में गिरावट का एक बड़ा कारण रहा ETF से पैसा निकलना भी है. क्योंकि जब बड़े फंड गोल्ड बेचते हैं तो मार्केट में सप्लाई बढ़ती है और कीमत गिरती है.
दिलचस्प बात ये है कि भारत में फिजिकल गोल्ड की डिमांड थोड़ी बढ़ी है लेकिन चीन में डिमांड कमजोर रही. इसका मतलब है भारतीय निवेशक गिरावट में खरीद रहे हैं लेकिन ग्लोबल डिमांड उतनी मजबूत नहीं है..
एक्सपर्ट की राय
एक्सपर्ट के मुताबिक अभी गोल्ड Corrective Phase में है यानी बड़ी तेजी के बाद स्थिरता दिखा रहा है. निवेशक ऊपर स्तरों पर बेचेंगे और निचले स्तरों पर खरीदारी की रणनीति अपना रहे हैं.
क्या गोल्ड और गिरेगा?
जानकारों के मुताबिक अगर सोने के दाम 1 लाख 36 हजार प्रति तोले के नीचे गए तो गिरावट तेज हो सकती है. अगर भाव डेढ़ लाख के ऊपर टिका तो तेजी वापस आ सकती है. लेकिन अगर मिडिल ईस्ट की जंग और बढ़ती है तो तेल महंगा होगा, महंगाई बढ़ेगी और गोल्ड में फिर से तेजी आ सकती है. वहीं अगर अचानक सीजफायर(ceasefire) हो गया तो गोल्ड में और गिरावट आ सकती है.
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