Gold Silver Price Today: इकोनॉमिक्स का एक बुनियादी नियम है कि जिस चीज पर टैक्स बढ़ता है, वो महंगी हो जाती है. लेकिन इस समय भारत के गोल्ड मार्केट ने इकोनॉमिक्स की इस स्थापित थ्योरी को कूड़ेदान में फेंक दिया है. देश के सराफा बाजार में इन दिनों एक बेहद अजीब और चौंकाने वाला खेल चल रहा है. केंद्र सरकार की एक चाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने पूरे गोल्ड मार्केट का समीकरण बदल कर रख दिया है. आलम यह है कि सोने की डिमांड में इतनी बड़ी गिरावट आई है कि लोग भारी डिस्काउंट पर मिल रहा सोना भी खरीदने से बच रहे हैं. आइए आपको बताते हैं कि आखिर भारतीय गोल्ड मार्केट में इस समय क्या चल रहा है.
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सोने-चांदी की आज की कीमतें
पूरे मामले को समझने से पहले सोने और चांदी की आज की ताजा कीमतों पर एक नजर डाल लेते हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून की एक्सपायरी वाला सोना मामूली बढ़त के साथ 1 लाख 59 हजार रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था. वहीं, दूसरी ओर 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली चांदी में जबरदस्त तेजी देखी गई. चांदी 1.5 फीसदी से ज्यादा के बड़े उछाल के साथ 2 लाख 76 हजार रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी. कीमतों के इस रिकॉर्ड स्तर के बीच ही बाजार में एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है.
सरकार ने क्यों बढ़ाई इम्पोर्ट ड्यूटी?
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 13 मई को हुई, जब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सोने, चांदी और प्लैटिनम पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया. सरकार का मुख्य मकसद साफ था—देश में गोल्ड इम्पोर्ट (सोने के आयात) को कम करना और विदेशी मुद्रा यानी फॉरेक्स आउटफ्लो को नियंत्रित करना. लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद बाजार में बिल्कुल उलट सिचुएशन बन गई. भारत में सोने की कीमतें ऑफिशियल इम्पोर्ट प्राइस से करीब 450 रुपये प्रति ग्राम तक नीचे आ गईं. यानी जो सोना टैक्स बढ़ने के बाद महंगा होना चाहिए था, वह बाजार में भारी डिस्काउंट पर बिकने लगा.
WGC की रिपोर्ट: प्रति 10 ग्राम पर 4500 रुपये की भारी छूट
इस अजीबोगरीब स्थिति की पुष्टि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council - WGC) के आंकड़ों से भी होती है. WGC की इंडिया रिसर्च हेड कविता चाको के मुताबिक, ड्यूटी बढ़ने से पहले डोमेस्टिक मार्केट में डिस्काउंट सिर्फ 14 डॉलर प्रति आउंस था, जो अब बढ़कर करीब 150 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच गया है. इसे जब हम ग्राम और रुपये में कनवर्ट करते हैं, तो यह आंकड़ा प्रति 10 ग्राम पर करीब 4,500 रुपये के बंपर डिस्काउंट के रूप में निकल कर आता है. उदाहरण के लिए, अगर टैक्स जोड़ने के बाद सोने की कीमत ₹10,000 रुपये प्रति ग्राम बैठती है, तो वही सोना इस समय मार्केट में करीब ₹9,538 रुपये प्रति ग्राम में मिल रहा है.
कोई ज्वेलर आखिर नुकसान में सोना क्यों बेचेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि कोई भी बुलियन डीलर या ज्वेलर घाटा सहकर सोना क्यों बेचेगा? इसकी असल कहानी ज्वेलर्स के पुराने स्टॉक से जुड़ी है. दरअसल, कई बुलियन डीलर्स ने सरकार द्वारा टैक्स बढ़ाए जाने से पहले ही (जब इम्पोर्ट ड्यूटी 6% थी) भारी मात्रा में गोल्ड इम्पोर्ट करके रख लिया था. डीलर्स को उम्मीद थी कि ड्यूटी बढ़ने के बाद वे ऊंचे दामों पर चांदी काटेंगे, लेकिन इसी बीच पासा पूरी तरह पलट गया और बाजार में खरीदार गायब हो गए.
