पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में IPO यानी Initial Public Offering को लेकर निवेशकों का उत्साह लगातार बढ़ा है. कई कंपनियों के IPO ने लिस्टिंग के पहले ही दिन निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. लेकिन हर IPO ऐसा नहीं होता. हाल के समय में कई ऐसे भी इश्यू देखने को मिले, जिनमें निवेश करने वाले लोगों को लिस्टिंग के बाद भारी नुकसान उठाना पड़ा. कुछ शेयर तो अपने इश्यू प्राइस से 50% से 70% तक नीचे कारोबार करने लगे.
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यही वजह है कि किसी IPO में सिर्फ चर्चा, सोशल मीडिया पर बनी हाइप या ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं मानी जाती. किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी के बिजनेस, वित्तीय स्थिति, जोखिम और भविष्य की संभावनाओं को समझना बेहद जरूरी होता है.
आइए जानते हैं कि IPO में आवेदन करने से पहले किन 10 बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए.
DRHP पढ़ना क्यों जरूरी है?
किसी भी IPO को समझने की शुरुआत उसके Draft Red Herring Prospectus (DRHP) से होती है. यह वह दस्तावेज होता है जिसे कंपनी बाजार नियामक के पास जमा करती है. इसमें कंपनी के कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन, प्रमोटरों की जानकारी, संभावित जोखिम, जुटाई जाने वाली राशि और उसके इस्तेमाल सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं. अगर कोई निवेशक कंपनी को गंभीरता से समझना चाहता है, तो DRHP पढ़ना सबसे पहला कदम होना चाहिए.
IPO से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कहां होगा?
हर IPO का उद्देश्य एक जैसा नहीं होता. इसलिए यह समझना जरूरी है कि कंपनी निवेशकों से जुटाई गई रकम का उपयोग किस काम में करेगी.
अगर कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल नए प्रोजेक्ट, कारोबार विस्तार, उत्पादन क्षमता बढ़ाने या नए निवेश में करने जा रही है, तो इसे सकारात्मक माना जा सकता है.
वहीं, अगर IPO का बड़ा हिस्सा केवल कर्ज चुकाने या पुराने निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने यानी Offer for Sale (OFS) के लिए इस्तेमाल हो रहा है, तो निवेशकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए.
कंपनी का बिजनेस समझना सबसे जरूरी
किसी भी निवेश से पहले यह जानना जरूरी है कि कंपनी आखिर करती क्या है.
खुद से कुछ सवाल जरूर पूछें.
- कंपनी कौन-सा प्रोडक्ट या सर्विस देती है?
- उसकी कमाई का मुख्य स्रोत क्या है?
- उसके प्रमुख ग्राहक कौन हैं?
- भविष्य में कारोबार बढ़ने की कितनी संभावना है?
अगर कंपनी का बिजनेस मॉडल ही समझ में नहीं आता, तो उसमें निवेश करने से बचना बेहतर माना जाता है.
प्रमोटर और मैनेजमेंट का रिकॉर्ड जरूर देखें
किसी भी कंपनी की दिशा और भविष्य काफी हद तक उसके प्रमोटरों और मैनेजमेंट टीम पर निर्भर करता है. इसलिए यह जांचना जरूरी है कि प्रमोटरों का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है. क्या पहले किसी तरह का कानूनी विवाद या कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी समस्या सामने आई है. साथ ही यह भी देखें कि मैनेजमेंट टीम को इस उद्योग में कितना अनुभव है.
कंपनी जिस सेक्टर में है, उसका भविष्य कैसा है?
अच्छी कंपनी के साथ-साथ अच्छा सेक्टर भी जरूरी होता है. अगर कंपनी ऐसे उद्योग में काम कर रही है जहां आने वाले वर्षों में तेज ग्रोथ की संभावना है और उसकी बाजार में अच्छी स्थिति है, तो लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है. इसलिए केवल कंपनी नहीं, बल्कि उसके पूरे उद्योग की संभावनाओं को भी समझना जरूरी है.
कंपनी की ताकत और आगे की रणनीति जानें
हर सफल कंपनी की कुछ खास ताकत होती है. यह मजबूत ब्रांड, बड़ी ग्राहक संख्या, नई तकनीक, कम लागत पर उत्पादन या मजबूत वितरण नेटवर्क के रूप में हो सकती है. साथ ही यह भी समझें कि कंपनी भविष्य में किस रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है और उसकी ग्रोथ की योजना क्या है.
वित्तीय स्थिति और वैल्यूएशन की जांच करें
IPO में निवेश से पहले कंपनी के पिछले कम से कम तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन को जरूर देखें.
इन बातों पर खास ध्यान दें.
- Revenue लगातार बढ़ रहा है या नहीं.
- Profit में स्थिर वृद्धि है या नहीं.
- कंपनी पर कितना कर्ज है.
- EBITDA और Margin की स्थिति कैसी है.
- IPO का वैल्यूएशन अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में महंगा है या उचित.
इन आंकड़ों से कंपनी की वित्तीय मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है.
प्रतिस्पर्धियों से तुलना करना क्यों जरूरी है?
किसी भी कंपनी को अकेले देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए.
उसी सेक्टर की दूसरी सूचीबद्ध कंपनियों से उसकी तुलना करें.
Revenue Growth, Profit Margin, Return Ratios और P/E या EV/EBITDA जैसे वैल्यूएशन संकेतकों की तुलना करने से यह समझने में मदद मिलती है कि IPO उचित कीमत पर आ रहा है या नहीं.
Risk Factors को नजरअंदाज न करें.
DRHP का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Risk Factors माना जाता है. यहीं कंपनी उन सभी जोखिमों का जिक्र करती है जिनका असर भविष्य में कारोबार पर पड़ सकता है. इस सेक्शन से यह पता चलता है कि क्या कंपनी किसी कानूनी विवाद में फंसी है. क्या उसका कारोबार कुछ चुनिंदा ग्राहकों पर निर्भर है. या फिर किसी एक सप्लायर या सेक्टर पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता है. इन जोखिमों को समझे बिना निवेश का फैसला अधूरा माना जाता है.
पहले तय करें आपका लक्ष्य क्या है?
IPO में आवेदन करने से पहले यह तय कर लें कि आपका उद्देश्य क्या है. क्या आप केवल Listing Gain कमाना चाहते हैं. या फिर कई वर्षों तक कंपनी में निवेश बनाए रखना चाहते हैं. दोनों रणनीतियों में कंपनी चुनने का तरीका अलग हो सकता है. इसलिए निवेश से पहले अपना लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए.
सिर्फ GMP देखकर फैसला लेना क्यों गलत हो सकता है?
आज के समय में कई निवेशक केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम, सोशल मीडिया की चर्चा या दूसरों की सलाह के आधार पर IPO में आवेदन कर देते हैं. लेकिन हर IPO का प्रदर्शन अलग होता है. कुछ कंपनियां शानदार रिटर्न देती हैं, जबकि कई लिस्टिंग के बाद लगातार गिरावट का सामना करती हैं. इसलिए किसी भी IPO में निवेश करने से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन, जोखिम और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी है.
निष्कर्ष
IPO में निवेश केवल लिस्टिंग के दिन मुनाफा कमाने का जरिया नहीं है. सही कंपनी का चयन करना सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है. अगर निवेश बिना रिसर्च और सिर्फ भीड़ को देखकर किया जाए, तो नुकसान की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है. इसलिए किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले इन 10 बातों की जांच जरूर करें. यही आदत आपको बेहतर निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकती है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न की मजबूत नींव तैयार कर सकती है.
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