दुनिया इस वक्त कई बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है. कहीं युद्ध का माहौल है, कहीं ट्रेड वॉर का असर दिखाई दे रहा है, तो कहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है. ऐसे माहौल में अगर कोई बड़ी अर्थव्यवस्था लगातार तेज रफ्तार से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, तो वह भारत है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी IMF ने अपने ताजा World Economic Outlook में भारत को लेकर भरोसा जताया है और कहा है कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है.
ADVERTISEMENT
कैलेंडर ईयर 2026 में 7% तक पहुंच सकती है भारत की GDP ग्रोथ
IMF के मुताबिक कैलेंडर ईयर 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 7 फीसदी की दर से बढ़ सकती है. ऐसे समय में जब दुनिया के कई बड़े देशों की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है, भारत की यह ग्रोथ उसे वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की कतार में खड़ा करती है. यही वजह है कि भारत की आर्थिक क्षमता को लेकर दुनिया भर की नजरें बनी हुई हैं.
IMF ने दो अलग-अलग आधारों पर जारी किए अनुमान
भारत को लेकर IMF ने दो तरह के ग्रोथ अनुमान जारी किए हैं. पहला कैलेंडर ईयर के आधार पर और दूसरा भारत के वित्त वर्ष यानी अप्रैल से मार्च के आधार पर. अगर वित्त वर्ष 2026-27 की बात करें, तो IMF ने GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5 फीसदी से मामूली घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया है. हालांकि अगले वित्त वर्ष 2027-28 के लिए अनुमान पहले से ज्यादा मजबूत दिखाई देता है. IMF ने अगले वित्त वर्ष की ग्रोथ का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है. इसका मतलब है कि संस्था को भरोसा है कि भारत की आर्थिक रफ्तार आगे और मजबूत हो सकती है.
आखिर भारत की ग्रोथ इतनी मजबूत क्यों बनी हुई है?
IMF का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी घरेलू मांग है. देश के भीतर लोगों का खर्च लगातार मजबूत बना हुआ है. निजी खपत यानी प्राइवेट कंजम्प्शन अच्छी स्थिति में है और सर्विस सेक्टर भी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है. यही दोनों कारक भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं. यानी वैश्विक हालात चाहे जैसे भी हों, भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां उसकी विकास दर को सहारा दे रही हैं. यही वजह है कि भारत की ग्रोथ बाकी कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है.
दुनिया की रफ्तार धीमी, लेकिन भारत की चाल तेज
IMF का अनुमान है कि साल 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर करीब 3 फीसदी रह सकती है. यानी पूरी दुनिया की आर्थिक रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रहने की संभावना है. इसके मुकाबले भारत करीब दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है. यह अंतर बताता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में बनी हुई है.
वैश्विक ग्रोथ पर क्यों बना हुआ है दबाव?
रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. इन परिस्थितियों ने आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बनाया है. हालांकि दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वजह से टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश और मांग तेजी से बढ़ी है. IMF का मानना है कि AI से पैदा हुई नई आर्थिक गतिविधियों ने युद्ध के नकारात्मक असर को काफी हद तक संतुलित करने में मदद की है.
चीन और अमेरिका की तुलना में भारत आगे
अगर दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से तुलना करें तो तस्वीर और साफ हो जाती है. IMF के मुताबिक चीन की अर्थव्यवस्था इस साल करीब 4.6 फीसदी की दर से बढ़ सकती है, जबकि अगले साल यह घटकर 4.1 फीसदी रह सकती है. वहीं अमेरिका की आर्थिक वृद्धि इस साल 2.3 फीसदी और अगले साल 2.2 फीसदी रहने का अनुमान है. यूरोप की अर्थव्यवस्था की रफ्तार इससे भी कमजोर रहने की उम्मीद है. इन अनुमानों के आधार पर भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत ग्रोथ वाला देश बना हुआ है.
भारत की ग्रोथ की तारीफ कर चुके हैं डोनाल्ड ट्रंप
भारत की आर्थिक रफ्तार की चर्चा सिर्फ IMF तक सीमित नहीं है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी भारत की तेज आर्थिक वृद्धि की तारीफ कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि अगर भारत 7 से 8 फीसदी की ग्रोथ हासिल कर सकता है, तो अमेरिका के लिए भी यह एक बेंचमार्क हो सकता है. ट्रंप के मुताबिक अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें विकास की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं.
दूसरी संस्थाओं का भी भारत पर भरोसा
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सिर्फ IMF ही सकारात्मक नहीं है. कई दूसरी प्रमुख संस्थाओं ने भी भारत के लिए मजबूत विकास दर का अनुमान लगाया है. विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है और अगले वित्त वर्ष में इसे 7.2 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद जताई है. संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत की विकास दर 6.4 फीसदी रहने का अनुमान दिया है.
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए 6.6 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान रखा है. हालांकि RBI का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, सप्लाई चेन में रुकावट और मौसम से जुड़े जोखिम अभी भी भारत के सामने बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं. वहीं Bank of America का अनुमान है कि वर्ष 2026 में भारत 7 फीसदी की ग्रोथ हासिल कर सकता है. Goldman Sachs ने भी अपने अनुमान को बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है.
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर किसी देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो उसका असर धीरे-धीरे आम लोगों तक भी पहुंचता है. मजबूत आर्थिक विकास से कंपनियों का कारोबार बढ़ता है, निवेश में तेजी आती है, नई नौकरियों के अवसर पैदा होते हैं और सरकार की टैक्स आय भी बढ़ती है. लंबे समय में इससे शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है. हालांकि सिर्फ अच्छी GDP ग्रोथ का मतलब यह नहीं कि सभी चुनौतियां खत्म हो गई हैं. महंगाई, रोजगार, वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें आने वाले समय में भारत की आर्थिक रफ्तार को प्रभावित करने वाले अहम कारक बने रहेंगे.
आगे क्या?
IMF की ताजा रिपोर्ट यह संकेत देती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है. घरेलू मांग, सर्विस सेक्टर और लगातार आर्थिक गतिविधियां भारत की ग्रोथ को सहारा दे रही हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या भारत आने वाले वर्षों में भी इसी रफ्तार को बनाए रख पाता है और 7 फीसदी या उससे अधिक की आर्थिक वृद्धि हासिल कर पाता है.
ADVERTISEMENT

