India-UK FTA लागू, लेकिन चीन के साथ व्यापार भी नई ऊंचाई पर, H1 2026 में 91.72 अरब डॉलर पहुंचा कारोबार, जानें पूरी तस्वीर

तनीषा त्यागी

• 10:24 AM • 15 Jul 2026

India-UK FTA लागू होने के बीच H1 2026 में भारत-चीन व्यापार 23.6% बढ़कर 91.72 अरब डॉलर पहुंचा. जानें आयात, निर्यात, ट्रेड डेफिसिट और प्रमुख आंकड़े.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

India-UK FTA लागू होने के बीच सामने आए व्यापार के बड़े आंकड़े

भारत का निर्यात बढ़ा, खासकर सर्किट बोर्ड और पेट्रोलियम उत्पादों में

चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी का सबसे ज्यादा आयात हुआ

H1 2026 में भारत-चीन व्यापार 23.6% बढ़कर 91.72 अरब डॉलर पहुंचा

भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है. इस समझौते से भारत के निर्यातकों और कई उद्योगों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है. लेकिन इसी दिन भारत के पड़ोसी देशों के साथ व्यापार से जुड़े आंकड़ों ने भी ध्यान खींचा है. खासकर चीन के साथ भारत का व्यापार लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है.

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साल 2026 की पहली छमाही यानी H1 2026 के आंकड़ों के मुताबिक भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 23.6% बढ़कर 91.72 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, भले ही राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर रिश्तों में कई चुनौतियां मौजूद हों.  हालांकि इस व्यापारिक बढ़ोतरी के साथ एक बड़ी चिंता भी जुड़ी हुई है. भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा यानी ट्रेड डेफिसिट और बढ़ गया है.

23.6% बढ़ा भारत-चीन का कुल व्यापार

H1 2026 के दौरान भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 91.72 अरब डॉलर दर्ज किया गया. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 23.6% की वृद्धि को दर्शाता है. इस आंकड़े से साफ है कि दोनों देशों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान तेज हुआ है. भारत और चीन के बीच कारोबारी संबंध अभी भी बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं और कई सेक्टरों में व्यापारिक निर्भरता बनी हुई है.

चीन से भारत को निर्यात 79.41 अरब डॉलर पहुंचा

आंकड़ों के अनुसार चीन का भारत को निर्यात 21.8% बढ़कर 79.41 अरब डॉलर हो गया. यानी भारत ने बड़ी मात्रा में चीनी सामान का आयात किया. चीन से भारत आने वाले प्रमुख उत्पादों में इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी शामिल रहे. ये दोनों श्रेणियां भारतीय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ता बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और औद्योगिक मशीनों की मांग लगातार बनी रहने की वजह से चीन का भारत को निर्यात ऊंचे स्तर पर पहुंचा.

भारत का चीन को निर्यात भी तेज गति से बढ़ा

सिर्फ आयात ही नहीं, भारत का चीन को निर्यात भी अच्छी रफ्तार से बढ़ा है. H1 2026 में भारत का चीन को निर्यात 37.2% बढ़कर 12.31 अरब डॉलर हो गया. प्रतिशत के हिसाब से यह वृद्धि चीन के भारत को किए गए निर्यात से भी अधिक रही.

भारत ने चीन को मुख्य रूप से निम्नलिखित उत्पादों का निर्यात किया.

  • Printed Circuit Boards (PCB).
  • OLED Modules.
  • Refined Petroleum.
  • Light Naphtha.

ये ऐसे उत्पाद हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है.

निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटा और ज्यादा बढ़ गया

भारत के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी के बावजूद व्यापार संतुलन अभी भी भारत के पक्ष में नहीं है. चीन से आयात का मूल्य भारत के निर्यात की तुलना में कई गुना अधिक रहा. इसका नतीजा यह हुआ कि H1 2026 में भारत का चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 67.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया. सरल शब्दों में समझें तो भारत ने चीन से जितना सामान खरीदा, उसके मुकाबले चीन को कहीं कम सामान बेचा. यही अंतर व्यापार घाटे के रूप में सामने आया.

ट्रेड डेफिसिट क्यों महत्वपूर्ण है

ट्रेड डेफिसिट किसी भी देश के लिए यह संकेत देता है कि वह दूसरे देश से ज्यादा सामान खरीद रहा है और कम निर्यात कर रहा है. भारत के मामले में चीन के साथ लगातार बड़ा व्यापार घाटा यह दिखाता है कि कई महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए भारतीय उद्योग अभी भी चीनी सप्लाई पर निर्भर है. हालांकि भारत का निर्यात बढ़ना सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन जब तक आयात की तुलना में निर्यात का मूल्य तेजी से नहीं बढ़ता, तब तक व्यापार घाटा ऊंचा बना रह सकता है.

किन उत्पादों ने बढ़ाया व्यापार

चीन से भारत आए प्रमुख उत्पाद

  • Electronics.
  • Machinery.

भारत से चीन गए प्रमुख उत्पाद

  • Printed Circuit Boards (PCB).
  • OLED Modules.
  • Refined Petroleum.
  • Light Naphtha.

इन उत्पादों ने दोनों देशों के बीच व्यापार को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

India-UK FTA के बीच क्या संदेश देते हैं ये आंकड़े

जिस दिन भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हुआ, उसी दिन सामने आए भारत-चीन व्यापार के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत एक साथ कई बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ अपने आर्थिक संबंध मजबूत कर रहा है. एक तरफ नए FTA से नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश है, वहीं दूसरी तरफ चीन के साथ व्यापार का आकार लगातार बढ़ रहा है. हालांकि इस बढ़ते व्यापार के साथ भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती व्यापार घाटे को कम करना बनी हुई है.