भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर बढ़ोतरी हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक, यानी आरबीआई, के मुताबिक 24 जुलाई 2026 को खत्म हुए सप्ताह में यह 6.1 अरब डॉलर बढ़कर 682.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया. रुपये में देखें तो एक हफ्ते में देश के भंडार में करीब 52 हजार करोड़ रुपये जुड़े हैं.
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यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है. यह स्तर करीब दो महीने का ऊंचा स्तर भी माना जा रहा है. आसान भाषा में कहें तो यह देश की वह बाहरी मुद्रा वाली तिजोरी है, जो मुश्किल समय में तेल, गैस, दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें विदेशों से खरीदने में मदद करती है.
विदेशी मुद्रा भंडार क्या होता है
विदेशी मुद्रा भंडार, यानी फॉरेक्स रिजर्व्स, वह रकम और संपत्ति होती है जिसे आरबीआई संभालकर रखता है. इसमें सिर्फ अमेरिकी डॉलर नहीं होते, बल्कि यूरो, पाउंड, जापानी येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राएं, सोना और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, यानी आईएमएफ, से जुड़े कुछ रिजर्व भी शामिल होते हैं.
ताजा आंकड़ों में क्या दिखा
24 जुलाई 2026 को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 6.1 अरब डॉलर बढ़ा.कुल विदेशी मुद्रा भंडार 682.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया.इससे पहले वाले सप्ताह में भी 1.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी.उस समय कुल भंडार 676.23 अरब डॉलर था.यानि लगातार दूसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई.
बढ़ोतरी कहां से आई
आरबीआई के अनुसार इस बार सबसे बड़ा सहारा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों, यानी एफसीए, से मिला. यह 4.8 अरब डॉलर बढ़कर 555.92 अरब डॉलर हो गया. इसका मतलब है कि कुल बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्राओं की होल्डिंग का रहा.
एफसीए में सिर्फ डॉलर का असर नहीं होता. इसमें यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राओं की कीमतों में बदलाव भी जुड़ता है. इसलिए कई बार कुल भंडार में बदलाव सिर्फ खरीद या बिक्री से नहीं, बल्कि वैल्यू में बदलाव से भी आता है.
किन हिस्सों में कमी आई
सभी आंकड़े बढ़त नहीं दिखाते. भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स, यानी एसडीआर, में 53 मिलियन डॉलर की कमी आई है. इसके बाद यह 18.61 अरब डॉलर रह गया.
इसी तरह आईएमएफ के पास भारत की रिजर्व पोजिशन में भी 11 मिलियन डॉलर की कमी आई. यह घटकर 4.75 अरब डॉलर रह गई. इसके बावजूद कुल विदेशी मुद्रा भंडार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इसका मतलब क्या है
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रहने से देश को बाहरी झटकों से निपटने में सहारा मिलता है. इससे जरूरी आयात के लिए भुगतान करना आसान रहता है और आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिलती है. ताजा आंकड़े यही दिखाते हैं कि इस समय भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति में मजबूती आई है.
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और यह करीब दो महीने का ऊंचा स्तर है. विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़त इस उछाल की मुख्य वजह रही. अब आगे नजर वैश्विक हालात, डॉलर की चाल, तेल की कीमतों और आरबीआई की रणनीति पर रहेगी.
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