महंगाई का दबाव शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा देखने को मिला. सितंबर में ग्रामीण खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.08% हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.24% थी. शहरी इलाकों में भी महंगाई 4.31% से बढ़कर 4.88% पर पहुंच गई.
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खाने-पीने की चीजों के दामों में भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर रहा. ग्रामीण खाद्य महंगाई दर 8.06% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.18% रही. इसका मतलब है कि रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च का दबाव ग्रामीण परिवारों पर अधिक पड़ रहा है.
प्याज की महंगाई 108% के पार
सितंबर में कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल ने महंगाई को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई. प्याज सबसे ज्यादा महंगी होने वाली वस्तुओं में शामिल रहा. इसकी सालाना महंगाई दर अगस्त के 48.78% से बढ़कर सितंबर में 108.09% हो गई.
दूसरी ओर, अदरक और लहसुन की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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अदरक की महंगाई दर 62.85% रही.
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लहसुन की महंगाई दर बढ़कर 54.62% हो गई.
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नींबू की महंगाई दर अगस्त के 15.15% से बढ़कर 36.41% पहुंच गई.
हालांकि, सभी खाद्य वस्तुओं के दाम नहीं बढ़े. आलू की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 11.50% कम रहीं, जबकि टमाटर के दामों में 8.62% की गिरावट दर्ज की गई. भिंडी और नारियल की कीमतें भी सालाना आधार पर नीचे रहीं.
खाने के अलावा किन चीजों ने बढ़ाया दबाव?
महंगाई का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहा. रेस्तरां और आवास सेवाओं की महंगाई दर 9.36% रही. व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में कीमतें 13.75% बढ़ीं.
अन्य प्रमुख श्रेणियों में महंगाई की स्थिति इस तरह रही:
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खाद्य एवं पेय पदार्थ: 7.36%.
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आवास, पानी, बिजली और ईंधन: 2.74%.
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स्वास्थ्य सेवाएं: 1.40%.
चांदी के आभूषणों की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई. इस श्रेणी में महंगाई दर 87.80% रही.
किन राज्यों में महंगाई सबसे ज्यादा रही?
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पुडुचेरी में संयुक्त महंगाई दर सबसे ज्यादा 6.86% रही. इसके बाद तमिलनाडु में 6.81%, ओडिशा में 6.70%, मध्य प्रदेश में 6.68% और तेलंगाना में 6.64% महंगाई दर्ज की गई.
सितंबर के आंकड़े फिलहाल अनंतिम हैं. अक्टूबर 2026 के खुदरा महंगाई आंकड़े 12 नवंबर को जारी किए जाने हैं.
महंगाई में इस बढ़ोतरी पर RBI की भी नजर रहेगी, क्योंकि ब्याज दरों से जुड़े फैसलों में महंगाई की दिशा अहम भूमिका निभाती है. आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं के दाम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि महंगाई का दबाव अस्थायी है या ज्यादा समय तक बना रह सकता है.
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