निजी क्षेत्र की जनरल इंश्योरेंस कंपनी ICICI Lombard General Insurance के लिए जून तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके. कमजोर प्रदर्शन के बाद गुरुवार को कंपनी के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली और कारोबार के दौरान शेयर करीब 13% तक टूट गया. नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज हाउस ने भी कंपनी के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई और अपने अनुमान में बदलाव किया.
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कंपनी का मुनाफा पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में लगभग आधा रह गया. वहीं, बढ़ते क्लेम, फायर इंश्योरेंस में बड़े नुकसान और निवेश से होने वाली कम आय का असर सीधे कंपनी की कमाई पर दिखाई दिया.
पहली तिमाही में 46% घटा मुनाफा.
ICICI Lombard ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 403 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा (PAT) दर्ज किया. पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 747 करोड़ रुपये था. इस तरह सालाना आधार पर कंपनी के मुनाफे में 46% की गिरावट दर्ज की गई.
हालांकि, कंपनी की कुल आय में बढ़ोतरी हुई. जून तिमाही में कुल आय बढ़कर 6,813 करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 6,083 करोड़ रुपये थी. यानी कारोबार बढ़ा, लेकिन बढ़ते खर्च और क्लेम का दबाव कमाई पर भारी पड़ गया.
किन वजहों से कमजोर रहे नतीजे?
कंपनी के मुताबिक, इस तिमाही में कई ऐसे कारक रहे जिन्होंने मुनाफे पर सीधा असर डाला.
- फायर इंश्योरेंस से जुड़े दो बड़े क्लेम सामने आए.
- मोटर थर्ड पार्टी (Motor TP) मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ा.
- क्लेम भुगतान में तेज बढ़ोतरी हुई.
- निवेश से मिलने वाली आय उम्मीद से कम रही.
इन सभी कारणों का संयुक्त असर कंपनी के मुनाफे पर दिखाई दिया.
प्रीमियम बढ़ा, लेकिन इंडस्ट्री से पीछे रही कंपनी.
जून तिमाही में कंपनी की ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) बढ़कर 8,318 करोड़ रुपये रही. यह पिछले साल की तुलना में 7.5% की वृद्धि है.
हालांकि, यह वृद्धि पूरे इंश्योरेंस सेक्टर की 10.9% की औसत ग्रोथ से कम रही. यानी कंपनी का कारोबार बढ़ा जरूर, लेकिन उद्योग की तुलना में उसकी रफ्तार धीमी रही.
क्लेम भुगतान में आया बड़ा उछाल.
तिमाही के दौरान कंपनी ने 3,516 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान किया. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 21% अधिक है.
इसके अलावा, फायर इंश्योरेंस से जुड़े दो बड़े मामलों में कंपनी को लगभग 63 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. वहीं, मोटर थर्ड पार्टी मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भविष्य के दावों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने 165 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान भी किया.
यही वजह रही कि कंपनी की लाभप्रदता पर दबाव और बढ़ गया.
क्यों बढ़ी निवेशकों की चिंता?
कंपनी का Combined Ratio बढ़कर 107.2% पहुंच गया, जबकि पिछली तिमाही में यह 101.2% था. सरल भाषा में समझें तो Combined Ratio यह बताता है कि कंपनी प्रीमियम से जितनी कमाई कर रही है, उसके मुकाबले क्लेम और ऑपरेटिंग खर्च कितना है. यदि यह आंकड़ा 100% से ऊपर चला जाता है, तो इसका मतलब होता है कि कंपनी के खर्च उसकी अंडरराइटिंग आय से ज्यादा हो गए हैं. 107.2% का Combined Ratio इस बात का संकेत है कि इस तिमाही में इंश्योरेंस बिजनेस पर लागत का दबाव काफी बढ़ गया.
ब्रोकरेज हाउस ने क्या कहा?
कमजोर नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी के प्रदर्शन पर अपनी राय दी.
Motilal Oswal Financial Services ने कंपनी की रेटिंग घटाकर 'Neutral' कर दी और शेयर का 1,960 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया. ब्रोकरेज का मानना है कि कमजोर अंडरराइटिंग प्रदर्शन और अपेक्षा से कम निवेश आय के कारण मुनाफे में बड़ी गिरावट आई.
Emkay Global ने भी शेयर का लक्ष्य मूल्य घटाकर 1,900 रुपये कर दिया. हालांकि, उसने 'Add' रेटिंग बरकरार रखी. ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी को फिलहाल कड़ी प्रतिस्पर्धा और चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल का सामना करना पड़ रहा है.
वहीं, Nuvama ने भी निवेश आय कमजोर रहने का हवाला देते हुए FY27 और FY28 के मुनाफे के अनुमान में कटौती की है.
शेयर में क्यों आई तेज गिरावट?
तिमाही नतीजों के बाद बाजार की प्रतिक्रिया काफी नकारात्मक रही. कमजोर मुनाफा, बढ़ते क्लेम, अतिरिक्त प्रावधान और ब्रोकरेज की सतर्क टिप्पणी के चलते निवेशकों ने शेयर में बिकवाली की.
इसी का असर यह हुआ कि गुरुवार के कारोबार के दौरान ICICI Lombard का शेयर करीब 13% तक टूटकर लगभग 1,590 रुपये के स्तर पर पहुंच गया.
फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाली तिमाहियों में कंपनी बढ़ते क्लेम, लागत के दबाव और प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी लाभप्रदता को किस तरह बेहतर बनाती है.
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