क्या भारत में भी आएगा कोरिया जैसा शेयर बाजार क्रैश? नई रिपोर्ट ने मचाया हड़कंप, कर्ज लेकर निवेश पर बढ़ी चिंता !

चिराग ठाकुर

• 12:52 PM • 31 Jul 2026

भारत में कर्ज लेकर शेयर खरीदने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. ब्लूमबर्ग रिपोर्ट ने चेताया, मार्जिन ट्रेडिंग बढ़ी तो छोटे निवेशक और बाजार दोनों दबाव में आ सकते हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

भारत में मार्जिन ट्रेडिंग का आकार 1.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

एक साल में कर्ज लेकर निवेश का आकार करीब 50% बढ़ा

उधार का पैसा छोटे और कम खरीदार वाले शेयरों में जा रहा

साउथ कोरिया का शेयर बाजार इस समय दुनियाभर के निवेशकों के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आया है. वहां सिर्फ शेयरों की कीमतों में गिरावट नहीं आई, बल्कि कर्ज लेकर निवेश करने वाले लोगों पर भी बड़ा दबाव बना. जब बाजार तेजी में था, तब निवेशकों ने उधार लेकर जमकर शेयर खरीदे. लेकिन जैसे ही बाजार का रुख बदला, लीवरेज यानी कर्ज के सहारे किए गए निवेश ने परेशानी बढ़ानी शुरू कर दी. गिरावट के दौरान ब्रोकर्स ने निवेशकों से अतिरिक्त पैसा जमा करने को कहा. इसे Margin Call कहा जाता है. जिन निवेशकों के पास अतिरिक्त पैसा नहीं था, उनके शेयर जबरन बेच दिए गए. इससे बाजार में बिकवाली और बढ़ी और गिरावट का दबाव कई गुना बढ़ गया. यही वजह है कि अब सवाल उठने लगा है कि क्या भारत में भी धीरे-धीरे ऐसा ही जोखिम तैयार हो रहा है.

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भारत में कर्ज लेकर निवेश का बढ़ता चलन

बाजार को लेकर आई एक रिपोर्ट ने भारत में तेजी से बढ़ रहे Margin Trading के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ब्रोकर्स रिटेल निवेशकों को बड़ी मात्रा में पैसा उधार दे रहे हैं और कई निवेशक अपनी क्षमता से ज्यादा निवेश करने के लिए कर्ज का सहारा ले रहे हैं.

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भारत में शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. मोबाइल ऐप्स और डिजिटल ब्रोकर्स ने निवेश को पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है. अब कुछ मिनटों में डीमैट अकाउंट खुल जाता है और कुछ क्लिक में शेयर खरीदे जा सकते हैं. लेकिन निवेश की इस आसान प्रक्रिया के साथ एक नया ट्रेंड भी तेजी से बढ़ा है और वह है Margin Trading Facility यानी MTF.

क्या है Margin Trading Facility यानी MTF?

Margin Trading Facility को आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी सुविधा है जिसमें निवेशक अपने पास मौजूद पैसों से ज्यादा मूल्य के शेयर खरीद सकते हैं. मान लीजिए किसी निवेशक के पास 1 लाख रुपये हैं. MTF के जरिए ब्रोकर उसे अतिरिक्त पैसा उपलब्ध करा सकता है, जिससे वह 2 लाख, 3 लाख रुपये या उससे ज्यादा के शेयर खरीद सके. इसका फायदा यह है कि अगर शेयर का भाव बढ़ता है तो निवेशक का मुनाफा ज्यादा हो सकता है. लेकिन अगर शेयर गिरता है तो नुकसान भी उतनी ही तेजी से बढ़ जाता है. यानी लीवरेज निवेशक की कमाई को बढ़ा सकता है, लेकिन जोखिम को भी कई गुना बढ़ा देता है.

1.38 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा Margin Funding बाजार

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में Margin Trading Facility का आकार बढ़कर करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. खास बात यह है कि सिर्फ एक साल में इसमें करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसका मतलब है कि पहले के मुकाबले ज्यादा निवेशक उधार लेकर शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं. डिजिटल ब्रोकर्स भी इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहे हैं. ग्राहकों को फंडिंग उपलब्ध कराने की होड़ बढ़ रही है और रिटेल निवेशक भी इस सुविधा का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं.

