सरकारी कंपनियों से सरकार को 80,000 करोड़ डिविडेंड मिलने का अनुमान

तनीषा त्यागी

• 11:09 AM • 06 Jul 2026

सरकारी कंपनियों की मजबूत कमाई से this साल सरकार को रिकॉर्ड डिविडेंड मिल सकता है. जानिए बजट, घाटे, सब्सिडी और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

पिछले वित्त वर्ष में सरकार को 78,438 करोड़ रुपये डिविडेंड मिला था

डीपैम नीति कंपनियों को मुनाफे का कम से 30 प्रतिशत बांटने कहती

तेल, गैस, कोयला, बिजली और खनन कंपनियों की कमाई मजबूत रही

सरकार की कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है, लेकिन इसके अलावा भी सरकार के पास आय के कई स्रोत होते हैं. इन्हीं में से एक है सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड. अब वित्त वर्ष 2026-27 को लेकर ऐसा अनुमान सामने आया है, जिसने सरकार की गैर-कर आय को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं. माना जा रहा है कि इस साल सरकार को गैर-वित्तीय केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों यानी Non-Financial CPSEs से करीब 80,000 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिल सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड कलेक्शन होगा.

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यह अनुमान सरकार के बजट अनुमान से भी अधिक है. साथ ही यह पिछले वित्त वर्ष में मिले डिविडेंड के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है. सवाल यह है कि सरकार को इतनी बड़ी रकम कैसे मिलेगी, इसके पीछे क्या वजह है और इसका अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है. आइए पूरी तस्वीर आसान भाषा में समझते हैं.

डिविडेंड क्या होता है?

जब कोई कंपनी कारोबार से मुनाफा कमाती है, तो वह उस मुनाफे का एक हिस्सा अपने शेयरधारकों में बांट सकती है. इसी रकम को डिविडेंड कहा जाता है.

सरकार कई बड़ी सरकारी कंपनियों में सबसे बड़ी हिस्सेदार है. इसलिए जब ये कंपनियां अच्छा मुनाफा कमाती हैं और डिविडेंड घोषित करती हैं, तो उसका सबसे बड़ा लाभ सरकार को मिलता है. यही वजह है कि सरकारी कंपनियों का बेहतर प्रदर्शन सीधे सरकार की आय को भी बढ़ाता है.

 FY27 में सरकार को मिल सकता है रिकॉर्ड डिविडेंड

अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार को गैर-वित्तीय केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से करीब 80,000 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिल सकता है. यह आंकड़ा सरकार के बजट अनुमान 75,000 करोड़ रुपये से भी अधिक है. अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड कलेक्शन होगा. पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार को इन कंपनियों से करीब 78,438 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला था. ऐसे में इस साल नया रिकॉर्ड बनने की संभावना जताई जा रही है.

आखिर इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों संभव है?

सरकारी कंपनियों की मजबूत वित्तीय स्थिति इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है. तेल, गैस, कोयला, बिजली, खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों की कई सरकारी कंपनियों ने हाल के समय में बेहतर मुनाफा कमाया है. जब कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है, तो उनके पास ज्यादा डिविडेंड देने की क्षमता भी बढ़ जाती है. चूंकि सरकार इन कंपनियों की प्रमुख शेयरधारक है, इसलिए ज्यादा डिविडेंड का सबसे बड़ा फायदा भी सरकार को ही मिलने वाला है.

सरकारी कंपनियां कितना डिविडेंड देती हैं?

सरकारी कंपनियों के लिए Department of Investment and Public Asset Management यानी DIPAM की एक डिविडेंड नीति लागू है.इस नीति के तहत सरकारी कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे हर साल टैक्स चुकाने के बाद बचे मुनाफे यानी Profit After Tax का कम से कम 30 प्रतिशत या फिर अपनी Net Worth का 5 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, उसे डिविडेंड के रूप में वितरित करें. हालांकि अंतिम फैसला कंपनी की वित्तीय स्थिति, भविष्य की निवेश जरूरतों और बोर्ड के निर्णय पर निर्भर करता है.

पांच साल में लगभग दोगुना हो गया डिविडेंड

अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सरकारी कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है.

  • वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार को गैर-वित्तीय सरकारी कंपनियों से करीब 39,750 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला था.
  • इसके बाद सरकारी कंपनियों की आय में सुधार के साथ डिविडेंड भी लगातार बढ़ता गया
  • वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 78,438 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
  • अब वित्त वर्ष 2026-27 में इसके 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है
  • करीब पांच वर्षों में यह राशि लगभग दोगुनी हो गई है.

साल की शुरुआत धीमी, लेकिन उम्मीद बरकरार

चालू वित्त वर्ष की शुरुआत फिलहाल बहुत तेज नहीं रही है. अब तक सरकार को करीब 2,025 करोड़ रुपये का ही डिविडेंड प्राप्त हुआ है. हालांकि जानकारों का मानना है कि वित्त वर्ष के दौरान जब बड़ी सरकारी कंपनियां अपने अंतरिम और अंतिम डिविडेंड का ऐलान करेंगी, तब सरकार की डिविडेंड आय में तेजी देखने को मिल सकती है.

सरकार को अतिरिक्त डिविडेंड से क्या फायदा होगा?

अगर सरकार को बजट अनुमान से लगभग 5,000 करोड़ रुपये अधिक डिविडेंड मिलता है, तो इससे सरकारी वित्त को अतिरिक्त सहारा मिलेगा. भले ही यह रकम सरकार के कुल वित्तीय घाटे के मुकाबले बहुत बड़ी न हो, लेकिन यदि टैक्स संग्रह उम्मीद से कम रहता है या सरकारी खर्च बढ़ता है, तो यह अतिरिक्त आय उस दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकती है. यानी यह सरकार के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है.

टैक्स पर दबाव के बीच राहत दे सकता है यह पैसा

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिससे टैक्स कलेक्शन पर असर पड़ सकता है. दूसरी ओर अगर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ सकता है. ऐसे माहौल में सरकारी कंपनियों से मिलने वाला अधिक डिविडेंड सरकार की गैर-कर आय को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है.

सरकार की कुल गैर-कर आय में कितना योगदान होगा?

बजट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार को डिविडेंड और मुनाफे के मद से कुल 3.91 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. इसमें से 75,000 करोड़ रुपये गैर-वित्तीय सरकारी कंपनियों और सरकार के अन्य निवेशों से आने की उम्मीद जताई गई है. वहीं शेष करीब 3.16 लाख करोड़ रुपये भारतीय रिजर्व बैंक, सरकारी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने का अनुमान है. अगर गैर-वित्तीय सरकारी कंपनियों से 80,000 करोड़ रुपये तक डिविडेंड मिलता है, तो यह बजट अनुमान से भी बेहतर स्थिति होगी.

अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत हैं?

अगर सरकारी कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो इसका असर सिर्फ सरकार की आय तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार की गैर-कर आय बढ़ने से बजट पर दबाव कम हो सकता है. इससे विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रखने में मदद मिलेगी और वित्तीय प्रबंधन भी अधिक संतुलित रह सकता है.यानी सरकारी कंपनियों की बेहतर कमाई का फायदा सरकार के साथ-साथ व्यापक अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है. मजबूत डिविडेंड सरकार के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने का जरिया बन सकता है और आने वाले समय में वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने में योगदान दे सकता है.