दुनियाभर में जब भी मंदी, युद्ध या आर्थिक संकट आता है, तो आंख बंद करके Gold को सबसे सुरक्षित ठिकाना (Safe Haven Asset) माना जाता है. लेकिन अब वैश्विक वित्तीय संस्था अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक ऐसी रिपोर्ट जारी की है, जिसने पूरी दुनिया के केंद्रीय बैंकों और सोने के प्रेमियों को चौंका दिया है.IMF का कहना है कि केंद्रीय बैंकों को सोने को 'सुरक्षित' मानना बंद करना चाहिए और इसे एक 'हाई-रिस्क' (उच्च जोखिम वाले) एसेट की कैटेगरी में डालना चाहिए.
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IMF ने सोने को 'खतरनाक' क्यों बताया?
9 जुलाई को जारी अपने एक पेपर में IMF ने तर्क दिया है कि सोने में निवेश करना उतना सुरक्षित नहीं है जितना लोग समझते हैं। इसके पीछे उन्होंने तीन बड़े कारण बताए हैं
- सोने की कीमतें बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं
- शेयर्स या सरकारी बॉन्ड की तरह सोने पर कोई ब्याज (Interest) या डिविडेंड नहीं मिलता
- सोने को खरीदने, उसे सुरक्षित रखने (Vaults) और उसका हिसाब-किताब रखने में केंद्रीय बैंकों का बहुत पैसा खर्च होता है
अफ्रीका के देशों में मचा हड़कंप
यूरोप या अमेरिका के लिए भले ही यह सिर्फ कागजी नियम बदलने जैसा हो, लेकिन घाना, माली और दक्षिण अफ्रीका जैसे सोने का उत्पादन करने वाले अफ्रीकी देशों के लिए यह बहुत बड़ा झटका है.ये देश अपने यहाँ से निकलने वाले सोने को अपनी ही घरेलू करेंसी (Local Currency) में खरीदकर अपना विदेशी मुद्रा भंडार (Reserves) मजबूत करते हैं. इससे उन्हें डॉलर या यूरो खरीदने के लिए अपनी तिजोरी खाली नहीं करनी पड़ती. अगर ये देश IMF की बात मानकर सोने की खरीदारी कम करते हैं, तो इन्हें मजबूरन फिर से अमेरिकी डॉलर और यूरो जैसी विदेशी करेंसी पर निर्भर होना पड़ेगा.
डॉलर का दबदबा Vs सोने की ताकत
भले ही दुनिया में 'डी-डॉलरलाइजेशन' की कितनी भी बातें की जाएं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि आज भी दुनिया के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 57% हिस्सा अमेरिकी डॉलर और 20% हिस्सा यूरो में है. चीनी युआन अभी भी 2% से नीचे है.डॉलर के दबदबे का कारण यह है कि डॉलर रखने पर बैंकों को ब्याज मिलता है और संकट के समय इसे तुरंत कैश कराया जा सकता है. लेकिन हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह रूसी संपत्तियों को फ्रीज किया गया, उसने केंद्रीय बैंकों को डरा दिया है. सोना एकमात्र ऐसा एसेट है जिस पर किसी दूसरे देश का नियंत्रण नहीं होता और इसे कोई भी देश 'फ्रीज' नहीं कर सकता.
सोना दुनिया का सबसे बड़ा Reserve Asset कैसे बना?
सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भी केंद्रीय बैंकों के रिजर्व में इसकी हिस्सेदारी बढ़ा दी है.2025 में सोना आधिकारिक रिजर्व में अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज से आगे निकल गया. यह बदलाव काफी हद तक सोने की कीमत बढ़ने की वजह से हुआ, न कि केवल केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी के कारण.यानी केंद्रीय बैंकों के पास पहले से मौजूद सोने की कीमत बढ़ी और उसके साथ कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी भी बढ़ गई.
घाना का उदाहरण: फायदा भी और नुकसान भी
घाना ने अपने घरेलू गोल्ड प्रोग्राम के जरिए साल 2024 में $3.6 बिलियन का स्थानीय सोना खरीदा, जिससे उसका विदेशी मुद्रा भंडार $6.4 बिलियन से बढ़कर $7.6 बिलियन हो गया.
IMF का कहना है कि इस प्रोग्राम की वजह से वहां के केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट कमजोर हुई है और पारदर्शिता में कमी आई है. यही वजह है कि IMF इस तरह के प्रोग्राम्स को बंद या कम करने की सलाह दे रहा है.
अफ्रीका का खुद का 'गोल्ड बैंक'
IMF की इस सलाह के बीच अफ्रीकी देशों ने अपनी संप्रभुता और आर्थिक आजादी की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है.
अफ्रीका का नया प्लान
1. BEAC का PAPSS में शामिल होना: 28 देशों के 190 बैंकों को जोड़ा गया ताकि बिना विदेशी बैंकों के आपसी व्यापार हो सके
2. पैन-अफ्रीकी गोल्ड बैंक (Pan-African Gold Bank): Afreximbank इस साल के अंत तक एक महाद्वीपीय गोल्ड बैंक और रिफाइनरी बनाने जा रहा है जो 2027-2028 तक चालू हो जाएगी
वर्तमान में अफ्रीका के सोने का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 15%) दुबई के रास्ते होकर जाता है, जिससे अवैध सोने के कारोबार और टेरर फंडिंग (जैसे सूडान और मध्य अफ्रीकी गणराज्य में) की आशंका बनी रहती है.
सोने में रिस्क है
IMF सोने को केवल नफा-नुकसान के चश्मे से देख रहा है, जबकि अफ्रीकी देशों के लिए सोना सिर्फ एक निवेश नहीं बल्कि उनकी आर्थिक आजादी और ताकत का जरिया है। भले ही शॉर्ट टर्म में सोने में उतार-चढ़ाव का जोखिम हो, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) को देखते हुए केंद्रीय बैंकों का सोने के प्रति आकर्षण इतनी आसानी से कम होने वाला नहीं है.
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