दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर फिर चिंता बढ़ गई है. निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि अगर फारस की खाड़ी में तनाव बना रहा, तो तेल की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित हो सकती है. इसका असर सिर्फ तेल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल, डीजल, गैस, महंगाई और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
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कुछ दिन पहले तक गोल्डमैन सैक्स का अनुमान था कि अगले साल दुनिया में तेल की भरमार हो सकती है. लेकिन अब बैंक ने एक हफ्ते के भीतर अपना आकलन बदल दिया है. बैंक का कहना है कि हालात पहले जितने सामान्य नहीं दिख रहे हैं.
चिंता की बड़ी वजह क्या है
इस चिंता के केंद्र में होरमुज जलडमरूमध्य है. यह दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल जहाजों के जरिए अलग अलग देशों तक पहुंचता है. अगर इस रास्ते में रुकावट आती है, तो तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है.
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, मध्य पूर्व के कई तेल उत्पादक देशों ने बंद पड़े तेल कुओं को फिर से चालू करना शुरू किया था. उम्मीद थी कि तेल उत्पादन धीरे धीरे सामान्य हो जाएगा. लेकिन होरमुज के आसपास बढ़ते खतरे से यह प्रक्रिया फिर धीमी पड़ सकती है.
गोल्डमैन सैक्स ने क्या कहा
- बैंक के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले मध्य पूर्व का तेल उत्पादन अब भी करीब १ करोड़ ५ लाख बैरल प्रति दिन कम है.
- बैंक का कहना है कि युद्ध से पहले होरमुज से जितना तेल गुजरता था, तनाव कम होने के बाद वह करीब ८० फीसदी तक लौट आया था.
- अब यह फिर घटकर करीब ७० फीसदी पर पहुंच गया है.
- इसका मतलब है कि सप्लाई में सुधार की रफ्तार फिर कमजोर हुई है.
जहाजों की आवाजाही पर भी असर
बैंक के मुताबिक, हाल के समय में तेल टैंकरों पर हमलों ने चिंता और बढ़ा दी है. कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते से जहाज भेजने में सावधानी बरत रही हैं. वजह यह है कि युद्धविराम की स्थिति अब भी पूरी तरह साफ नहीं मानी जा रही है.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल में होरमुज जलडमरूमध्य में सामान्य तेल टैंकर बहुत कम दिखाई दिए. रिपोर्ट में कहा गया कि वहां सिर्फ एक बड़ा तेल जहाज दिखा, जिस पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं. इससे समुद्री आवाजाही की रफ्तार को लेकर चिंता बढ़ी है.
आगे कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है
मार्च में जब मध्य पूर्व में संकट बढ़ा था, तब कई देशों ने अपने आपात तेल भंडार से बड़ी मात्रा में तेल बाजार में उतारा था. इसका मकसद सप्लाई बनाए रखना और कीमतों को ज्यादा बढ़ने से रोकना था. लेकिन इससे कई देशों के तेल भंडार कम हो गए.
अब इन देशों को अपने भंडार फिर से भरने होंगे. इससे तेल की मांग बढ़ सकती है. अगर दूसरी तरफ सप्लाई कमजोर रही, तो कीमतों में तेजी आ सकती है. यही वजह है कि कई जानकार आने वाले समय में तेल महंगा होने की आशंका जता रहे हैं.
आम लोगों पर असर कैसे पड़ेगा
- सबसे पहले असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है.
- इसके बाद ढुलाई और सफर का खर्च बढ़ सकता है.
- फिर रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं.
- इसका सीधा असर महंगाई और घर के बजट पर पड़ सकता है.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि दुनिया फिर से बड़े तेल संकट की तरफ बढ़ रही है या नहीं. लेकिन गोल्डमैन सैक्स की नई चेतावनी यह जरूर दिखाती है कि जोखिम अभी टला नहीं है. अगर फारस की खाड़ी में तनाव बढ़ता है, होरमुज से जहाजों की आवाजाही और घटती है, और तेल उत्पादन जल्दी सामान्य नहीं होता, तो आने वाले महीनों में इसका असर पूरी दुनिया महसूस कर सकती है.
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