सोचिए, एक तरफ दुनिया में युद्ध का तनाव है. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच रहा है. ऐसे माहौल में आम तौर पर सोने को सहारा मिलना चाहिए, क्योंकि जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोने की तरफ भागते हैं. लेकिन इस बार कहानी में एक ट्विस्ट है. सोने में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। हाल ये है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमत 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई है. और चांदी का तो और भी बुरा हाल है. इसकी कीमत एक ही दिन में 6 फीसदी से ज्यादा टूट गई. अब सवाल है कि जब दुनिया में तनाव है, तेल महंगा हो रहा है, तब सोना-चांदी गिर क्यों रहे हैं? क्या अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने पूरा खेल बदल दिया है? और क्या आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है? चलिए, इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं.
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सोने की कीमत
सबसे पहले कीमतों पर नजर डालिए. भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 15 अक्टूबर 2026 को 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला सोना 1300 रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ 1,47,250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं 24 अगस्त 2026 को एमसीएक्स पर सोने की कीमत करीब 1,65,000 रुपये प्रति 10 पर ट्रेड कर रही थी। यानी सोना करीब 18 हजार रुपये सस्ता हो चुका है। अब सोने को अभी खरीदें या इंतजार करें इसपर एक्सपर्ट की राय अलग - अलग बंटी हुई है। हालांकि आप कहीं पर भी निवेश करने से पहले एक बार अपने वित्तीय सलाहाकार से बात जरूर कर लें। ऐसा नहीं करने पर आपको आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अमेरिका में बुधवार को कारोबार के आखिरी हिस्से में स्पॉट गोल्ड यानी हाजिर सोने की कीमत करीब 4,098 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. इसमें 61.30 डॉलर यानी 1.47 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, स्पॉट सिल्वर यानी हाजिर चांदी करीब 55.410 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी. इसकी कीमत 6.16 फीसदी टूट गई. यानी सोने में गिरावट आई, लेकिन चांदी में बिकवाली कहीं ज्यादा तेज रही. अब ये स्पॉट प्राइस हैं, यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर मेटल्स की कीमतें. भारत में सोने-चांदी के दाम रुपये, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, आयात शुल्क और स्थानीय बाजार की स्थिति के कारण अलग हो सकते हैं.
महंगाई ने बिगाड़ा खेल
अब आते हैं उस वजह पर, जिसने बाजार का मूड बिगाड़ दिया. अमेरिका में सितंबर महीने के महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा गर्म निकले. यहां गर्म महंगाई का मतलब है कि कीमतें अनुमान के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ीं. सितंबर में अमेरिका का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI एक महीने में 0.6 फीसदी बढ़ा. सालाना आधार पर महंगाई दर 3.7 फीसदी रही, जबकि बाजार का अनुमान 3.6 फीसदी का था. यानी महंगाई कम होने के बजाय बाजार की उम्मीद से ज्यादा निकली. अब सिर्फ महंगाई का आंकड़ा ही नहीं, उसके अंदर की कहानी भी समझिए. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में 9.1 फीसदी का उछाल आया. इस बढ़ोतरी ने महीने की कुल महंगाई में आधे से ज्यादा योगदान दिया. वहीं, खाने और ऊर्जा जैसी ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली चीजों को हटाकर देखी जाने वाली कोर महंगाई भी बढ़ी. सितंबर में कोर CPI महीने-दर-महीने 0.3 फीसदी और सालाना आधार पर 2.6 फीसदी बढ़ा. ये आंकड़े भी बाजार की उम्मीद से ज्यादा रहे.
अगर अमेरिका में कीमतें तेजी से बढ़ती रहीं, तो वहां का केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें ऊंची रख सकता है या उन्हें और बढ़ा सकता है. और यहीं से सोने पर दबाव शुरू होता है.
कुल मिलाकर सोने और चांदी की कीमतों को इस समय दो ताकतें खींच रही हैं. एक तरफ युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव है, जो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ा सकता है.दूसरी तरफ महंगाई, मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड हैं, जो कीमती मेटल्स के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं. फिलहाल अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरें बढ़ने की आशंका को मजबूत किया है. अब बाजार की अगली नजर PPI, खुदरा बिक्री और दूसरे आर्थिक आंकड़ों पर है. अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये की चाल और घरेलू बाजार के भाव भी देखिए. केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है.
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