Explained: क्या अब ATM से मिलेगा बायोफ्यूल? E20 के बाद इथेनॉल ATM, कुकिंग फ्यूल और एविएशन तक पहुंचा भारत का नया प्लान

तनीषा त्यागी

• 10:35 AM • 21 Jul 2026

E20 लागू होने के बाद भारत इथेनॉल ATM, कुकिंग फ्यूल, एक्सपोर्ट और एविएशन फ्यूल जैसे नए रास्तों पर तेजी से काम कर रहा है. जानिए आगे की पूरी रणनीति.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

भारत की इथेनॉल क्षमता 20 अरब लीटर पार कर चुकी है

चालू वर्ष में कुल क्षमता करीब 24 अरब लीटर पहुंच सकती है

E20 कार्यक्रम सालाना लगभग 11 अरब लीटर इथेनॉल की खपत करता है

भारत की इथेनॉल पॉलिसी अब सिर्फ पेट्रोल में ब्लेंडिंग तक सीमित नहीं रह गई है. E20 लक्ष्य समय से पहले हासिल करने के बाद सरकार अब इथेनॉल के नए इस्तेमाल तलाशने में जुटी है. कुकिंग फ्यूल के तौर पर इथेनॉल, इथेनॉल ATM, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) और एक्सपोर्ट जैसे कई विकल्पों पर गंभीरता से काम किया जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता मौजूदा मांग से कहीं ज्यादा हो चुकी है और अब इस अतिरिक्त क्षमता का बेहतर उपयोग करना जरूरी हो गया है.

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E20 के बाद अब क्या है सरकार का अगला फोकस?

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को तेजी से बढ़ाया. एक समय जहां ब्लेंडिंग का स्तर करीब 1.5 फीसदी था, वहीं अब देशभर में E20 लागू किया जा चुका है. इस उपलब्धि ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और बायोफ्यूल इंडस्ट्री को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन E20 लक्ष्य हासिल होने के बाद अब सरकार की चुनौती बदल गई है. पहले लक्ष्य पर्याप्त इथेनॉल तैयार करना था, जबकि अब लक्ष्य उसके लिए नए उपयोग और नए बाजार तैयार करना है.

इथेनॉल ATM का क्या है पूरा आइडिया?

सरकार जिस नए मॉडल पर विचार कर रही है, उसमें इथेनॉल को सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रखा जाएगा. योजना यह है कि भविष्य में खास इथेनॉल ATM बनाए जाएं, जहां से लोग अपने कुकिंग स्टोव के लिए कनस्तरों में इथेनॉल खरीद सकें. अगर यह मॉडल लागू होता है तो देश में पहली बार इथेनॉल का एक अलग रिटेल नेटवर्क तैयार होगा. यानी जिस तरह आज पेट्रोल पंप से ईंधन मिलता है, उसी तरह भविष्य में घरेलू इस्तेमाल के लिए इथेनॉल भी उपलब्ध कराया जा सकता है. यह योजना अभी शुरुआती विचार के स्तर पर है, लेकिन इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार इथेनॉल को केवल पेट्रोल में मिलाने वाले ईंधन के बजाय एक स्वतंत्र ऊर्जा स्रोत के रूप में विकसित करना चाहती है.

अचानक कुकिंग फ्यूल क्यों बना चर्चा का विषय?

भारत में करोड़ों घर खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडर पर निर्भर हैं. घरेलू उत्पादन बढ़ने के बावजूद देश को बड़ी मात्रा में LPG आयात करनी पड़ती है. ऐसे में अगर इथेनॉल को खाना पकाने के ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है. साथ ही किसानों, डिस्टिलरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया बाजार मिल सकता है. सरकार की नजर में यह केवल एक नया ईंधन नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का एक विकल्प भी हो सकता है.

इथेनॉल उत्पादन अब मांग से ज्यादा क्यों हो गया है?

इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा मिलने के बाद देशभर में डिस्टिलरी क्षमता में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ. कई चीनी मिलों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन भी तेजी से बढ़ा. केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता सालाना 20 बिलियन लीटर से आगे निकल चुकी है. चालू वित्त वर्ष में करीब 4 बिलियन लीटर अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे कुल क्षमता लगभग 24 बिलियन लीटर तक पहुंच सकती है. इसके मुकाबले E20 कार्यक्रम की सालाना जरूरत करीब 11 बिलियन लीटर है. शराब, फार्मा और केमिकल उद्योग की मांग जोड़ने के बाद भी लगभग 7 बिलियन लीटर क्षमता ऐसी बचती है, जिसका पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो रहा. यही वजह है कि अब सरकार और उद्योग दोनों नए उपयोग तलाश रहे हैं.