चिंता सिर्फ कर्ज नहीं, बल्कि कर्ज का इस्तेमाल कहां हो रहा है

जानकारों की सबसे बड़ी चिंता यह नहीं है कि निवेशक कर्ज ले रहे हैं. असली सवाल यह है कि उस पैसे का इस्तेमाल किन शेयरों में किया जा रहा है. अगर उधार लिया गया पैसा बड़ी और मजबूत कंपनियों जैसे Reliance, HDFC Bank या Infosys जैसे शेयरों में लगाया जाए, तो जोखिम कुछ हद तक नियंत्रित रह सकता है. लेकिन चिंता तब बढ़ती है जब यही पैसा छोटे, कम लिक्विड और ज्यादा जोखिम वाले शेयरों में लगाया जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, कई निवेशक सोशल मीडिया, टेलीग्राम चैनल और फिनफ्लुएंसर्स की सलाह के आधार पर ऐसे शेयरों में पैसा लगा रहे हैं, जहां तेजी की उम्मीद तो ज्यादा होती है, लेकिन गिरावट का खतरा भी उतना ही बड़ा होता है.

मल्टीबैगर के लालच में बढ़ रहा जोखिम

शेयर बाजार में कई निवेशक जल्द पैसा बनाने की उम्मीद में अगले मल्टीबैगर शेयर की तलाश करते हैं. इसी सोच के चलते कई बार लोग बिना पूरी जानकारी के कर्ज लेकर निवेश करने लगते हैं. यही Fear of Missing Out यानी FOMO निवेशकों को ज्यादा जोखिम लेने के लिए प्रेरित करता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में कुछ ऐसे शेयरों में भी उधार का पैसा लगाया जा रहा है, जिनसे विदेशी निवेशक दूरी बना रहे हैं. यानी एक तरफ ग्लोबल निवेशक सतर्क होकर पैसा निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ घरेलू निवेशक कर्ज लेकर खरीदारी कर रहे हैं.

अगर बाजार गिरा तो क्या हो सकता है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आती है तो इसका असर क्या होगा. ऐसी स्थिति में सबसे पहले ब्रोकर्स Margin Call जारी कर सकते हैं. यानी निवेशकों से कहा जाएगा कि वह अतिरिक्त पैसा जमा करें या फिर अपनी पोजीशन कम करें. अगर निवेशक अतिरिक्त पैसा नहीं जुटा पाते हैं, तो ब्रोकर्स उनके शेयर बेच सकते हैं. अगर यह स्थिति हजारों या लाखों निवेशकों के साथ एक साथ होती है, तो बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिल सकती है. खासकर छोटे और कम लिक्विड शेयरों में इसका असर ज्यादा हो सकता है, क्योंकि ऐसे शेयरों में सामान्य समय में भी खरीदार सीमित होते हैं.

भारत और साउथ कोरिया में क्या अंतर है?

हालांकि भारत और साउथ कोरिया की स्थिति पूरी तरह एक जैसी नहीं है. साउथ कोरिया में कर्ज के सहारे निवेश का बड़ा हिस्सा AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ा हुआ था. वहां टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर जबरदस्त उत्साह था. वहीं भारत में चिंता का कारण यह है कि कर्ज का बड़ा हिस्सा कई छोटे और जोखिम वाले शेयरों में जा रहा है, जिनके पीछे मजबूत ग्रोथ स्टोरी हमेशा साफ नहीं होती. यानी दोनों बाजारों में लीवरेज का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन वजह अलग-अलग है.

Options के बाद अब Margin Funding पर नजर

भारत में मार्केट रेगुलेटर SEBI ने छोटे निवेशकों को नुकसान से बचाने के लिए इंडेक्स ऑप्शंस के नियमों को सख्त किया है. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ युवा ट्रेडर्स अब Options Trading से हटकर Cash Market में Margin Funding का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी पहले जहां कम पैसे से ऑप्शंस में बड़ा दांव लगाया जाता था, अब कुछ निवेशक कर्ज लेकर शेयर खरीदने का रास्ता अपना रहे हैं. इसका मतलब यह है कि जोखिम खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसका तरीका बदल गया है.

आगे किन चुनौतियों पर रहेगी नजर?

आने वाले समय में महंगाई, कमजोर रुपया, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी रह सकती है. अगर इन कारणों से बाजार पर दबाव बढ़ता है, तो सबसे ज्यादा असर उन निवेशकों पर पड़ सकता है जिन्होंने कर्ज लेकर निवेश किया है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में साउथ कोरिया जैसा संकट आना तय है. लेकिन बढ़ता लीवरेज बाजार के लिए एक बड़ा अलर्ट जरूर है. तेजी के समय कर्ज लेकर निवेश करना आसान लगता है, लेकिन गिरावट के समय यही कर्ज सबसे बड़ा दबाव बन सकता है. इसलिए निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ संभावित मुनाफे को देखकर फैसला न लें, बल्कि जोखिम को भी समझें. क्योंकि शेयर बाजार में लीवरेज जितनी तेजी से कमाई बढ़ा सकता है, उतनी ही तेजी से नुकसान भी बढ़ा सकता है.