Share Market : भारतीय शेयर बाजार ने आज की शुरुआत कमजोरी के साथ की. ग्लोबल मार्केट से मिले नकारात्मक संकेतों का असर शुरुआती कारोबार में साफ दिखाई दिया. अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बढ़ते सैन्य तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया. यही वजह रही कि बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में नजर आए.
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सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत
आज सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,210.43 से करीब 250 से 300 अंक नीचे फिसलकर लगभग 75,950 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. वहीं निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में करीब 80 से 100 अंकों की गिरावट के साथ 23,770 से 23,790 के दायरे में बना रहा. कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया.
किन वजहों से बढ़ा बाजार पर दबाव?
आज की कमजोरी के पीछे एक नहीं बल्कि कई वैश्विक कारण एक साथ काम करते दिखाई दिए. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी जोखिम की भावना को प्रभावित किया. दूसरी ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया. हालांकि यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था, लेकिन निवेशकों की नजर अब आगे की मौद्रिक नीति के संकेतों पर टिकी हुई है. इन सभी घटनाक्रमों ने मिलकर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बनाया, जिसका असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर भी देखने को मिला.
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
एशियाई शेयर बाजारों में आज अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली. कुछ बाजारों पर दबाव बना रहा, जबकि कुछ इंडेक्स में रिकवरी देखने को मिली. जापान का निक्केई 225 इंडेक्स करीब 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया. वहीं टॉपिक्स इंडेक्स में लगभग 0.59 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई. दक्षिण कोरिया का स्मॉल-कैप कोस्डैक इंडेक्स भी करीब 0.73 प्रतिशत नीचे रहा. हालांकि दक्षिण कोरिया के प्रमुख कोस्पी इंडेक्स ने बुधवार की तेज गिरावट के बाद शुरुआती कारोबार में करीब 0.89 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की. इसके अलावा हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स भी अपने पिछले बंद स्तर 25,807.9 से ऊपर बढ़कर लगभग 25,959 के स्तर पर कारोबार करते दिखाई दिए. इससे साफ है कि पूरे एशियाई बाजार में एकतरफा रुख देखने को नहीं मिला.
अमेरिकी बाजार में आई बड़ी गिरावट
बुधवार को वॉल स्ट्रीट पर जोरदार बिकवाली देखने को मिली. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के साथ मिडिल ईस्ट में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1,153.18 अंक यानी 2.19 प्रतिशत टूटकर 51,594.14 पर बंद हुआ. यह अप्रैल 2025 के बाद इसकी सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट रही. वहीं एसएंडपी 500 इंडेक्स 1.52 प्रतिशत फिसलकर 7,316.15 पर बंद हुआ. टेक शेयरों से भरा नैस्डैक कम्पोजिट भी 1.74 प्रतिशत गिरकर 24,442.94 के स्तर पर पहुंच गया. इस कारोबारी सत्र के बाद वॉल स्ट्रीट का बाजार अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 10 प्रतिशत से अधिक नीचे बंद हुआ, जिसने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी.
अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की रिकवरी
हालांकि गुरुवार सुबह अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में कुछ राहत देखने को मिली. डाऊ जोन्स फ्यूचर्स करीब 158 अंक यानी लगभग 0.3 प्रतिशत ऊपर कारोबार करते दिखाई दिए. वहीं एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में करीब 0.4 प्रतिशत और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में लगभग 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. यह संकेत देता है कि निवेशक अब फेड की आगे की नीति और वैश्विक घटनाक्रमों का आकलन करते हुए नई रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
आगे किन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर?
फिलहाल निवेशकों की निगाह तीन बड़े फैक्टर्स पर बनी रहेगी. पहला, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किस दिशा में जाता है. दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में आगे क्या रुख रहता है. और तीसरा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दर नीति को लेकर आने वाले संकेत क्या होते हैं. जब तक इन मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और सतर्क कारोबार देखने को मिल सकता है.
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