India-US Trade Deal: डील लगभग फाइनल, अक्टूबर में फिर भारत आएंगे मार्को रूबियो, सर्जियो गोर ने दिया बड़ा अपडेट

तनीषा त्यागी

• 01:34 PM • 23 Aug 2026

भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब अंतिम दौर में है. सर्जियो गोर के अनुसार बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, जबकि अक्टूबर में मार्को रूबियो फिर भारत आ सकते हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ज्यादातर बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है

अब कानूनी और तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देने पर काम है

दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर करीब 240 अरब डॉलर पहुंचा

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में चल रही ट्रेड डील अब अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने व्यापार समझौते को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के ज्यादातर हिस्सों पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति बन चुकी है. अब बातचीत मुख्य रूप से कानूनी और तकनीकी भाषा से जुड़े पहलुओं को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है. गोर के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जल्द ही कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. हालांकि, अभी डील पर औपचारिक मुहर लगने की तारीख सामने नहीं आई है.

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ट्रेड डील में क्या बचा है?

सर्जियो गोर के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. सैद्धांतिक स्तर पर डील के लगभग सभी बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है. अब समझौते के दस्तावेज में इस्तेमाल होने वाली कानूनी और तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देने का काम बाकी है. यानी बातचीत का फोकस अब बड़े नीतिगत मतभेदों से ज्यादा डील के टेक्स्ट को अंतिम रूप देने पर है. दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि समझौते की शर्तों और भाषा में किसी तरह की अस्पष्टता न रहे. इसी वजह से डील को औपचारिक रूप से घोषित होने में थोड़ा और समय लग सकता है. हालांकि, गोर के बयान से इतना साफ है कि बातचीत अब शुरुआती दौर से काफी आगे निकल चुकी है.

लंबे समय से चल रही है ट्रेड डील पर बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई है. अमेरिका की टैरिफ नीति और दोनों देशों के बीच व्यापार को ज्यादा संतुलित बनाने की कोशिशों के बीच यह समझौता काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारी टैरिफ को लेकर पैदा हुई चुनौतियों के कारण बातचीत में देरी भी हुई. इसके बावजूद दोनों देशों ने बातचीत का सिलसिला जारी रखा और अब समझौता अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है. सर्जियो गोर ने भी इस बात पर जोर दिया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध पिछले कई वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं.

भारत-अमेरिका व्यापार 240 अरब डॉलर तक पहुंचा

सर्जियो गोर ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार का आंकड़ा भी सामने रखा. उनके मुताबिक, करीब 15 साल पहले भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर के स्तर पर था. अब यह बढ़कर करीब 240 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. यह आंकड़ा बताता है कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में पिछले डेढ़ दशक के दौरान काफी विस्तार हुआ है. अब दोनों देशों की नजर भविष्य में व्यापार को और बड़े स्तर तक पहुंचाने पर है. भारत और अमेरिका ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है. ऐसे में प्रस्तावित ट्रेड डील दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों के लिए अहम भूमिका निभा सकती है.

अक्टूबर में फिर भारत आएंगे मार्को रूबियो

ट्रेड डील के साथ भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर एक और अहम अपडेट सामने आया है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अक्टूबर में एक बार फिर भारत आ सकते हैं. रूबियो इससे पहले मई में भारत के दौरे पर आए थे. गोर के मुताबिक, अब अक्टूबर में उनका दोबारा भारत दौरा प्रस्तावित है और इस दौरान वह कई दिनों तक भारत में रह सकते हैं.

कम समय के अंतराल में अमेरिकी विदेश मंत्री का दोबारा भारत आना दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्क और रिश्तों की अहमियत को दिखाता है. अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है.

ट्रंप-मोदी की दोस्ती को सर्जियो गोर ने बताया खास

अमेरिका के राजदूत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्ते को भी भारत-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया. गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच भरोसा और व्यक्तिगत संबंध हैं. उन्होंने कहा कि दोनों नेता तेजी से फैसले लेने और नतीजे हासिल करने पर जोर देते हैं.

गोर ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद के दौर का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, जब ट्रंप चुनाव हारने के बाद चार साल तक सत्ता से बाहर रहे, उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी आलोचना नहीं की. गोर के अनुसार, यह भरोसा दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्ते को मजबूत करने में अहम रहा है. उनके मुताबिक, ट्रंप और मोदी के बीच यह व्यक्तिगत संबंध दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने में भी मददगार है.

रूस से तेल खरीदने वालों पर 100% टैरिफ का क्या मामला है?

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने से जुड़ी अमेरिकी कांग्रेस की पहल पर भी सर्जियो गोर ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव को अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स, दोनों तरफ से समर्थन मिल रहा है. हालांकि, उन्होंने इसे सीधे व्हाइट हाउस की पहल मानने से इनकार किया. गोर के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर इस तरह के टैरिफ की वकालत नहीं की है. उन्होंने कहा कि ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए शुरुआत से ही प्रयास कर रहे हैं. इस मामले में अमेरिकी कांग्रेस की पहल और राष्ट्रपति प्रशासन के रुख को अलग-अलग समझना जरूरी है. फिलहाल गोर के बयान के मुताबिक, 100 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव कांग्रेस की ओर से जुड़ा हुआ है, न कि राष्ट्रपति की घोषित नीति के तौर पर.

भारत के लिए क्यों अहम है यह ट्रेड डील?

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील ऐसे समय में अहम है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है. 240 अरब डॉलर के मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार और आने वाले वर्षों में इसे 500 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य के बीच दोनों देशों के लिए स्थिर और स्पष्ट व्यापारिक संबंध जरूरी हैं. अगर डील औपचारिक रूप से फाइनल होती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबार और व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार हो सकता है. हालांकि, अभी डील की अंतिम शर्तों और औपचारिक घोषणा का इंतजार है. सर्जियो गोर के बयान के मुताबिक, मुख्य स्तर पर बातचीत पूरी हो चुकी है और अब कानूनी तथा तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

कब लगेगी ट्रेड डील पर अंतिम मुहर?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की औपचारिक घोषणा कब होगी. सर्जियो गोर ने इसकी कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है. लेकिन उनके बयान से संकेत है कि समझौता अब फाइनल स्टेज में है. दोनों पक्ष डील की कानूनी और तकनीकी भाषा पर काम कर रहे हैं और इसके बाद अंतिम रूप दिया जा सकता है. अक्टूबर में मार्को रूबियो के प्रस्तावित भारत दौरे के बीच भी दोनों देशों के रिश्तों पर नजर रहेगी. ऐसे में आने वाले समय में ट्रेड डील को लेकर कोई अहम घोषणा सामने आती है या नहीं, यह काफी महत्वपूर्ण होगा. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि लंबे समय से चर्चा में रही भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब बातचीत के शुरुआती दौर से निकलकर अंतिम प्रक्रिया की ओर बढ़ चुकी है. सैद्धांतिक तौर पर ज्यादातर मुद्दों पर सहमति और अब सिर्फ लीगल-टेक्निकल पहलुओं पर काम बाकी होना डील को लेकर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

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