क्या भारत इथेनॉल का बड़ा एक्सपोर्टर भी बन सकता है?

घरेलू मांग बढ़ाने के साथ-साथ एक्सपोर्ट भी एक बड़ा विकल्प बनकर उभर रहा है. नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे कई देशों ने इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य तय किए हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता नहीं है. ऐसे में भारत इन देशों के लिए इथेनॉल सप्लायर बनने की दिशा में भी संभावनाएं तलाश रहा है. अगर यह रणनीति सफल होती है तो भारत केवल घरेलू जरूरत पूरी करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय बायोफ्यूल सप्लायर के रूप में भी अपनी पहचान बना सकता है.

एविएशन सेक्टर भी बनेगा नया बाजार

सरकार अब सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी SAF को बढ़ावा देने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है. सरकार ने रोडमैप तैयार किया है जिसके तहत 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1 फीसदी SAF ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा गया है. इसे 2028 में 2 फीसदी और 2030 तक 5 फीसदी तक बढ़ाने की योजना है. इथेनॉल से 'Alcohol-to-Jet' तकनीक के जरिए एविएशन फ्यूल तैयार किया जा सकता है. यही वजह है कि इथेनॉल अब केवल सड़क परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि विमानन क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में देखा जा रहा है. इसी दिशा में NTPC Green Energy और GPS Renewables मिलकर विशाखापत्तनम के पास देश का पहला Ethanol-to-Jet Fuel प्लांट तैयार कर रहे हैं. इस प्लांट से हर साल लगभग 1,800 टन सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.

CAFE-III नियम क्या संकेत दे रहे हैं?

सरकार के ड्राफ्ट CAFE-III नियम भी इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं. पहली बार इस फ्रेमवर्क में इथेनॉल और दूसरे बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव शामिल किए गए हैं. इससे संकेत मिलता है कि भविष्य की वाहन नीति में केवल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स ही नहीं, बल्कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और बायोफ्यूल आधारित समाधान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसका उद्देश्य ऐसे वाहनों को बढ़ावा देना है जो अधिक मात्रा में इथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग कर सकें.

चीनी उद्योग से निकलकर ऊर्जा नीति का हिस्सा बना इथेनॉल

कुछ साल पहले तक इथेनॉल को चीनी उद्योग का एक सह-उत्पाद माना जाता था. लेकिन अब इसकी तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन तेजी से बढ़ा है और मक्का जैसे फीडस्टॉक की भूमिका मजबूत हुई है. इसके साथ ही इथेनॉल इकोसिस्टम में अब केवल चीनी मिलें ही नहीं बल्कि डिस्टिलरी, अनाज प्रोसेसर, टेक्नोलॉजी कंपनियां और फ्यूल रिटेल नेटवर्क भी शामिल हो रहे हैं. यानी इथेनॉल अब कृषि, ऊर्जा और परिवहन तीनों क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण उत्पाद बन चुका है.

E20 के बाद क्या होगी अगली बड़ी कहानी?

इथेनॉल ATM पूरे देश में कब तक शुरू होंगे, कुकिंग स्टोव कितनी तेजी से अपनाए जाएंगे और SAF का बाजार कितनी जल्दी विकसित होगा, इसका जवाब आने वाले वर्षों में मिलेगा. लेकिन एक बात साफ है कि भारत की इथेनॉल रणनीति अब केवल E20 तक सीमित नहीं है. देश में तैयार हो चुकी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए सरकार नए-नए बाजार तैयार करने पर काम कर रही है.

इथेनॉल ATM, घरेलू कुकिंग फ्यूल, एक्सपोर्ट, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल जैसी पहलें इसी बड़े विजन का हिस्सा हैं. आने वाले समय में इथेनॉल केवल पेट्रोल में मिलने वाला ईंधन नहीं रहेगा, बल्कि भारत की ऊर्जा रणनीति का एक अहम स्तंभ बन सकता है.