रुपया दूसरे दिन भी मजबूत, डॉलर के मुकाबले 94.92 पर पहुंचा! RBI के कदमों का दिखा असर, आगे क्या होगा?

सौरभ दीक्षित

• 01:16 PM • 14 Oct 2026

14 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ. शुरुआती कारोबार में रुपया 44 पैसे चढ़कर 94.92 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. रुपये में इस तेजी के पीछे RBI के हालिया कदमों को अहम माना जा रहा है, जिनका मकसद डॉलर की मांग घटाना और रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है. लेकिन क्या रुपया 95 के नीचे टिककर 94.50 के स्तर तक पहुंच सकता है? महंगे कच्चे तेल, डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का रुपये पर क्या असर पड़ेगा? जानिए पूरी कहानी.

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डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने लगातार दूसरे दिन राहत की सांस ली है. 14 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में रुपया 44 पैसे मजबूत होकर 94.92 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया. इससे पहले मंगलवार को भी रुपये में 42 पैसे की तेजी आई थी और यह 95.36 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. यानी जिस रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ था, उसमें अब कुछ सुधार देखने को मिल रहा है. इस मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक यानी RBI के हालिया कदमों को अहम माना जा रहा है. लेकिन कहानी में एक ट्विस्ट भी है. रुपया तो मजबूत हो रहा है, मगर शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली. वहीं, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं. तो सवाल है कि RBI ने ऐसा क्या किया, जिससे रुपये को सहारा मिला? क्या रुपया अब 95 के स्तर से नीचे टिक पाएगा? और क्या आने वाले दिनों में यह 94.50 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है? चलिए, पूरी कहानी आसान भाषा में समझते हैं.

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क्या कहते हैं आंकड़े

सबसे पहले रुपये के ताजा आंकड़े जान लीजिए. 14 अक्टूबर को मुंबई के इंटरबैंक फॉरेन करेंसी मार्केट में रुपया 95.05 रुपये प्रति डॉलर पर खुला. कारोबार आगे बढ़ा, तो रुपये में मजबूती आई और ये 94.92 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया. पिछले बंद भाव के मुकाबले यह 44 पैसे की बढ़त थी.
इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को रुपया 42 पैसे मजबूत होकर 95.36 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. जब एक डॉलर खरीदने के लिए कम रुपये खर्च करने पड़ते हैं, तो रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूत माना जाता है. लेकिन रुपये की मजबूती का मतलब यह नहीं है कि उसकी पुरानी गिरावट पूरी तरह खत्म हो गई है. 

अब बात करते हैं कि RBI ने रुपये को संभालने के लिए क्या किया? रुपये पर दबाव कम करने के लिए RBI ने कई कदम उठाए हैं. पहला मकसद है बाजार में डॉलर की अचानक बढ़ने वाली मांग को कम करना. दूसरा मकसद है रुपये के खिलाफ बड़े सट्टेबाजी वाले दांव पर लगाम लगाना. RBI ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को स्पॉट मार्केट से हटाने के लिए विशेष व्यवस्था की है. स्पॉट मार्केट वह बाजार है, जहां विदेशी मुद्रा की खरीद-बिक्री मौजूदा भाव पर होती है. इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव कारोबार के नियम सख्त किए हैं. डेरिवेटिव ऐसे वित्तीय सौदे होते हैं, जिनकी कीमत किसी दूसरी चीज, जैसे डॉलर या रुपये की कीमत, से जुड़ी होती है.

RBI ने उठाए कदम

RBI ने बैंकों को 20 लाख डॉलर से ज्यादा की खरीद पर 20 फीसदी रिजर्व रखने का निर्देश भी दिया है. इसका मकसद डॉलर की मांग को नियंत्रित करना और रुपये में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकना है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि RBI रुपये की कीमत को किसी एक स्तर पर तय करने की कोशिश नहीं कर रहा. जोर इस बात पर है कि रुपये में अचानक और बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो.