भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. पिछले कुछ दिनों में ऐसे संकेत मिल रहे थे कि दोनों देश समझौते के करीब पहुंच सकते हैं. लेकिन अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर के ताजा बयान से साफ है कि डील के ऐलान में अभी और समय लग सकता है. जैमिसन ग्रीर ने कहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील अभी imminent यानी तुरंत होने वाली नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों ने उन सभी मुद्दों की पहचान कर ली है, जो बातचीत में अड़चन बने हुए हैं. ग्रीर का बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फोन पर हुई बातचीत के एक दिन बाद आया है. ग्रीर ने दोनों नेताओं की बातचीत को पॉजिटिव और रचनात्मक बताया.
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पीयूष गोयल ने क्या कहा?
अमेरिकी पक्ष की तरफ से डील को लेकर सावधानी के संकेत मिले हैं, लेकिन भारत की तरफ से बातचीत को लेकर रुख ज्यादा सकारात्मक है. भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जैमिसन ग्रीर से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट के तहत अंतरिम समझौते को जल्द पूरा करने को लेकर पॉजिटिव और उपयोगी बातचीत हुई. यानी भारत चाहता है कि बातचीत को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, जबकि अमेरिका की तरफ से संकेत है कि कुछ अहम मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है.
रूस से तेल खरीद बना बड़ा मुद्दा
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में सबसे अहम मुद्दों में से एक रूस से भारत की तेल खरीद है. अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीद को लेकर अपनी नीति बदले. अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूस से तेल खरीदने से उसे आर्थिक फायदा मिलता है. वहीं भारत का कहना है कि रूस से तेल खरीद का मुख्य कारण देश की एनर्जी सिक्योरिटी है. वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत के लिए तेल की पर्याप्त उपलब्धता और कीमत दोनों महत्वपूर्ण हैं. यही वजह है कि रूस से तेल खरीद का मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में एक अहम पेच बना हुआ है.
कृषि क्षेत्र पर मतभेद
अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच मिले. दूसरी तरफ भारत अपने कृषि क्षेत्र को लेकर सावधानी बरत रहा है. कृषि क्षेत्र किसानों से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार को तेजी से खोलने को लेकर सतर्क है. यही वजह है कि कृषि बाजार तक पहुंच ट्रेड बातचीत के सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है.
भारत चाहता है बेहतर टैरिफ
ट्रेड डील में भारत की एक बड़ी कोशिश यह है कि भारतीय सामान को अमेरिकी बाजार में बेहतर टैरिफ मिले. इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं. वहीं अमेरिका भारत से अपने उत्पादों के लिए ज्यादा मार्केट एक्सेस चाहता है. इसलिए बातचीत सिर्फ टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है. इसमें रूस से तेल खरीद, कृषि बाजार और दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं.
डील पर क्या है आगे की तस्वीर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत हो चुकी है. वहीं पीयूष गोयल और जैमिसन ग्रीर के बीच भी ट्रेड डील को लेकर बातचीत हुई है. इससे साफ है कि बातचीत जारी है. लेकिन अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ताजा बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि समझौते के ऐलान में अभी कुछ समय लग सकता है. फिलहाल भारत-अमेरिका ट्रेड डील खत्म नहीं हुई है. दोनों देश बातचीत के जरिए उन आखिरी मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें अमेरिकी पक्ष ने अड़चन बताया है.
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