आज 8 अक्टूबर को GST Council की 57वीं बैठक होने जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में कारोबारियों और छोटे-मझोले उद्योगों के लिए जीएसटी व्यवस्था को आसान बनाने से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है. बैठक में जीएसटी की दरों में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है. लेकिन रिफंड, जीएसटी पंजीकरण, इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी, कर अपराधों, निर्यात और छोटे कारोबारियों से जुड़े नियमों में बदलाव पर अहम चर्चा हो सकती है.
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कारोबारियों के लिए जीएसटी व्यवस्था होगी आसान?
इस बैठक में जीएसटी व्यवस्था को कारोबारियों के लिए सरल और सुविधाजनक बनाने पर जोर रह सकता है. पंजीकरण से लेकर रिटर्न भरने, रिफंड लेने और इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रस्ताव सामने हैं. छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए अनुपालन का बोझ कम करने पर भी विचार हो सकता है. ऐसे कारोबारी जो सीधे ग्राहकों को सामान या सेवाएं बेचते हैं, उन्हें साल में एक बार जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अनुमति देने का प्रस्ताव चर्चा में आ सकता है.
जीएसटी अपराधों में गिरफ्तारी का प्रावधान हट सकता है
जीएसटी से जुड़े अपराधों को लेकर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है. मौजूदा व्यवस्था में गंभीर मामलों में कर अधिकारियों के पास गिरफ्तारी की शक्ति है. फर्जी बिल बनाना, गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना, गलत रिफंड का दावा करना या कर चोरी जैसे मामलों में गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है. GST Council की बैठक में ऐसे अपराधों को गंभीर आपराधिक श्रेणी से बाहर करने पर चर्चा हो सकती है. साथ ही जीएसटी कानून की धारा 69 के तहत कर अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो जीएसटी से जुड़े कानूनी मामलों में कारोबारियों के लिए बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
विदेशी कारोबार से जुड़ी सेवाओं को मिल सकती है राहत
विदेशी ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं की परिभाषा को व्यापक बनाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है. भारतीय कंपनियां कई बार विदेशी ग्राहकों के लिए इंजीनियरिंग, उत्पाद विकास और परीक्षण जैसे काम करती हैं. ऐसी सेवाओं के बदले उन्हें विदेशी मुद्रा में भुगतान मिलता है. कुछ मौजूदा नियमों के कारण ऐसी सेवाओं को घरेलू सेवा माना जाता है और उन पर 18 फीसदी जीएसटी लग सकता है. अगर इन्हें निर्यात की श्रेणी में शामिल किया जाता है, तो इन सेवाओं पर जीएसटी का बोझ खत्म हो सकता है. इस बदलाव से भारत में काम कर रहे वैश्विक क्षमता केंद्रों यानी जीसीसी को भी फायदा मिल सकता है.
10 दिन में जीएसटी रिफंड मंजूर करने का प्रस्ताव
कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी राहत जीएसटी रिफंड से जुड़ी हो सकती है. मौजूदा व्यवस्था में सरकार को कर वापसी जारी करने के लिए 60 दिन तक का समय मिलता है. अब रिफंड के दावे को 10 दिन में मंजूर करने और जोखिम की जांच के आधार पर बड़ी राशि पहले जारी करने की व्यवस्था पर विचार हो सकता है. इसके लिए करदाता के पुराने रिकॉर्ड, दाखिल किए गए रिटर्न, सीमा शुल्क और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी का स्वचालित तरीके से मिलान करने का प्रस्ताव है. इससे कम जोखिम वाले कारोबारियों को रिफंड के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
सप्लायर की गलती से नहीं अटकेगा खरीदार का रिफंड?
रिफंड से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने है. अगर किसी आपूर्तिकर्ता ने अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो उसकी गलती का असर खरीदार के रिफंड पर नहीं पड़े. इस व्यवस्था को लागू करने पर भी चर्चा हो सकती है. इसका फायदा उन कारोबारियों को मिल सकता है जिनका रिफंड किसी दूसरे कारोबारी की अनुपालन संबंधी गलती के कारण अटक जाता है.
GST पंजीकरण सिर्फ तीन दिन में?
जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया को भी तेज करने की तैयारी है. प्रस्ताव के तहत करीब 61 फीसदी करदाताओं को बिना अधिकारी की जांच के तीन कार्यदिवस में जीएसटी पंजीकरण देने पर विचार हो सकता है. बाकी आवेदकों के लिए भी प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रस्ताव है, ताकि बेवजह सवाल पूछे जाने और आवेदन खारिज होने की स्थिति कम हो. छोटे कारोबारियों के लिए यह बदलाव खास अहम हो सकता है, क्योंकि पंजीकरण जल्दी मिलने से कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है.
ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक जैसी कर व्यवस्था
ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़े नियमों में भी बदलाव की चर्चा है. प्रस्ताव का उद्देश्य यह हो सकता है कि एक जैसी सेवाओं पर अलग-अलग ई-कॉमर्स मंच अपने कारोबारी ढांचे के आधार पर अलग कर व्यवस्था लागू न कर सकें. इसके अलावा सामान पहुंचाने वाली सेवाओं पर जीएसटी की दर को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने का प्रस्ताव भी चर्चा में आ सकता है.
उद्योगों के लिए आईटीसी का दायरा बढ़ सकता है
उद्योगों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी का दायरा बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है. संयंत्र, मशीनरी, टावर और पाइपलाइन जैसी सुविधाएं लगाने पर आईटीसी का दावा करने की अनुमति देने का प्रस्ताव सामने है. इसके अलावा खराब हो चुके या जिनकी उपयोग अवधि खत्म हो चुकी है, ऐसे सामान पर भी आईटीसी से जुड़े नियमों में राहत देने पर विचार हो सकता है.
कृषि क्षेत्र के लिए कर राहत का प्रस्ताव
कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रस्ताव भी बैठक में रखे जा सकते हैं. बुवाई के लिए इस्तेमाल होने वाले बीजों के भंडारण और गोदाम सेवाओं को जीएसटी से छूट देने पर विचार हो सकता है. इसके अलावा इसबगोल के बीजों को शून्य जीएसटी दर वाली अलग श्रेणी में रखने का प्रस्ताव भी चर्चा में आ सकता है. इसमें ताजे, ठंडे, जमे हुए और सूखे इसबगोल के बीज शामिल किए जा सकते हैं. इस बदलाव का फायदा मुख्य रूप से छोटे किसानों और इस फसल से जुड़े कारोबारियों को मिल सकता है.
कर्मचारियों के समूह बीमा पर आईटीसी की सुविधा?
कंपनियों की ओर से कर्मचारियों के लिए लिए जाने वाले समूह स्वास्थ्य बीमा और समूह जीवन बीमा को लेकर भी प्रस्ताव सामने है. अभी ऐसे बीमा के प्रीमियम पर आम तौर पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है और कंपनियों को इस कर का आईटीसी लेने की सुविधा नहीं है. अब इस व्यवस्था में बदलाव करने पर विचार हो सकता है. मंजूरी मिलने पर कंपनियों के लिए कर्मचारियों के बीमा पर लगने वाले कर का बोझ कम हो सकता है.
दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर कर छूट
दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को लेकर भी राहत का प्रस्ताव है. सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आयातित दवाओं, विशेष दवाइयों और खास खाद्य पदार्थों को जीएसटी से छूट देने पर विचार किया जा सकता है. इन बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं काफी महंगी होती हैं. ऐसे में कर छूट मिलने पर मरीजों और उनके परिवारों के इलाज का खर्च कम हो सकता है.
कारोबारियों की नजर परिषद के फैसले पर
कुल मिलाकर जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में किसी बड़े कर दर बदलाव के बजाय जीएसटी व्यवस्था को आसान बनाने और कारोबारियों का अनुपालन बोझ कम करने पर ज्यादा ध्यान रहने की उम्मीद है. तेज रिफंड, आसान पंजीकरण, आईटीसी के नियम, जीएसटी अपराधों में गिरफ्तारी, निर्यात सेवाओं को राहत, ई-कॉमर्स, कृषि, बीमा और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं से जुड़े प्रस्ताव महत्वपूर्ण हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि इनमें से किन प्रस्तावों को परिषद की मंजूरी मिलती है और किन मुद्दों पर आगे विचार जारी रहता है.
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