FIIs की लगातार 10वें हफ्ते बिकवाली जारी, DII की खरीदारी भी बेअसर! क्या अब और गिरेगा बाज़ार ?

चिराग ठाकुर

• 01:23 PM • 25 Oct 2026

विदेशी निवेशकों की बिकवाली धीमी हुई, फिर भी मिडकैप और स्मॉलकैप में तेज गिरावट जारी है. जानें निफ्टी के अहम स्तर और बाजार में सुधार के जरूरी संकेत समझें.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

चार कारोबारी सत्रों में निफ्टी हर दिन कमजोरी के साथ बंद हुआ

घरेलू संस्थानों ने करीब एक लाख नौ हजार करोड़ रुपये लगाए

विदेशी बिकवाली पिछले सप्ताह के मुकाबले काफी धीमी जरूर हुई

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की खरीदारी भी गिरावट को थामने में पूरी तरह कामयाब नहीं दिख रही है. पिछले हफ्ते निफ्टी 2.4 फीसदी गिरा, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में नुकसान कहीं ज्यादा रहा. इससे बाजार की कमजोरी को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है.

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विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII लगातार 10वें हफ्ते भारतीय शेयरों के शुद्ध विक्रेता बने रहे. हालांकि, उनकी बिकवाली पिछले हफ्ते के मुकाबले कम हुई. अब सवाल है कि क्या यह बाजार में सुधार की शुरुआत है या निवेशकों को अभी और उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए?

बाजार की गिरावट में छोटे शेयरों को ज्यादा चोट

पिछले हफ्ते छुट्टियों के कारण केवल चार कारोबारी सत्र रहे. इस दौरान निफ्टी सभी चार सत्रों में गिरावट के साथ बंद हुआ.

साप्ताहिक बाजार का हाल:

  • निफ्टी 50 करीब 2.4 फीसदी गिरकर 22,600 पर बंद हुआ.

  • बैंक निफ्टी में 2.8 फीसदी की गिरावट आई.

  • मिडकैप इंडेक्स करीब 5.6 फीसदी टूटा.

  • स्मॉलकैप इंडेक्स में 7.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

निफ्टी के मुकाबले स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब तीन गुना गिरावट बताती है कि बाजार के छोटे शेयरों पर दबाव ज्यादा गहरा रहा. अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक अक्सर ज्यादा जोखिम वाले शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं. ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में भी बिकवाली तेज हो सकती है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर मिडकैप या स्मॉलकैप शेयर में गिरावट आई है. लेकिन बाजार में सुधार का आकलन करते समय अब केवल निफ्टी की चाल देखना पर्याप्त नहीं होगा.

DII की खरीदारी के बावजूद बाजार क्यों गिरा?

पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों ने करीब 26,970 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की. इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की शुद्ध खरीदारी करीब 1.09 लाख करोड़ रुपये रही.

पहली नजर में घरेलू निवेशकों की खरीदारी विदेशी बिकवाली से काफी ज्यादा दिखाई देती है. फिर भी बाजार में गिरावट का सवाल बना हुआ है.

इसे समझने के लिए दो बातें अहम हैं. पहली, FII और DII के आंकड़े इन निवेशक समूहों की शुद्ध खरीद-बिक्री दिखाते हैं, पूरे बाजार की हर गतिविधि नहीं. दूसरी, अलग-अलग शेयरों और सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं होता. कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली सूचकांक पर ज्यादा असर डाल सकती है, जबकि दूसरे शेयरों में खरीदारी जारी रह सकती है.

इसलिए घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा जरूर देती है, लेकिन गिरावट रुकने की गारंटी नहीं देती.

FII की बिकवाली घटी, क्या यह राहत का संकेत है?

पिछले हफ्ते FII की शुद्ध बिकवाली करीब 26,970 करोड़ रुपये रही, जबकि उससे पिछले हफ्ते यह लगभग 89,910 करोड़ रुपये थी.

यानी बिकवाली की रफ्तार में कमी आई है. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. कम बिकवाली का मतलब यह नहीं कि विदेशी निवेशक दोबारा खरीदारी करने लगे हैं.

बाजार में ट्रेंड बदलने की पुष्टि के लिए देखना होगा कि क्या विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार घटती है और क्या वे फिर से शुद्ध खरीदार बनते हैं.

बाजार की अगली चाल तय करेंगे ये 3 संकेत

1. कच्चे तेल की कीमतें. अगर ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो भारत के आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. इसका असर कंपनियों की लागत और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है.

2. कंपनियों की कमाई. गिरावट के बाद शेयर सस्ते दिख सकते हैं, लेकिन निवेशकों को यह भी देखना होगा कि उनकी कीमत भविष्य की कमाई के मुकाबले कितनी आकर्षक है. कमजोर नतीजे दबाव को बनाए रख सकते हैं.

3. निफ्टी के अहम स्तर. तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, 22,200 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट है. इसके नीचे निर्णायक गिरावट से दबाव बढ़ सकता है. वहीं, 22,700 से 22,800 का दायरा बाजार के लिए अहम रेजिस्टेंस रहेगा.

बाजार में रिकवरी की पहचान कैसे करें?

निफ्टी में तेजी आना रिकवरी का एक संकेत हो सकता है, लेकिन मजबूत सुधार के लिए बाजार में व्यापक भागीदारी भी जरूरी है. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट थमना और ज्यादा शेयरों का संभलना इस बात का बेहतर संकेत दे सकता है कि निवेशकों का भरोसा लौट रहा है.

फिलहाल, FII की बिकवाली में कमी राहत जरूर देती है, लेकिन इसे ट्रेंड बदलने का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता. आगे बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों के रुख, कंपनियों की कमाई और गिरावट से उबरने वाले शेयरों की संख्या पर निर्भर करेगी.