IDBI बैंक को मिला खरीदार! 53,000 करोड़ रुपये की मेगा डील से सरकार और LIC बेचेंगे 60% से ज्यादा हिस्सेदारी

तनीषा त्यागी

• 11:23 AM • 15 Jul 2026

IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बिक्री की 53,000 करोड़ रुपये की बड़ी डील अब अंतिम दौर में है. फेयरफैक्स 81 रुपये प्रति शेयर के नए ऑफर के साथ सबसे आगे है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

फेयरफैक्स को IDBI बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए चुना गया

सरकार और LIC मिलकर कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में

IDBI बैंक के लिए फेयरफैक्स की ₹53,000 करोड़ की डील

भारतीय बैंकिंग की सबसे बड़ी विदेशी डील बन सकती है

डील पर RBI और CCI की मंजूरी अभी बाकी

लंबे समय से जिस खरीदार की तलाश सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) कर रहे थे, वह अब लगभग पूरी होती नजर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक कनाडा की निवेश कंपनी फेयरफैक्स होल्डिंग्स (Fairfax Holdings) को IDBI बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए चुना गया है. हालांकि इस पूरे सौदे की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सरकार और कंपनी के बीच सहमति बनने की बात सामने आई है. अगर यह सौदा तय शर्तों के मुताबिक पूरा होता है, तो इसका आकार करीब 53,000 करोड़ रुपये होगा. यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जाएगा.

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सरकार और LIC बेचेंगे 60.72% हिस्सेदारी

फिलहाल IDBI बैंक में सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 95% है. सरकार के पास बैंक में 45.48% हिस्सेदारी है, जबकि LIC के पास 50% से थोड़ी कम हिस्सेदारी मौजूद है. योजना के मुताबिक सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC 30.24% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. यानी दोनों मिलकर कुल 60.72% हिस्सेदारी निवेशक को सौंपेंगे. इस हिस्सेदारी बिक्री के बाद बैंक का नियंत्रण नए निवेशक के पास चला जाएगा.

फेयरफैक्स ने बढ़ाया ऑफर

मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक फेयरफैक्स ने अपनी वित्तीय बोली पहले के मुकाबले बेहतर कर दी है. कंपनी अब IDBI बैंक के लिए 81 रुपये प्रति शेयर का ऑफर दे रही है. इससे पहले उसने 75 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाई थी. नई कीमत के आधार पर सरकार केवल अपनी हिस्सेदारी बेचकर लगभग 26,620 करोड़ रुपये जुटा सकती है. वहीं LIC को भी अपनी हिस्सेदारी बेचने से लगभग 26,440 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. दोनों को मिलाकर डील का कुल आकार करीब 53,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.

मार्च में रुक गई थी पूरी प्रक्रिया

IDBI बैंक के लिए खरीदार चुनने की प्रक्रिया पहले भी शुरू हुई थी. फरवरी में फेयरफैक्स होल्डिंग्स और एमिरेट्स NBD दोनों ने बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली लगाई थी. लेकिन मार्च में सरकार ने बिक्री प्रक्रिया रोक दी थी क्योंकि प्राप्त वित्तीय बोलियां तय रिजर्व प्राइस से कम थीं. इसके बाद बोली प्रक्रिया पर दोबारा काम हुआ और फेयरफैक्स ने अपना ऑफर बढ़ाया. अब संशोधित बोली के बाद सरकार ने उसे प्राथमिकता देने का फैसला किया है.

घोषणा कभी भी हो सकती है

सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय में मंगलवार को हुई बैठकों के बाद इस सौदे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया. बताया जा रहा है कि मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह को संशोधित बोली और पूरी प्रक्रिया की जानकारी दे दी गई है. इस समूह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल हैं. अब जल्द ही औपचारिक नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है. इसके बाद 'लेटर ऑफ इंटेंट' जारी होगा और फिर शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. हालांकि अभी तक सरकार, फेयरफैक्स या LIC की ओर से अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

RBI और अन्य रेगुलेटरी मंजूरियां जरूरी

डील पर सहमति बनने के बाद भी प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होगी. सफल बोली लगाने वाली कंपनी को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 'फिट एंड प्रॉपर' जांच से गुजरना होगा. इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नया निवेशक बैंकिंग कारोबार संभालने के लिए सभी नियामकीय मानकों पर खरा उतरता है. इसके अलावा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) सहित अन्य कानूनी और रेगुलेटरी मंजूरियां भी लेनी होंगी. इन सभी मंजूरियों के बाद ही हिस्सेदारी हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी.

शेयर बाजार में दिखा असर

डील की खबर सामने आने के बाद निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ी. मंगलवार को NSE पर IDBI बैंक का शेयर 86.54 रुपये पर बंद हुआ, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले लगभग 2.9% की बढ़त दर्शाता है. गौर करने वाली बात यह भी है कि 31 मार्च को शेयर अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर 61.01 रुपये पर था. वहां से अब तक इसमें करीब 42% की तेजी आ चुकी है. हालांकि बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए जवाब में कहा कि वह विनिवेश से जुड़ी खबरों की न तो पुष्टि कर सकता है और न ही उनका खंडन.

CSB बैंक की हिस्सेदारी भी बनी चर्चा का विषय

फेयरफैक्स की भारतीय इकाई के पास पहले से ही CSB बैंक में लगभग 40% हिस्सेदारी है. ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भविष्य में दोनों बैंकों के संचालन को लेकर अलग व्यवस्था बनानी पड़ सकती है. इस संबंध में अंतिम फैसला नियामकीय मंजूरियों के बाद ही संभव होगा.

2019 में LIC ने संभाली थी कमान

साल 2019 में LIC ने लगभग 21,624 करोड़ रुपये खर्च कर IDBI बैंक में 51% हिस्सेदारी खरीदी थी. उसके बाद बैंक को प्राइवेट सेक्टर बैंक का दर्जा मिला था. अब अगर मौजूदा डील पूरी होती है तो LIC अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा बेचकर लगभग 26,440 करोड़ रुपये हासिल कर सकती है.

सरकार के एसेट मोनेटाइजेशन लक्ष्य को मिलेगा सहारा

सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में एसेट मोनेटाइजेशन और हिस्सेदारी बिक्री के जरिए 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. अब तक सरकार लगभग 20,272 करोड़ रुपये जुटा चुकी है. अगर IDBI बैंक की यह 53,000 करोड़ रुपये की डील पूरी हो जाती है तो सरकार अपने लक्ष्य के काफी करीब पहुंच जाएगी.

क्या होगा इस डील का महत्व

अगर यह सौदा अंतिम रूप लेता है तो यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश बन जाएगा. यह डील सिर्फ IDBI बैंक के स्वामित्व में बदलाव तक सीमित नहीं होगी, बल्कि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम, बैंकिंग सेक्टर में विदेशी निवेश और एसेट मोनेटाइजेशन रणनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है. फिलहाल बाजार की नजर आधिकारिक घोषणा और उसके बाद मिलने वाली रेगुलेटरी मंजूरियों पर बनी हुई है.