भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार चौथे हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है. 2 अक्टूबर 2026 को खत्म हुए सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 12.75 अरब डॉलर घटकर 734.61 अरब डॉलर रह गया. इससे पहले के हफ्ते में भी इसमें 18.34 अरब डॉलर की भारी कमी आई थी. इस तरह सिर्फ चार हफ्तों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से 51.10 अरब डॉलर कम हो चुके हैं.
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यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपये पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में सवाल है कि रिजर्व में इतनी बड़ी कमी की वजह क्या है और क्या इससे भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़नी चाहिए.
रिकॉर्ड ऊंचाई से कितना नीचे आया विदेशी मुद्रा भंडार?
सितंबर की शुरुआत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था. 4 सितंबर 2026 को यह 785.71 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई पर था. इसके बाद लगातार चार हफ्तों तक इसमें गिरावट दर्ज की गई.
विदेशी मुद्रा भंडार में साप्ताहिक बदलाव इस तरह रहा
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11 सितंबर: करीब 4.92 अरब डॉलर की गिरावट
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18 सितंबर: करीब 14.88 अरब डॉलर की कमी
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25 सितंबर: 18.34 अरब डॉलर की गिरावट
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2 अक्टूबर: 12.75 अरब डॉलर की कमी
इन आंकड़ों के मुताबिक, चार हफ्तों में रिजर्व अपने रिकॉर्ड स्तर से 51.10 अरब डॉलर नीचे आ चुका है.
FCA में गिरावट से कितना बदला रिजर्व का आंकड़ा?
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों यानी Foreign Currency Assets (FCA) का होता है. 2 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह में FCA 10.66 अरब डॉलर घटकर 604.75 अरब डॉलर रह गया. हालांकि, FCA में आई पूरी गिरावट को RBI की ओर से डॉलर की बिक्री मानना सही नहीं होगा. इस हिस्से में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं में रखी परिसंपत्तियां भी शामिल होती हैं. इन मुद्राओं की डॉलर के मुकाबले कीमत बदलने से रिजर्व का डॉलर में दर्ज मूल्य भी प्रभावित होता है. दूसरी तरफ, रुपये पर दबाव बढ़ने पर RBI विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है. बाजार में डॉलर बेचने से रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. मौजूदा हालात में रिजर्व पर वैल्यूएशन में बदलाव और RBI के संभावित हस्तक्षेप, दोनों का असर समझना जरूरी है.
क्या गोल्ड रिजर्व में गिरावट का मतलब सोने की बिक्री है?
विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का दूसरा अहम हिस्सा गोल्ड रिजर्व रहा. इस सप्ताह सोने के रिजर्व की डॉलर वैल्यू 2.29 अरब डॉलर घटकर 106.41 अरब डॉलर रह गई. लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि RBI ने इतनी कीमत का सोना बेच दिया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट भी इसकी वजह हो सकती है. संबंधित सप्ताह में सोने का भाव करीब 2.5% घटकर 4,177 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था. अन्य मदों में भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 15 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 18.66 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की रिजर्व पोजीशन 15 मिलियन डॉलर घटकर 4.79 अरब डॉलर रह गई.
महंगा तेल और रुपये पर दबाव, लेकिन कितना है जोखिम?
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल डॉलर की मांग बढ़ा सकता है. विदेशी निवेशकों की निकासी और रुपये में कमजोरी भी विदेशी मुद्रा बाजार के समीकरण को प्रभावित करती है.
हालांकि, रिजर्व में गिरावट के बावजूद भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा बफर मौजूद है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 11 महीने के आयात को कवर करने के बराबर है और यह भारत के बाहरी कर्ज के लगभग 94.4% के बराबर है.
इसलिए रिजर्व में गिरावट पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन केवल चार हफ्तों के आंकड़ों से किसी बड़े संकट का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. आगे की तस्वीर काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पूंजी के प्रवाह और रुपये को स्थिर रखने के लिए RBI के कदमों पर निर्भर करेगी.
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