भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank के शेयरों में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। बैंक का जून तिमाही (Q1 FY27) का रिजल्ट आने के बाद शेयर करीब 5% टूटकर 780 रुपये तक पहुंच गया। दिलचस्प बात यह है कि बैंक का मुनाफा बढ़ा है, फिर भी निवेशकों ने शेयर बेचने शुरू कर दिए। सवाल है कि ऐसा क्यों हुआ? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
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मुनाफा बढ़ा, लेकिन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा
अप्रैल-जून 2026 तिमाही में HDFC Bank का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 5% बढ़कर 19,060 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी तिमाही में बैंक ने 18,155 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। वहीं बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) यानी लोन पर कमाए गए ब्याज और जमा पर दिए गए ब्याज का अंतर 7% बढ़कर 33,534 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, बाजार को इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। यही वजह रही कि अच्छे नतीजों के बावजूद शेयर में बिकवाली देखने को मिली।
आखिर निवेशकों को क्या नहीं आया पसंद?
बाजार की सबसे बड़ी चिंता Net Interest Margin (NIM) रही। NIM बैंक की कमाई का अहम पैमाना होता है। इस तिमाही में HDFC Bank का NIM घटकर 3.26% रह गया, जो पिछली तिमाही से 12 बेसिस प्वाइंट कम है। विश्लेषकों का मानना है कि यही सबसे बड़ा कारण रहा, जिसकी वजह से निवेशकों ने रिजल्ट के बाद शेयर बेच दिए।
ब्रोकरेज हाउस क्या कह रहे हैं?
Motilal Oswal ने HDFC Bank पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है और 2,050 रुपये का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि बैंक का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक रहा, लेकिन NIM में कमजोरी जरूर देखने को मिली। ब्रोकरेज का मानना है कि अगले दो साल में बैंक के महंगे उधार (High-Cost Borrowings) धीरे-धीरे खत्म होंगे। इससे फंडिंग की लागत कम होगी और NIM में सुधार देखने को मिल सकता है। वहीं JM Financial ने भी बैंक पर Add रेटिंग बनाए रखी है और 900 रुपये का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, फिलहाल बैंक की लोन ग्रोथ पर कुछ दबाव है, लेकिन आने वाले समय में मार्जिन सुधर सकता है। साथ ही बैंक की मजबूत एसेट क्वालिटी भविष्य में मदद करेगी।
एसेट क्वालिटी कैसी रही?
बैंक की ग्रॉस NPA यानी खराब कर्ज 35,846 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल के मुकाबले कम है।
- Gross NPA Ratio: 1.17%
- Net NPA Ratio: 0.41%
हालांकि Net NPA में पिछली तिमाही के मुकाबले हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कुल मिलाकर बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है।
प्रोविजनिंग में बड़ी गिरावट
बैंक ने इस तिमाही में 3,060 करोड़ रुपये की प्रोविजनिंग की, जो पिछले साल की तुलना में 79% कम है। हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली।
अब निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
बाजार की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाली तिमाहियों में HDFC Bank का NIM सुधरता है या नहीं। अगर बैंक की फंडिंग कॉस्ट कम होती है और मार्जिन बेहतर होता है, तो शेयर में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, नतीजे ठीक रहे हैं, लेकिन बाजार की उम्मीदें इससे कहीं ज्यादा थीं। यही वजह है कि मुनाफा बढ़ने के बावजूद HDFC Bank के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
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