अगर आप सोना या चांदी खरीदने का सोच रहे हैं, तो इस समय बाजार की चाल समझना जरूरी है. इस वक्त दोनों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने हाल के ऊपरी स्तर से करीब 9 फीसदी नीचे आ चुका है.
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जानकारों का कहना है कि इस हफ्ते अमेरिका से आने वाले अहम आंकड़े सोने और चांदी की चाल तय कर सकते हैं. खास नजर रोजगार और महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी. इनसे यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिका का फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर आगे क्या कदम उठा सकता है.
अभी बाजार का रुख कैसा है.
जानकारों के मुताबिक, नजदीकी समय में सोने और चांदी दोनों का रुख कमजोर बना हुआ है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि फिलहाल कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका है.
एंकर इनपुट के मुताबिक, इस कमजोरी की बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदली हुई उम्मीदें हैं. बाजार अब मान रहा है कि फेडरल रिजर्व दरें ऊंची रख सकता है, या फिर बढ़ा भी सकता है. यही बात सोने और चांदी पर दबाव बढ़ा रही है.
सोने में कितनी गिरावट आई.
हाल में सोना करीब 4,697 डॉलर प्रति औंस के तीन महीने के ऊपरी स्तर तक पहुंचा था. इसके बाद इसमें तेज गिरावट आई और भाव करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया. यानी ऊपरी स्तर से करीब 9 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई.
हाल का ऊपरी स्तर. 4,697 डॉलर प्रति औंस.गिरावट के बाद भाव. करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस.कुल गिरावट. करीब 9 फीसदी.
दबाव की बड़ी वजहें क्या हैं.
जानकारों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में फिर से तनाव बढ़ा है. इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं. तेल महंगा होने पर महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है.
अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ज्यादा समय तक ऊंचा रख सकता है. यही डर सोने और चांदी के निवेशकों को परेशान कर रहा है.
बाजार में इस महीने अमेरिका में 25 बेसिस पॉइंट, यानी 0.25 फीसदी, ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई है. अगर दरें बढ़ती हैं, तो सोने पर दबाव और बढ़ सकता है.
इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़त और डॉलर की मजबूती भी सोने के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जा रही है. आम तौर पर ये दोनों बातें सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ाती हैं.
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा.कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई.महंगाई ऊंची रहने का डर बढ़ा.अमेरिका में 0.25 फीसदी दर बढ़ोतरी की उम्मीद करीब 70 फीसदी तक पहुंची.बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों मजबूत हुए.
भारत के बाजार पर क्या असर है.
भारत में भी बाजार की सोच पर असर पड़ा है. एंकर इनपुट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने को लेकर की गई अपील का असर घरेलू बाजार के माहौल पर देखा गया है.
उन्होंने लोगों से कहा था कि जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचना चाहिए. इसका मतलब यह नहीं है that सरकार ने सोना खरीदने पर कोई रोक लगा दी है. यह सिर्फ एक अपील है. लेकिन इससे घरेलू मांग को लेकर बाजार की उम्मीदों पर कुछ असर पड़ सकता है.
एमसीएक्स पर अहम स्तर कौन से हैं.
भारत के बाजार में एमसीएक्स पर सोना फिलहाल करीब ₹1,50,000 के आसपास बताया गया है. जानकारों के मुताबिक, नीचे की तरफ ₹1,47,700 और ₹1,46,400 अहम सपोर्ट स्तर हैं. वहीं ऊपर की तरफ ₹1,55,000 और ₹1,59,000 अहम रेजिस्टेंस स्तर बताए गए हैं.
मौजूदा स्तर. करीब ₹1,50,000.सपोर्ट स्तर. ₹1,47,700.दूसरा सपोर्ट स्तर. ₹1,46,400.रेजिस्टेंस स्तर. ₹1,55,000.दूसरा रेजिस्टेंस स्तर. ₹1,59,000.
अब किस आंकड़े पर सबसे ज्यादा नजर है.
इस हफ्ते अमेरिका के पेरोल, यानी रोजगार के आंकड़े, शुक्रवार को आने हैं. इसके बाद अगले हफ्ते महंगाई के आंकड़े जारी होंगे. बाजार इन्हीं आंकड़ों से यह समझने की कोशिश करेगा कि फेडरल रिजर्व का अगला कदम क्या हो सकता है.
अगर अमेरिका का रोजगार बाजार कमजोर दिखता है, या महंगाई के आंकड़े उम्मीद से नरम आते हैं, तो ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम हो सकती है. ऐसी स्थिति में सोने और चांदी में फिर से खरीदारी लौट सकती है.
लेकिन अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे और महंगाई ज्यादा रही, तो फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की उम्मीद और बढ़ सकती है. ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है.
निवेशकों के लिए अभी क्या संकेत हैं.
फिलहाल तस्वीर साफ है. सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना हुआ है, और आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले रोजगार और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी. अगर आंकड़े नरम रहे तो राहत मिल सकती है, और अगर आंकड़े मजबूत रहे तो दबाव कुछ और समय तक जारी रह सकता है.
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