बीते कई महीनों से सोने-चांदी में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. इसकी वजह से आम जनता के साथ-साथ निवेशकों में भी भारी तनाव है. इसी बीच सोने और चांदी की कीमत में दो दिन की गिरावट के बाद आज फिर तेजी आई है. सोने-चांदी की कीमतों में हाल ही में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. अब सोने-चांदी पर एक और बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला आने वाला है. इसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर देखने को मिलेगा. सोने-चांदी के इस खास एपिसोड में आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.
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पहले जानिए सोने-चांदी का भाव
आज MCX पर चांदी की कीमत में शुरुआती कारोबार में 5,000 रुपये से अधिक की तेजी आई है, जबकि सोना भी 1,500 रुपये से ज्यादा महंगा हुआ है. 5 मार्च की डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,28,783 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी जबकि 18 फरवरी को ये 2,32,929 रुपये पर खुली. शुरुआती कारोबार में यह 5,087 रुपये की तेजी के साथ 2,33,870 रुपये तक पहुंची. इस बीच सोने की कीमत में भी तेजी आई है. MCX पर 2 अप्रैल की डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,51,418 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और 18 फरवरी को यह 1,53,303 रुपये पर खुला. शुरुआती कारोबार में यह 1,888 रुपये की तेजी के साथ 1,53,303 रुपये तक पहुंचा.
अमेरिका से क्या आने वाला है फैसला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में एक बड़ा फैसला आने वाला है. इस फैसले का हजारों छोटे बिजनेस मालिक सांस रोके इंतजार कर रहे हैं क्योंकि ये मामला ट्रंप के टैरिफ से जुड़ा है(टैरिफ यानी आयात पर टैक्स). जब विदेश से सामान अमेरिका आता है तो उस पर टैक्स देना पड़ता है और पिछले एक साल में इन टैक्स ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्जीनिया में एक साइडर बनाने वाले कारोबारी हैं, उनकी फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले एल्युमिनियम के डिब्बे महंगे हो गए. मिनेसोटा की एक बेबी प्रोडक्ट कंपनी महीनों तक बिना माल के बैठी रही और कमाई रुक गई.
क्योंकि भारत से सामान मंगाना महंगा हो गया और पेनसिल्वेनिया के एक ग्लास बिजनेस मालिक हर बार नया स्टॉक मंगाते समय टैरिफ का बिल देखकर परेशान हो जाते हैं. यानी समस्या हर सेक्टर में है. छोटे कारोबारी कह रहे हैं बिजनेस को सबसे ज्यादा स्थिरता की जरूरत होती है लेकिन अभी माहौल उल्टा है. नीतियां तेजी से बदलती हैं, खर्च बढ़ते जा रहे हैं और अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर है.
कोर्ट के फैसले के मायने
दरअसल अब कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राष्ट्रपति ने आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करके ये टैरिफ लगाने का अधिकार सही तरीके से इस्तेमाल किया या नहीं? यह मामला पिछले साल से कोर्ट में है और फैसला अब तक नहीं आया. अगर कोर्ट कहता है कि टैरिफ वैध हैं तो कारोबारी इसी बोझ के साथ आगे बढ़ेंगे और अगर कोर्ट कहता है कि टैरिफ गलत थे तो बड़ा सवाल उठेगा कि जो पैसा पहले ही दे दिया गया उसका क्या होगा? क्या सरकार वापस करेगी या कारोबारी खुद केस लड़ेंगे?
सरकार का टैरिफ को लेकर क्या है नजरिया?
सरकार कहती है टैरिफ देश के लिए फायदेमंद हैं और इससे सरकार को भारी कमाई हो रही है. पिछले साल टैरिफ से करीब 200 अरब डॉलर मिले और इस साल यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. सरकार का दावा है कि इन पैसों से देश का कर्ज कम होगा, नई फैक्ट्रियां बनेंगी और नौकरियां लौटेंगी.
अर्थशास्त्री का क्या है मानना?
भले ही सरकार टैरिफ को सही ठहराए लेकिन अर्थशास्त्री अलग कहानी बताते हैं. उनका कहना है टैरिफ से राजस्व जरूर बढ़ता है लेकिन अर्थव्यवस्था को नुकसान भी होता है. क्योंकि कारोबार धीमा पड़ता है और चीजें महंगी हो जाती हैं. आखिरकार इसका बोझ आम लोगों पर पड़ता है. अनुमान है एक सामान्य अमेरिकी परिवार को अगले साल करीब 1300 सौ डॉलर ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं, यानी टैक्स सीधे जेब से नहीं महंगे सामान के रूप में निकलता है. कुछ कारोबारी तो हालात से बचने के लिए ज्यादा माल पहले ही खरीदकर जमा कर रहे हैं. कुछ ने कर्ज लिया तो कुछ ने कर्मचारियों की छंटनी की.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले शुक्रवार को कोर्ट का फैसला आ सकता है. अगर टैरिफ हटते हैं तो राहत मिल सकती है अगर जारी रहते हैं तो दबाव और बढ़ सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से आने वाले इस फैसले का असर सीधे सोने चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है. कुल मिलाकर अब देखना ये है कि कोर्ट का फैसला राहत देगा या बोझ और बढ़ाएगा. क्योंकि इस फैसले पर सिर्फ कानून नहीं हजारों छोटे कारोबारों का भविष्य टिका है.
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