सोना, जिसे सदियों से सुरक्षित निवेश माना जाता है, आज ऐसी कीमत पर ट्रेड कर रहा है जो उसकी फेयर वैल्यू से तकरीबन पांच गुना ज्यादा है. बीते कुछ दिनों से लगातार सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव देखा गया है, उसने निवेशकों और आम लोगों दोनों कि ही धड़कनें बढ़ा रखी है. इसी बीच अब दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट Ruchir Sharma, जो Rockefeller International के चेयरमैन हैं, उन्होंने अपने हालिया कॉलम में साफ कहा अब सोना फंडामेंटल से नहीं, कहानियों से चल रहा है. यानी गोल्ड की कीमत अब डेटा, महंगाई या ब्याज दरों से कम, और ग्लोबल डर और अनिश्चितता की कहानी से ज्यादा तय हो रही है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी बात.
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बीते 1 साल में दमदार रिटर्न
बीते एक साल में सोने ने दमदार रिटर्न निवेशकों को दिया है. अगर पिछले 6 महीने की बात की जाएं तो सोने के भाव ने 60 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है, वहीं अगर बात 1 साल की हो तो यह रिटर्न 20 प्रतिशत बढ़ जाता है और आंकड़ा 80 फीसदी पहुंच जाता है.
सोने में अचानक क्यों आई तेजी?
सोने में ये तेजी अचानक नहीं आई. इसके पीछे कई कारण जैसे सेंट्रल बैंकों की भारी खरीद, डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश और यूक्रेन युद्ध के बाद प्रतिबंधों का डर शामिल था. लेकिन अब कहानी बदल रही है. सदियों तक गोल्ड की चाल बहुत हद तक महंगाई से जुड़ी रही. जब महंगाई बढ़ती थी ब्याज दरें गिरती थीं, सेविंग अकाउंट और बॉन्ड पर रिटर्न घटता था, तो लोग पैसा सोने में डालते थे. क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता, लेकिन कीमत बढ़ सकती है.
1970 के दशक में ऐसा ही हुआ था. जब महंगाई डबल डिजिट में पहुंच गई थी और गोल्ड सुपर साइकल में चला गया था. 2023 से एक बड़ा बदलाव आया. सेंट्रल बैंकों ने भारी मात्रा में सोना खरीदना शुरू किया. इसके पीछे की वजह रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध, डॉलर की अस्थिरता और विदेशी भंडार में विविधता लाने की कोशिश रही. इसे कुछ विश्लेषकों ने एंटी-डॉलर रेवोल्यूशन कहाऔर यहीं से गोल्ड की रैली ने रफ्तार पकड़ी.
सोने को लेकर रूचिर शर्मा का क्या है मानना?
रुचिर शर्मा के अनुसार, अब सेंट्रल बैंक की खरीद की रफ्तार धीमी पड़ रही है. ज्वेलरी डिमांड भी ऊंची कीमतों की वजह से कम हुई है. लेकिन फाइनेंशियल इन्वेस्टर्स की बढ़ती मांग की वजह से सोना नहीं गिर रहा है. गोल्ड ETF में रिकॉर्ड इनफ्लो, अमेरिका-भारत-ब्रिटेन में खरीदारी, चीन में रिटेल निवेशकों की भारी एंट्री के चलते भी सोने की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है.
रुचिर शर्मा कहते हैं पिछले साल गोल्ड खरीद में निवेशकों की हिस्सेदारी दोगुनी होकर 35% हो गई. खासकर चीन के निवेशकों ने बड़े पैमाने पर सोना खरीदा. यानी अब सोना भावनाओं और डर पर चल रहा है. रुचिर शर्मा का दावा है कि, गोल्ड अभी अपने इम्प्लाइड या फेयर वैल्यू से करीब पांच गुना ऊपर ट्रेड कर रहा है. $5,000 प्रति औंस का स्तर ऐतिहासिक औसत से पांच स्टैंडर्ड डेविएशन ऊपर है. ये फ्रीकिशली अनयूजुअल यानी बेहद असामान्य व्यवहार है.
क्या टूटने वाला है सोने का 'बबल'?
सवाल यह उठता है कि क्या यह चमक बरकरार रहेगी? अक्सर तर्क दिया जाता है कि डॉलर के कमजोर होने से सोना बढ़ रहा है, लेकिन रुचिर शर्मा इस दावे को भी खारिज करते हैं. उनका कहना है कि अगर सच में डॉलर का पतन हो रहा होता, तो बिटकॉइन जैसे डिजिटल विकल्प भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर होते, जबकि उनमें गिरावट देखी गई है.
असलियत यह है कि दुनिया भर में लिक्विडिटी (नकदी) अभी भी बहुत ज्यादा है और निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी अब भी ऐतिहासिक रूप से कम है, जो कीमतों को गिरने नहीं दे रही. हालांकि, निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है; क्योंकि 1970 का सुपर-साइकिल तब टूटा था जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें आक्रामक रूप से बढ़ाई थीं. अगर आने वाले समय में फिर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर आया, तो सोने का यह 'सट्टेबाजी वाला गुब्बारा' किसी भी वक्त फट सकता है.
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