Smart phone Export: भारत का स्मार्टफोन एक्सपोर्ट लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देश से स्मार्टफोन का एक्सपोर्ट 23.4% की बढ़ोतरी के साथ 9.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह पहली तिमाही के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा स्मार्टफोन एक्सपोर्ट है. पिछले साल इसी अवधि में भारत से करीब 8 अरब डॉलर के स्मार्टफोन विदेश भेजे गए थे. इससे साफ है कि भारत ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग मैप पर लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
ADVERTISEMENT
इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भी शानदार बढ़ोतरी
सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है. जून तिमाही के दौरान भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 24.6% बढ़कर 15.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस कुल एक्सपोर्ट में स्मार्टफोन की हिस्सेदारी करीब 64.8% रही. यानी देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का सबसे बड़ा आधार स्मार्टफोन इंडस्ट्री ही बनी हुई है.
अमेरिका बना सबसे बड़ा बाजार
भारतीय स्मार्टफोन के लिए अमेरिका सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बना हुआ है. अप्रैल और मई के दौरान एक्सपोर्ट वैल्यू में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 71% रही. इसकी बड़ी वजह यह है कि ऐपल लगातार अमेरिकी बाजार के लिए अपने कई प्रोडक्ट्स का मैन्युफैक्चरिंग बेस भारत में बढ़ा रहा है. इससे भारत को एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग दोनों मोर्चों पर फायदा मिल रहा है.
35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है एक्सपोर्ट
इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का स्मार्टफोन एक्सपोर्ट 35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा करीब 29 अरब डॉलर रहा था. अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो भारत वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है.
लेकिन आगे की राह आसान नहीं
हालांकि मौजूदा आंकड़े उत्साह बढ़ाने वाले हैं, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरे साल इसी रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा. इसके पीछे तीन प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं.
- पहली चुनौती वैश्विक बाजार में स्मार्टफोन की मांग का कमजोर होना है. अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदारी घटती है तो इसका सीधा असर भारत के एक्सपोर्ट पर भी पड़ सकता है.
- दूसरी बड़ी चुनौती कंपोनेंट्स की लगातार बढ़ती लागत है. महंगे पार्ट्स के कारण कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसका असर कीमतों और मांग दोनों पर पड़ सकता है.
- तीसरी वजह यह है कि ऐपल के आने वाले फोल्डेबल आईफोन का प्रोडक्शन भारत में नहीं होने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में हाई-वैल्यू डिवाइस के एक्सपोर्ट का फायदा फिलहाल भारत को नहीं मिल पाएगा.
ग्लोबल मार्केट से भी मिल रहे हैं कमजोर संकेत
जानकारों का कहना है कि भारत को ऐपल की मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट का फायदा जरूर मिल रहा है, लेकिन भविष्य की ग्रोथ काफी हद तक ग्लोबल डिमांड पर निर्भर करेगी. इसी बीच एक रिपोर्ट के मुताबिक जून तिमाही में दुनिया भर में स्मार्टफोन शिपमेंट 11% गिर गया, जो 2013 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इस गिरावट की बड़ी वजह मेमोरी चिप की कमी और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत बताई जा रही है. इन चुनौतियों के कारण कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं की खरीदारी प्रभावित हो सकती है.
मेमोरी चिप की कमी बनी हुई है चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक मेमोरी चिप की सप्लाई से जुड़ी समस्या जल्द खत्म होती नहीं दिख रही है. अनुमान है कि यह चुनौती 2027 तक बनी रह सकती है. अगर ऐसा होता है तो स्मार्टफोन इंडस्ट्री की उत्पादन लागत और सप्लाई दोनों पर असर पड़ सकता है.
भारत के लिए क्या संकेत हैं?
भारत का स्मार्टफोन एक्सपोर्ट फिलहाल मजबूत गति से आगे बढ़ रहा है और देश वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. हालांकि आने वाले महीनों में ग्लोबल डिमांड, कंपोनेंट्स की उपलब्धता और प्रोडक्ट मिक्स जैसे फैक्टर तय करेंगे कि यह तेजी कितनी लंबे समय तक कायम रह पाती है. फिलहाल आंकड़े भारत के लिए सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन आगे की चुनौतियों पर नजर बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा.
BIZ DEAL : Jio, Vi और BSNL के सस्ते प्लान्स में किसका ऑफर सबसे दमदार? कम कीमत में डेटा, OTT और लंबी वैलिडिटी का पूरा हिसाब
https://www.newstak.in/business/story/jio-vi-bsnl-cheap-plans-data-ott-validity-comparison-3275323-2026-07-29
ADVERTISEMENT

