दुनिया की आर्थिक ताकत तेजी से बदल रही है. एक वक्त था जब स्विट्जरलैंड को दुनिया का सबसे बड़ा वेल्थ हब माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. हांगकांग तेजी से दुनिया का नया गोल्ड और निवेश केंद्र बनता जा रहा है. चीन से आने वाला पैसा, बढ़ती गोल्ड खरीदारी और एशिया की मजबूत होती अर्थव्यवस्था ने हांगकांग को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. अब सवाल ये है कि आखिर हांगकांग इतना मजबूत कैसे हो रहा है? चीन इसमें क्या भूमिका निभा रहा है? और इसका असर भारत और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ सकता है? आज सोना-चांदी के इस शो में हम इन्हीं सब सवालों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं.
ADVERTISEMENT
चीन में सोने की मांग में रिकॉर्ड उछाल
चीन में सोने की खरीदारी में हाल के दिनों में बड़ा उछाल आया है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चीन ने अप्रैल महीने में हांगकांग के जरिए रिकॉर्ड 86.7 टन सोना आयात किया. वहीं मार्च में ये आंकड़ा महज 47.8 टन था, यानी सिर्फ एक महीने के भीतर चीन के गोल्ड इम्पोर्ट में 81% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है. चीन में लोग आखिर इतना ज्यादा सोना क्यों खरीद रहे हैं, इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं. दरअसल, चीन के बड़े बैंकों ने गोल्ड निवेश को काफी आसान बना दिया है. बैंकों ने ट्रेडिंग फीस कम की है और रात में भी ट्रेडिंग की विशेष सुविधा शुरू की है, जिससे लोग अब देर रात तक भी आसानी से गोल्ड की खरीद-बिक्री कर सकते हैं.
चीनी बैंकों के आकर्षक ऑफर और सुरक्षित निवेश बना वजह
चीन के कई बड़े सरकारी और निजी बैंकों, जैसे ICBC, China Construction Bank, Bank of China और China Merchants Bank ने गोल्ड निवेश के नियमों को बहुत लचीला कर दिया है. कुछ बैंकों ने तो अपनी फीस में 50% तक की भारी छूट दी है और गोल्ड खरीदने पर विशेष ऑफर्स भी पेश किए हैं, जिससे आम निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस वक्त चीन में बैंक जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) पर ब्याज दरें बेहद कम मिल रही हैं, शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल है और अच्छे निवेश के विकल्प भी सीमित हैं. ऐसी स्थिति में चीनी नागरिक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश मान रहे हैं, यही वजह है कि वहां गोल्ड की मांग लगातार आसमान छू रही है.
भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों का ताजा हाल
चीन की इस भारी मांग के बीच, आइए अब भारत में सोने-चांदी की कीमतों पर एक नजर डाल लेते हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 29 मई को, 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना दोपहर करीब 12 बजे 284 रुपये की गिरावट के साथ 1,60,619 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं दूसरी ओर, 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 1514 रुपये की बड़ी गिरावट के साथ 2,68,023 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी.
स्विट्जरलैंड को पछाड़कर नंबर-1 बना हांगकांग
इस बीच एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. प्रसिद्ध ग्लोबल फर्म 'बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप' (BCG) की रिपोर्ट के मुताबिक, इतिहास में पहली बार हांगकांग दुनिया का सबसे बड़ा 'क्रॉस-बॉर्डर वेल्थ हब' बन गया है और उसने इस मामले में सालों से बादशाहत कायम रखने वाले स्विट्जरलैंड को पीछे छोड़ दिया है. सरल शब्दों में कहें तो 'क्रॉस-बॉर्डर वेल्थ हब' वह देश या शहर होता है, जहां दुनिया भर के अमीर लोग और बड़ी कंपनियां अपने पैसे को सुरक्षित रखने, निवेश करने और एसेट मैनेजमेंट के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते हैं. अब दुनिया का ऐसा सबसे बड़ा केंद्र आधिकारिक रूप से हांगकांग बन चुका है.
एशिया की बढ़ती ताकत और दो धड़ों में बंटता वैश्विक वेल्थ नेटवर्क
जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि हांगकांग की इस ऐतिहासिक सफलता की सबसे बड़ी वजह पड़ोसी देश चीन है. चीन के बड़े निवेशक, कॉर्पोरेट कंपनियां और अरबपति परिवार अब यूरोपीय देशों के बजाय बड़ी मात्रा में अपनी संपत्ति हांगकांग में ला रहे हैं. इसी के साथ एशिया दुनिया का नया वित्तीय केंद्र बनकर उभर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब दुनिया दो बड़े वेल्थ नेटवर्क में बंटती जा रही है; पहला नेटवर्क पूरी तरह एशियाई देशों का है जिसमें हांगकांग, सिंगापुर, चीन, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया शामिल हैं, जबकि दूसरा पारंपरिक नेटवर्क स्विट्जरलैंड, अमेरिका और ब्रिटेन का है. यह साफ दिखाता है कि वैश्विक वित्तीय ताकत अब पश्चिम से पूर्व (एशिया) की ओर तेजी से शिफ्ट हो रही है.
भारत की मजबूत स्थिति: 2030 तक वेल्थ क्रिएशन में मारेगा बाजी
इस पूरे बदलाव में भारत की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट कहती है कि साल 2030 तक दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं करीब 7 ट्रिलियन डॉलर की नई संपत्ति जोड़ सकती हैं, और इस वेल्थ क्रिएशन की रेस में भारत, ब्राजील और मेक्सिको सबसे आगे रहने वाले हैं. कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है कि चीन की बढ़ती गोल्ड खरीदारी और एशिया में बढ़ती अमीरी ने वैश्विक आर्थिक नक्शे को पूरी तरह बदल दिया है. दूसरी तरफ, भारत भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है और आने वाले सालों में वैश्विक वेल्थ ग्रोथ का एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत से ही आने वाला है.
ADVERTISEMENT


