श्रीलंका-वियतनाम भारत से आगे! आखिर कैसे? भारत क्यों रह गया पीछे? हर्ष गोयनका ने बताई वजह

सौरभ दीक्षित

• 06:02 PM • 16 Jul 2026

हर्ष गोयनका ने प्रति व्यक्ति आय पर चिंता जताई है. भारत की आय 2813 डॉलर है. जानिए बड़ी आबादी, रोजगार, निवेश और डिजिटल ताकत इस तस्वीर को कैसे बदल सकते हैं.

हर्ष गोयनका ने जताई चिंता
हर्ष गोयनका ने जताई चिंता
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न्यूज़ हाइलाइट्स

विश्व बैंक प्रति व्यक्ति आय से देशों की श्रेणी तय करता है

अपर मिडिल आय श्रेणी की सीमा करीब 4000 डॉलर मानी जाती है

भारी आबादी से कुल कमाई का औसत प्रति व्यक्ति कम दिखता है

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में वह अब भी कई एशियाई देशों से पीछे है. इसी बात पर आरपीजी समूह के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने चिंता जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि यह दुख की बात है.

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हर्ष गोयनका की चिंता उस श्रेणी को लेकर है, जिसे विश्व बैंक प्रति व्यक्ति आय के आधार पर तय करता है. 2026 के आंकड़ों के मुताबिक श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस इस श्रेणी में पहुंच चुके हैं, जबकि भारत अभी इससे नीचे है. हालांकि, उन्होंने भारत के भविष्य को लेकर भरोसा भी जताया है.

मामला क्या है

विश्व बैंक देशों को लोगों की औसत कमाई, यानी प्रति व्यक्ति आय, के आधार पर अलग श्रेणियों में रखता है. अगर किसी देश की प्रति व्यक्ति आय करीब 4,000 डॉलर या उससे ज्यादा हो जाती है, तो उसे अपर मिडिल इनकम कंट्री की श्रेणी में रखा जाता है.

आंकड़े क्या कहते हैं

- श्रीलंका की प्रति व्यक्ति आय लगभग 5,000 डॉलर है.

- वियतनाम की प्रति व्यक्ति आय करीब 5,115 डॉलर है.

- फिलीपींस की प्रति व्यक्ति आय लगभग 4,443 डॉलर है.

- भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,813 डॉलर है.

इन आंकड़ों से साफ है कि भारत को इस श्रेणी तक पहुंचने के लिए अभी आगे बढ़ना है.

भारत पीछे क्यों है

हर्ष गोयनका की बात के संदर्भ में बड़ा कारण भारत की बहुत बड़ी आबादी को माना जा रहा है. देश की कुल जीडीपी बढ़ रही है, लेकिन जब उसी कमाई को 140 करोड़ से ज्यादा लोगों में बांटा जाता है, तो प्रति व्यक्ति आय का औसत कम दिखता है. यानी अर्थव्यवस्था का आकार बड़ा है, लेकिन आबादी भी बहुत बड़ी है.

हर्ष गोयनका ने किन ताकतों का जिक्र किया

हर्ष गोयनका ने चिंता के साथ उम्मीद भी जताई. उनका कहना है कि भारत के पास आगे बढ़ने की कई मजबूत वजहें हैं.

- भारत के पास बड़ी युवा कामकाजी आबादी है.

- भारत तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है.

- मैन्युफैक्चरिंग और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ रहा है.

- सड़कों, एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट और फैक्ट्रियों पर काम हो रहा है.

- यूपीआई, आधार और डिजिटल सेवाओं का दायरा बढ़ा है.

- देश में नए स्टार्टअप बढ़ रहे हैं, जो रोजगार और नई तकनीक दोनों ला रहे हैं.

- लंबे समय के आर्थिक सुधार और नीतियों की निरंतरता को भी उन्होंने ताकत बताया.

सिर्फ जीडीपी बढ़ना काफी नहीं

इस पूरी चर्चा का एक अहम पहलू यह भी है कि सिर्फ जीडीपी बढ़ने से प्रति व्यक्ति आय तेजी से नहीं बढ़ती. इसके लिए ज्यादा रोजगार, बेहतर शिक्षा, ज्यादा कौशल, बेहतर काम की क्षमता और लोगों की कमाई में लगातार बढ़ोतरी जरूरी होती है. आसान शब्दों में कहें तो अर्थव्यवस्था के बढ़ने का फायदा आम लोगों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है.

निष्कर्ष

हर्ष गोयनका का कहना है कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत अभी श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस से पीछे है, और यही चिंता की बात है. साथ ही उनका भरोसा है कि युवा आबादी, तेज आर्थिक बढ़त, बढ़ता निवेश, डिजिटल ढांचा और नए कारोबार आने वाले समय में भारत को आगे ले जा सकते हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत आने वाले वर्षों में अपर मिडिल इनकम कंट्री की श्रेणी तक कब पहुंचता है.