भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सितंबर के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली है. 25 सितंबर 2026 को खत्म हुए हफ्ते में देश का Forex Reserve $18.34 अरब घटकर $747.55 अरब रह गया. इससे पहले भी लगातार दो हफ्तों में रिजर्व कम हुआ था.
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4 सितंबर को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड $785.70 अरब पर था. इसके बाद तीन हफ्तों में करीब $38.15 अरब की कमी हो चुकी है.
यानी कुछ ही हफ्तों में रिकॉर्ड स्तर से रिजर्व काफी नीचे आ गया है.
तीन हफ्तों में कितना घटा रिजर्व?
RBI के आंकड़ों के मुताबिक गिरावट का सिलसिला लगातार बढ़ा है.
- 11 सितंबर: करीब $4.92 अरब की कमी.
- 18 सितंबर: करीब $14.88 अरब की कमी.
- 25 सितंबर: करीब $18.34 अरब की कमी.
- तीन हफ्तों में कुल गिरावट: करीब $38.15 अरब.
अब सवाल है कि रिजर्व में इतनी बड़ी कमी आखिर आई कहां से.
Foreign Currency Assets में सबसे बड़ी गिरावट
भारत के Forex Reserve में सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets यानी FCA का होता है. 25 सितंबर वाले हफ्ते में FCA में करीब $15.57 अरब की गिरावट आई और यह घटकर करीब $615.41 अरब रह गया.
लेकिन FCA को सिर्फ डॉलर का भंडार समझना सही नहीं होगा. इसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं.
इसलिए FCA में बदलाव के पीछे एक से ज्यादा कारण हो सकते हैं.
क्या RBI ने रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचे?
मौजूदा परिस्थितियों में एक संभावित वजह RBI का विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप हो सकती है. अगर रुपये पर दबाव बढ़ता है और डॉलर की मांग मजबूत होती है, तो RBI बाजार में डॉलर बेचकर रुपये की चाल को संभालने की कोशिश कर सकता है.
पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच इस तरह के दबाव बढ़ सकते हैं. हालांकि केवल Forex Reserve के आंकड़ों को देखकर यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि पूरी गिरावट RBI की डॉलर बिक्री की वजह से हुई है.
इसके अलावा विदेशी मुद्राओं और दूसरी संपत्तियों की कीमतों में बदलाव भी FCA की डॉलर वैल्यू को प्रभावित कर सकता है.
Gold Reserves भी घटे, लेकिन इसका मतलब सोना बेचना नहीं
25 सितंबर वाले हफ्ते में भारत के Gold Reserves की डॉलर वैल्यू भी करीब $2.59 अरब घटकर $108.71 अरब रह गई.
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि RBI ने इतने मूल्य का सोना बेच दिया. सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत में बदलाव होने पर RBI के पास मौजूद Gold Reserves की डॉलर में दिखाई जाने वाली वैल्यू भी बदल सकती है.
क्या West Asia Crisis सीधे जिम्मेदार है?
इसका सीधा जवाब सिर्फ Forex Reserve के आंकड़ों से नहीं दिया जा सकता. रिजर्व कई वजहों से बदलता है, जिसमें RBI के बाजार लेनदेन और विदेशी संपत्तियों की कीमतों में बदलाव शामिल हैं. फिलहाल महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के पास अभी भी करीब $747.6 अरब का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है. इसलिए केवल $38 अरब की गिरावट को देखकर देश की बाहरी आर्थिक स्थिति पर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.
अब बाजार की नजर अगले कुछ हफ्तों के आंकड़ों पर होगी. अगर रिजर्व में गिरावट जारी रहती है, तो RBI के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और रुपये पर दबाव को लेकर सवाल बढ़ सकते हैं. वहीं अगर रिजर्व स्थिर होता है या फिर बढ़ना शुरू करता है, तो तस्वीर अलग हो सकती है.
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