देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक HDFC Bank ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून का बिजनेस अपडेट जारी कर दिया है. ऐसे समय में यह अपडेट आया है जब बैंक का शेयर इस साल अब तक करीब 20 फीसदी टूट चुका है और निवेशक बैंक की अगली चाल को लेकर असमंजस में हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये मजबूत बिजनेस आंकड़े HDFC Bank के शेयर में वापसी की शुरुआत का संकेत हैं, या फिर अभी भी निवेशकों को इंतजार करना होगा?
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HDFC Bank की ओर से जारी किए गए शुरुआती ऑपरेशनल आंकड़े फिलहाल सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं. बैंक की लोन बुक में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है, डिपॉजिट लगातार बढ़ रहे हैं और CASA यानी करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट में जमा राशि भी बढ़ी है. ये तीनों संकेत किसी भी बैंक के बिजनेस की मजबूती को दिखाते हैं.
बैंक के अनुसार, जून 2026 तिमाही के अंत तक उसका Gross Advances यानी कुल लोन एक साल पहले की तुलना में 15.4 फीसदी बढ़कर 30.61 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वहीं Advances Under Management बढ़कर 31.27 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो सालाना आधार पर 12.4 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है. दूसरी ओर, बैंक के कुल Deposits भी 14.7 फीसदी बढ़कर 31.71 लाख करोड़ रुपये हो गए हैं. सबसे अहम बात यह रही कि CASA Deposits भी 9.4 फीसदी बढ़कर 10.26 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए. CASA किसी भी बैंक के लिए सस्ते फंड का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी बैंक के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है.
इन आंकड़ों से यह साफ है कि HDFC Bank का मुख्य कारोबार अभी भी मजबूत बना हुआ है. बैंक लगातार नए ग्राहकों को जोड़ रहा है, लोन की मांग बनी हुई है और लोगों का भरोसा भी बैंक पर कायम है. लेकिन इसके बावजूद एक सवाल लगातार बना हुआ है कि अगर बैंक का बिजनेस इतना अच्छा चल रहा है, तो फिर उसका शेयर इस साल करीब 20 फीसदी क्यों गिर गया?
दरअसल, इसके पीछे सिर्फ बिजनेस प्रदर्शन जिम्मेदार नहीं है. मार्च 2026 में बैंक को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब उसके तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा था कि बैंक में कुछ ऐसी चीजें हो रही थीं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों से मेल नहीं खातीं. इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों के बीच कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंता बढ़ गई और शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली.
हालांकि, इसके बाद बैंक ने अपनी मैनेजमेंट टीम को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को बैंक का नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है. इसके अलावा पुनीत शर्मा को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) नियुक्त किया गया है, जबकि जिगर शाह को जनरल काउंसिल की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन नियुक्तियों को बैंक की गवर्नेंस मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
लेकिन केवल मजबूत बिजनेस अपडेट या मैनेजमेंट में बदलाव से ही शेयर में तेजी आ जाएगी, ऐसा मान लेना सही नहीं होगा. बैंकिंग सेक्टर में निवेशक सिर्फ लोन और डिपॉजिट ग्रोथ नहीं देखते, बल्कि उनकी नजर बैंक की Asset Quality, Net Interest Margin (NIM), Net Profit और सबसे महत्वपूर्ण Management Commentary पर भी रहती है.
अगर आने वाले तिमाही नतीजों में बैंक का मुनाफा उम्मीद से बेहतर रहता है, खराब लोन नियंत्रण में दिखाई देते हैं और मैनेजमेंट भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत देता है, तो बाजार इन मजबूत बिजनेस आंकड़ों को शेयर के लिए सकारात्मक ट्रिगर के रूप में देख सकता है. वहीं अगर इनमें कमजोरी दिखती है, तो केवल ऑपरेशनल ग्रोथ शेयर को ऊपर ले जाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी.
फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि HDFC Bank का मूल कारोबार मजबूत बना हुआ है. बैंक की लोन ग्रोथ दो अंकों में है, डिपॉजिट लगातार बढ़ रहे हैं और CASA बेस भी मजबूत बना हुआ है. हालांकि, शेयर की अगली दिशा अब बैंक के विस्तृत वित्तीय नतीजों और मैनेजमेंट के आउटलुक पर निर्भर करेगी. ऐसे में सोमवार को बाजार की नजर सिर्फ एक सवाल पर रहेगी—क्या HDFC Bank का यह मजबूत बिजनेस अपडेट उसके शेयर की किस्मत भी बदल पाएगा?
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