Gold Price : सोने के भंडार में लग गई सेंध,भारत को लगा बड़ा झटका!

सौरभ दीक्षित

• 05:26 PM • 06 Jul 2026

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 5.654 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई है. वजह सोने की कीमत गिरना है, मात्रा घटना नहीं. जानिए इसका असर और आगे क्या हो सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

भारत के सोने के भंडार में गिरावट आई है

विदेशी मुद्रा भंडार में झटका लगा है

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले सप्ताह ५.६५४ अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है. इसके बाद कुल भंडार ६६६.९३३ अरब डॉलर रह गया है. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी रही है, न कि भारत के पास रखा सोना कम होना. आसान शब्दों में कहें तो भारत ने सोना बेचा नहीं है और सोने की मात्रा भी कम नहीं हुई है. बाजार में सोने का भाव नीचे आने से उसके भंडार की कुल कीमत कम दिखी है, और इसी का असर विदेशी मुद्रा भंडार के कुल आंकड़े पर पड़ा है.

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सोने के भंडार में गिरावट क्यों दिखी

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह सोने के भंडार की कीमत में ५ अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई. अब सोने के भंडार की कुल कीमत १०२.५३६ अरब डॉलर रह गई है. इससे पहले वाले सप्ताह में इसमें करीब ४.११० अरब डॉलर का इजाफा हुआ था.

मार्च २०२६ के अंत में भारतीय रिजर्व बैंक के पास ८८०.५२ टन सोना था. यह देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब १६.७ प्रतिशत हिस्सा था. यानी सोने की मात्रा वही रही, लेकिन उसके भाव घटने से उसकी कुल कीमत कम हो गई.

मुख्य आंकड़े

• कुल विदेशी मुद्रा भंडार ५.६५४ अरब डॉलर घटकर ६६६.९३३ अरब डॉलर रह गया.

• सोने के भंडार की कीमत घटकर १०२.५३६ अरब डॉलर रह गई.

• मार्च २०२६ के अंत में भारतीय रिजर्व बैंक के पास ८८०.५२ टन सोना था.

• कुल भंडार में सोने की हिस्सेदारी करीब १६.७ प्रतिशत थी.

• विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े हिस्से, विदेशी मुद्रा संपत्तियों, में १५० मिलियन डॉलर की कमी आई और यह ५४१.०६७ अरब डॉलर रह गया.

आसान भाषा में समझिए

इसे ऐसे समझा जा सकता है. अगर किसी के पास १०० ग्राम सोना है और बाजार में सोने का भाव अचानक १० प्रतिशत गिर जाए, तो सोना उतना ही रहेगा, लेकिन उसकी कीमत कम हो जाएगी. भारत के मामले में भी यही हुआ है. इसलिए यह असली कमी से ज्यादा कागजी कीमत में आई गिरावट है.

विदेशी मुद्रा भंडार क्या होता है.

विदेशी मुद्रा भंडार वह पूंजी होती है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक अपने पास रखता है. इसमें सोना, अलग अलग विदेशी मुद्राएं, एसडीआर और आईएमएफ के पास रखा रिजर्व शामिल होता है. जरूरत पड़ने पर इसी भंडार का इस्तेमाल रुपये को संभालने, विदेश से जरूरी सामान खरीदने और मुश्किल आर्थिक हालात से निपटने में किया जाता है.

दूसरे हिस्सों में क्या हुआ

विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्तियां होती हैं. इस बार इसमें बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई. पिछले सप्ताह इसमें १५० मिलियन डॉलर की कमी दर्ज हुई और यह ५४१.०६७ अरब डॉलर रह गया. हालांकि इससे एक सप्ताह पहले इसमें ३.०७२ अरब डॉलर की बड़ी गिरावट आई थी.

इन संपत्तियों में सिर्फ अमेरिकी डॉलर नहीं, बल्कि यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी दूसरी मुद्राएं भी शामिल होती हैं. इसलिए इनकी कीमतों में उतार चढ़ाव का असर भी कुल भंडार की कीमत पर पड़ता है.

क्या घबराने की जरूरत है

फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तुरंत घबराने की वजह नहीं दिखती. विदेशी मुद्रा भंडार अब भी ६६६ अरब डॉलर से ज्यादा है, और इसे कई महीनों के आयात का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त माना जाता है. हालांकि यह भी सच है कि २७ फरवरी २०२६ को यह भंडार ७२८.४९४ अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, और उसके मुकाबले अब इसमें साफ कमी आई है.

अभी की सबसे अहम बात यही है कि इस गिरावट की बड़ी वजह किसी तरह का आर्थिक संकट नहीं, बल्कि सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई कमी है. आगे अगर दुनिया के बाजार में सोने का भाव बढ़ता है, तो सोने के भंडार की कीमत और विदेशी मुद्रा भंडार, दोनों के आंकड़ों में फिर सुधार दिख सकता है.