सोना-चांदी में पिछले साल से दिख रहे उतार-चढ़ाव रुकने का नाम नहीं ले रही है. 2025 से जारी इस रैली के बाद 2026 के जनवरी महीने में सोना-चांदी ने अपना ऑल टाइम हाई बनाया था. अब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई तेज हो गई है और इसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है. सवाल ये है कि अगर ये जंग लंबी चली तो सोने-चांदी की कीमतें कहां जाएंगी? क्या बड़ी तेजी बनेगी या फिर गिरावट देखने को मिलेगी? मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे इस तनाव के बीच अब सोने पर दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में से एक रे डालियो ने बड़ी चेतावनी दे दी है. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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सोने-चांदी के ताजा भाव!
रे डालियो की चेतावनी जानने से पहले आइए जानते हैं सोना-चांदी के ताजा भाव. MCX एक्सचेंज पर 12 मार्च को शाम करीब 7 बजे 2 अप्रैल 2026 को डिलीवरी वाला सोना 1,61,978 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. वहीं 5 मई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी लगभग 5 हजार रुपए की ज्यादा तेजी के साथ 2,73,850 रुपए पर ट्रेड कर रही थी.
रे डालियो ने ऐसा क्या कहा कि छिड़ गई बहस?
दुनिया के मशहूर निवेशक रे डालियो की ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में ऐसी बात कह दी, जिससे फिर से बहस छिड़ गई है. रे डालियो का कहना है कि सोने की बिटकॉइन से तुलना नहीं करनी चाहिए. दोनों बिल्कुल अलग तरह के एसेट हैं और अगर सुरक्षित निवेश यानी सेफ हेवन की बात करें तो सोना आज भी बिटकॉइन से ज्यादा भरोसेमंद है. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि जिस दिन रे डालियो ने ये बयान दिया उसी दिन बाजार में कुछ उल्टा हो गया. सोना गिर गया लेकिन बिटकॉइन ज्यादा नहीं गिरा.
रे डालियो सोने को क्यों मानते है बेहतर?
रे डालियो का सोने को बेहतर मानने के पीछे 3 कारण है:
पहला कारण- सेंट्रल बैंक का भरोसा:
डालियो कहते हैं कि दुनिया के लगभग सभी बड़े सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व में सोना रखते हैं. भारत, अमेरिका, चीन, रूस...हर देश के पास हजारों टन सोना है. लेकिन अभी तक कोई भी सेंट्रल बैंक बिटकॉइन को रिजर्व एसेट की तरह नहीं रखता. डालियो के मुताबिक, जिस एसेट पर सरकारें भरोसा करती हैं वो ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद माना जाता है.
दूसरा कारण- प्राइवेसी:
डालियो के मुताबिक, बिटकॉइन पूरी तरह ब्लॉकचेन पर रिकॉर्ड होता है. यानी हर ट्रांजैक्शन ट्रैक किया जा सकता है, सरकारें या एजेंसियां उसे देख सकती हैं लेकिन सोने के साथ ऐसा नहीं है. फिजिकल गोल्ड हाथ से हाथ बदल सकता है और उसका डिजिटल रिकॉर्ड जरूरी नहीं होता. इसलिए कुछ निवेशकों के लिए सोना ज्यादा निजी और सुरक्षित माना जाता है.
तीसरा कारण- क्वांटम कंप्यूटर का खतरा:
डालियो ने एक और चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर बहुत शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर बन गए तो वो बिटकॉइन की क्रिप्टोग्राफी को तोड़ सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो बिटकॉइन की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. लेकिन सोने के साथ ऐसा कोई तकनीकी खतरा नहीं है क्योंकि यह एक भौतिक संपत्ति है.
'असल में पैसा कर्ज होता है'
डालियो के मुताबिक, सोना हजारों साल से पैसे की तरह इस्तेमाल होता आया है. आज भी दुनिया के सेंट्रल बैंक डॉलर जैसी करेंसी के बाद सबसे ज्यादा सोना ही रिजर्व में रखते हैं. डालियो का एक मशहूर बयान है, असल में पैसा कर्ज होता है. सरकारें ज्यादा कर्ज लेती हैं तो ज्यादा पैसा छापती हैं और इससे मुद्रा की कीमत गिरती है. लेकिन सोना छापा नहीं जा सकता. इसकी सप्लाई सीमित है. इसी वजह से इसे वैल्यू स्टोर माना जाता है.
डालियो का मानना है कि दुनिया की आर्थिक व्यवस्था बदल रही है. अमेरिका का बढ़ता कर्ज, जियोपॉलिटिकल तनाव और डॉलर पर घटता भरोसा, इन सब वजहों से निवेशकों को अपने पैसे को सुरक्षित रखने के नए तरीके ढूंढने होंगे. और इसी वजह से सोना और बिटकॉइन दोनों की चर्चा बढ़ रही है.
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