भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की ताकत लगातार बढ़ रही है. अगस्त यानी आजादी के महीने में बाजार की यह तस्वीर काफी अहम है, क्योंकि अब भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों की भूमिका भी लगातार मजबूत हो रही है. म्यूचुअल फंड और आम निवेशकों की हिस्सेदारी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. सबसे खास बात यह है कि Domestic Mutual Funds यानी DMF की बाजार में हिस्सेदारी लगातार 12वीं तिमाही में नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है. जून 2026 तक NSE में लिस्टेड कंपनियों में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 11.6% हो गई. यानी घरेलू म्यूचुअल फंड अब भारतीय शेयर बाजार में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ी ताकत बन चुके हैं.
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म्यूचुअल फंड ने लगाया रिकॉर्ड पैसा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने शेयर बाजार में करीब 1.42 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया. यह लगातार 21वीं तिमाही रही, जब घरेलू म्यूचुअल फंड्स में नेट इनफ्लो देखने को मिला.इसमें SIP की भूमिका बेहद अहम रही. जून तिमाही में औसतन हर महीने SIP के जरिए करीब 31,283 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में आए. यह पिछली तिमाही के मुकाबले 1% और एक साल पहले की तुलना में 16.5% ज्यादा है.यानी भारतीय निवेशक अब सिर्फ बाजार में तेजी देखकर निवेश नहीं कर रहे हैं, बल्कि SIP के जरिए लगातार और लंबे समय के लिए पैसा लगा रहे हैं.
बाजार में घरेलू निवेशकों का दबदबा
म्यूचुअल फंड के साथ-साथ सीधे शेयर खरीदने वाले छोटे निवेशकों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है.जून 2026 में NSE में लिस्टेड कंपनियों में individual investors की हिस्सेदारी बढ़कर 9.5% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. Nifty 50 कंपनियों में यह हिस्सेदारी 7.8% और Nifty 500 कंपनियों में 8.4% रही.खास बात यह है कि वित्त वर्ष 2026 की कुछ तिमाहियों में शेयर बेचने के बाद अब individual investors फिर से बाजार में नेट खरीदार बने हैं. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में छोटे निवेशकों की नेट खरीदारी करीब 42,700 करोड़ रुपये रही, जो छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है.
छोटे निवेशकों की ताकत कितनी?
अगर निवेशकों की सीधे शेयरों में हिस्सेदारी और म्यूचुअल फंड के जरिए हिस्सेदारी को जोड़ दें, तो तस्वीर और बड़ी हो जाती है.जून 2026 तक individual investors की कुल हिस्सेदारी NSE में लिस्टेड कंपनियों के बाजार पूंजीकरण की करीब 19.3% हो गई. यानी हर 100 रुपये के बाजार मूल्य में करीब 19 रुपये की हिस्सेदारी आम भारतीय निवेशकों की है. इसकी कुल वैल्यू करीब 90.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है.और यहां एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. लगातार सातवीं तिमाही में individual investors की संयुक्त हिस्सेदारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI से ज्यादा रही. जून 2026 में दोनों के बीच का अंतर बढ़कर 4.2 प्रतिशत अंक हो गया, जो पिछली तिमाही में 2.9 प्रतिशत अंक था.
घरेलू निवेश क्यों बढ़ रहा है?
भारत में लोगों की बचत का बैंक FD, सोने या दूसरे पारंपरिक विकल्पों से निकलकर शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय निवेश में जाना.आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू परिवारों की कुल वित्तीय बचत में सीधे या म्यूचुअल फंड के जरिए इक्विटी की हिस्सेदारी FY12 में सिर्फ 1.8% थी. FY25 तक यह बढ़कर 15.2% हो गई.इसी तरह घरेलू परिवारों की कुल financial assets में इक्विटी की हिस्सेदारी मार्च 2012 के 11.2% से बढ़कर मार्च 2025 में करीब 23% हो गई.इस बदलाव में SIP का विस्तार, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश आसान होना, लोगों की बढ़ती financial awareness और लंबे समय में शेयर बाजार से मिलने वाला रिटर्न जैसे कई कारण शामिल हैं.
म्यूचुअल फंड किन सेक्टरों पर लगा रहे दांव?
घरेलू म्यूचुअल फंड्स का सेक्टर के हिसाब से निवेश भी दिलचस्प है.जून 2026 तिमाही में म्यूचुअल फंड्स ने Financials यानी बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों पर अपना भरोसा और बढ़ाया. Financials में उनका overweight यानी ज्यादा निवेश वाला रुख कई तिमाहियों के उच्च स्तर पर पहुंच गया.इसके अलावा Consumer Discretionary सेक्टर में भी घरेलू फंड्स का सकारात्मक रुख बना हुआ है, खासकर broader market में.दूसरी तरफ Energy और Materials जैसे commodity-linked सेक्टरों में म्यूचुअल फंड्स का रुख underweight रहा. Consumer Staples में भी उनका रुख नकारात्मक रहा.Healthcare में हल्का सकारात्मक रुख बना रहा, जबकि Information Technology में म्यूचुअल फंड्स का रुख इस तिमाही में थोड़ा नकारात्मक हुआ.
Passive से ज्यादा Active Funds की हिस्सेदारी बढ़ी
म्यूचुअल फंड्स की कुल हिस्सेदारी में passive funds यानी index funds और ETF की हिस्सेदारी करीब 2.1% पर बनी रही.वहीं actively managed funds की हिस्सेदारी पिछली तिमाही के मुकाबले 19 बेसिस प्वॉइंट बढ़कर 9.5% हो गई.इसका मतलब है कि घरेलू फंड्स की बढ़ती हिस्सेदारी में active fund managers की भूमिका अभी भी काफी बड़ी है.
बाजार चढ़ा तो हाउसहोल्ड की संपत्ति बढ़ी
शेयर बाजार में रिकवरी का फायदा घरेलू निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा.वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में अनुमानित household equity wealth में करीब 12.2 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई.अप्रैल 2020 के बाद से अब तक घरेलू परिवारों की इक्विटी वेल्थ में करीब 56 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान है.यानी शेयर बाजार में घरेलू निवेश सिर्फ बाजार को सहारा नहीं दे रहा, बल्कि इसका सीधा असर भारतीय परिवारों की संपत्ति पर भी पड़ रहा है.
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