पीएम मोदी की अपील और 'Virtually No Demand' की स्थिति
जिस समय ज्वेलर्स भारी स्टॉक दबाकर बैठे थे, ठीक उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से एक खास अपील कर दी. पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया कि वे कम से कम एक साल तक सोना न खरीदें. इस अपील और पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमतों के चलते मार्केट की डिमांड पर ब्रेक लग गया. 'इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन' (IBJA) के मुताबिक, इस समय सराफा बाजार में 'Virtually No Demand' यानी लगभग शून्य डिमांड जैसी स्थिति बन गई है. ग्राहक दुकानों तक पहुंच ही नहीं रहे हैं, जिससे ज्वेलर्स की रातों की नींद उड़ गई है.
छोटे और मिड-साइज ज्वेलर्स पर बढ़ा सबसे ज्यादा दबाव
अब ज्वेलर्स के सामने दोहरी मुसीबत है. एक तरफ तिजोरियों में पुराना स्टॉक डंप पड़ा है और दूसरी तरफ बिक्री पूरी तरह ठप है. इस चक्रव्यूह से निकलने के लिए ज्वेलर्स अब डिस्काउंट देकर माल निकालने को मजबूर हैं. कुछ ज्वेलर्स तो ग्राहकों को खींचने के लिए मेकिंग चार्जेस (घड़ाई शुल्क) में भी भारी कटौती कर रहे हैं. हालांकि, बड़े ज्वेलरी चेन्स के पास 'इन्वेंट्री बफर' होने और शादियों (Bridal Demand) का थोड़ा सपोर्ट मिलने से वे अभी भी संभले हुए हैं, लेकिन छोटे और मिड-साइज ज्वेलर्स पर अस्तित्व का संकट आ गया है क्योंकि उनका प्रॉफिट मार्जिन पूरी तरह दब चुका है.
WGC की चेतावनी: बढ़ सकती है गोल्ड स्मगलिंग
इस पूरे क्राइसिस के बीच वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने एक बड़ा रेड फ्लैग दिखाते हुए चेतावनी जारी की है. WGC का कहना है कि इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से देश में गोल्ड स्मगलिंग (सोने की तस्करी) का खतरा काफी हद तक बढ़ सकता है. ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि 2013 से लेकर 2026 तक, जब-जब सरकार ने सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है, तब-तब भारत और विदेशी बाजारों में गोल्ड प्राइस का अंतर (Gap) बढ़ा है. इसी गैप का फायदा उठाने के लिए स्मगलर्स एक्टिव हो जाते हैं और अनऑफिशियल गोल्ड इनफ्लो बढ़ जाता है. यानी सरकार जिस इम्पोर्ट को रोकना चाहती है, वह अवैध रास्ते से देश में आ सकता है.
भविष्य का अनुमान: क्या सोने की चमक पड़ेगी फीकी?
आगे क्या होगा, इसे लेकर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अनुमान जताया है कि साल 2026 में भारत की ओवरऑल गोल्ड डिमांड में 50 से 60 टन तक की गिरावट आ सकती है, जो कि कुल मांग का लगभग 10% है. हालांकि, आने वाले समय में सोने की मांग इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वैश्विक स्तर पर महंगाई की क्या स्थिति रहती है, लोगों की आमदनी कितनी बढ़ती है और इस साल का मानसून कैसा रहता है.
'वेट एंड वॉच' की स्थिति में भारतीय सराफा बाजार
कुल मिलाकर कहें तो भारतीय गोल्ड मार्केट इस समय एक बेहद अजीब चौराहे पर खड़ा है. एक तरफ सरकार का कड़ा रुख है, दूसरी तरफ ज्वेलर्स डिस्काउंट की सेल खोलकर बैठे हैं, और तीसरी तरफ ग्राहक अपनी जेब पर हाथ रखकर 'वेट एंड वॉच' के मूड में हैं. अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भारतीय परिवारों की तिजोरियों में बंद सोने की पारंपरिक चमक जीतती है या फिर पीएम मोदी की यह अपील बाजार पर हावी रहती है.
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